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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 8 / 48

यहेजकेल 8

1तब छठवें वर्ष के छठवें महीने के पांचवें दिन ऐसा हुआ कि जब मैं अपने घर में बैठा था और यहूदा के प्राचीन मेरे सामने बैठे थे तो प्रभु यहोवा का हाथ मुझ पर आ ठहरा।

2तब मैंने दृष्टि की और देखो, मनुष्य का सा एक रूप दिखाई पड़ा, उसकी कमर से नीचे तक अग्नि-सी तथा कमर से ऊपर प्रज्जवल धातु की चमक सी दिखाई पड़ी।

3उसने एक हाथ-सा बढ़ाया और मेरे सिर की लट को पकड़ लिया और आत्मा ने मुझे पृथ्वी और आकाश के बीच उठा लिया और परमेश्वर के दर्शन में डालकर यरूशलेम के भीतरी आंगन के उस फाटक पर पहुंचाया जो उत्तर की ओर है, और जहां जलन भड़काने वाली उस मूर्ति का आसन था जो जलन ही का कारण है।

4और देखो, वहां इस्राएल के परमेश्वर का तेज वैसा ही था जैसा मैंने मैदान में दर्शन में देखा था।

5तब उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, अब अपनी आंखें उत्तर की ओर कर।” अतः मैंने अपनी आंखें उत्तर की ओर कीं और देखो, वेदी के फाटक के उत्तरी ओर प्रवेशद्वार पर वही जलन उत्पन्न करने वाली मूर्ति थी।

6और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, क्या तू इस्राएल के घराने के अत्यन्त घृणित कार्यों को देखता है जिन्हें वे इसलिए कर रहे हैं कि मैं अपने पवित्रस्थान से दूर रहूं? परन्तु तू इनसे भी अधिक घृणित कार्य देखेगा।”

7तब वह मुझे आंगन के प्रवेशद्वार पर ले गया और जब मैंने दृष्टि की तो देखो, दीवार में एक छेद था।

8और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, इस दीवार को फोड़।” और मैंने दीवार को फोड़ा, और देखो, वहां एक द्वार था।

9और उसने मुझसे कहा, “भीतर जाकर उन अत्यन्त घृणित कार्यों को देख जो वे यहां कर रहे है।”

10अतः मैंने भीतर जाकर दृष्टि की, और देखो, चारों ओर दीवार पर हर प्रकार के रेंगने वाले जन्तुओं और पशुओं और घृणित वस्तुओं तथा उनके साथ इस्राएल के घराने की मूर्तियां खुदी हुई थी।

11और उनके सामने इस्राएल के घराने के सत्तर प्राचीन खड़े थे जिनके मध्य शापान का पुत्र याजन्याह खड़ा था। प्रत्येक के हाथ में धूपदान था और उसमें से धूप से सुगन्धित धुएं का बादल उठ रहा था।

12और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, क्या तू देखता है कि अन्धेरे में, इस्राएल के घराने के प्राचीन अपनी-अपनी खुदी हुई मूर्तियों के कमरे में क्या-क्या कर रहे हैं? वे तो कहते हैं कि यहोवा हमें नहीं देखता; यहोवा ने देश को त्याग दिया है।”

13और उसने मुझसे कहा, “तू इनसे भी अधिक घृणित कार्य देखेगा जो वे करते है।”

14तब वह मुझे यहोवा के भवन के उस प्रवेशद्वार पर लाया जो उत्तर की ओर था; और वहां बैठी हुई स्त्रियां तम्मूज के लिए रो रही थी।

15तब उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, क्या तू यह देखता है? तू इनसे भी अधिक घृणित कार्य देखेगा।”

16तब वह मुझे यहोवा के भवन के भीतरी आंगन में ले आया। और देखो, यहोवा के मन्दिर के प्रवेशद्वार पर ओसारे और वेदी के बीच, लगभग पच्चीस जन थे जिनकी पीठ यहोवा के मन्दिर की ओर थी तथा मुख पूर्व की ओर था; और वे पूर्व की ओर मुख करके सूर्य को साष्टांग प्रणाम कर रहे थे।

17और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, क्या तू यह देखता है? यहूदा के घराने के लोग जो ये कार्य करते हैं, क्या यह उनके लिए हल्की बात है? उन्हाेंने देश को हिंसा से भर दिया है और मुझे बार-बार भड़काया है। उन्हें देख, वे अपनी नाक के सामने टहनी रख कर मुझे चिढ़ाते है।

18इसलिए मैं भी उनसे क्रोध का व्यवहार करूंगा; मैं उन पर न तो दया करूंगा, न उन्हें छोडूंगा। चाहे वे मेरे कानों में ऊंचे स्वर से पुकारे, मेैं उनकी न सुनूंगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)