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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 21 / 48

यहेजकेल 21

1तब यहोवा का वचन मेरे पास पहुंचा,

2“हे मनुष्य की सन्तान, अपना मुख यरूशलेम की ओर कर और पवित्र-स्थानों के विरुद्ध बोल और इस्राएल देश के विरुद्ध नबूवत कर;

3और इस्राएल देश से कह, “यहोवा यों कहता है,” “देख मैं तेरे विरुद्ध हूं, मैं म्यान से तलवार खीचूंगा और तुझमें से धर्मी और दुष्ट दोनों को काट डालूंगा।

4“क्योंकि मैं तुझमें से धर्मी और दुष्ट दोनों को काट डालूंगा, और मेरी तलवार अपनी म्यान से निकलकर दक्षिण से उत्तर तक सब प्राणियों के विरुद्ध चलेगी।

5इस प्रकार सब प्राणी जान लेंगे कि मुझ यहोवा ने अपनी तलवार म्यान में से खींच ली है। वह म्यान में फिर वापस नहीं जाएगी।

6परन्तु हे मनुष्य की सन्तान, तू अत्यन्त दुख के साथ उनके सामने हृदय विदारक आह भर,

7और ऐसा होगा कि जब वे तुझसे पूछें, कि तू क्यों आह भरता है तो तू कहना, उस समाचार के कारण जो आने वाला है; सबके दिल टूट जाएंगे और सबके हाथ ढीले पड़ जाएंगे, सबके हृदय निराश हो जाएंगे और सबके घुटने निर्बल हो जाएंगे, देखो ऐसा होने वाला है, और ऐसा ही होगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”

8फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,

9“हे मनुष्य की सन्तान, नबूवत करके कहः यहोवा यों कहता है कि तू ऐसा कह, देख, ‘तलवार, सान चढ़ाई हुई तलवार और चमकाई हुई तलवार।

10वह संहार करने के लिए सान चढ़ाई गई है, बिजली की तरह कौंधने के लिए चमकाई गई है!’ तो क्या हम हर्षित हों, वह तो यहोवा के पुत्र का राजदण्ड है जो प्रत्येक वृक्ष को तुच्छ जानता है।

11और वह इसलिए चमकाई गई है कि उपयोग में लाई जाए, उस पर सान चढ़ाई गई, और वह इसलिए चमकाई गई है कि घात करनेवाले के हाथ में दी जाए।

12हे मनुष्य की सन्तान, जोर से रो और विलाप कर क्योंकि यह मेरे लोगों पर चलने को है, यह इस्राएल के सब प्रधानों पर चलने को है। मेरे लोगों के साथ वे भी तलवार के वश में कर दिए गए हैं, इसलिए तू अपनी छाती पीट।

13क्योंकि परीक्षा का समय आ गया है; और यदि तू राजदण्ड को तुच्छ समझे दण्ड तो उससे क्या? प्रभु यहोवा की यही वाणी है।

14“इसलिए हे मनुष्य की सन्तान, तू नबूवत कर और ताली बजा। तलवार, हां, घात किए जाने वालों के लिए तलवार दुबारा वरन् तिबारा प्रहार करे। यह तलवार तो महावध के लिए है, जो उन्हें घेर लेती है,

15जिससे उनके हृदय पिघल जाएं और उनके सब फाटकों पर अनेक धराशायी हो जाए। मैंने तो चमचमाती तलवार दी है। आह! वह तो बिजली के समान प्रहार करने के लिए बनाई गई है और घात करने के लिए उस पर सान चढ़ाई जा चुकी है।

16अपनी धार दिखा, दाहिनी ओर जा, तत्पर हो जा, बाईं ओर जा-जिस ओर भी तेरी धार हो, वार कर।

17मैं भी ताली बजाऊंगा, और अपने क्रोध को शान्त करूंगा; मुझ यहोवा ने ऐसा कहा है।”

18तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,

19­“हे मनुष्य की सन्तान, बेबीलोन के राजा की तलवार के आने के लिए तू दो मार्ग तैयार कर; वे दोनों एक ही देश से निकलें फिर एक मार्ग सूचक चिह्न बना। उसे नगर की ओर जाने वाले मार्ग के सिरे पर लगा।

20तू अम्मोनियों के रब्बा पर तथा यहूदा के गढ़ वाले नगर यरूशलेम पर तलवार आने के लिए मार्ग तैयार कर।

21बेबीलोन का राजा दो मार्ग अर्थात् दोनों रास्तों के निकलने के स्थान पर खड़ा है कि शकुन विचारे। वह तीरों को हिलाता, गृहदेवताओं से पूछता और कलेजे को भी देखता है।

22उसके दाहिने हाथ में यरूशलेम के लिए शकुन है कि उसको चूर चूर करने के लिए युद्ध यंत्र लगाए, और मुंह खोलकर घात करने की आज्ञा दे, ऊंचे शब्द से ललकारे, प्रवेश-द्वारों पर युद्ध के यंत्र लगाए, टीले बनाए और दमदमा बान्धे।

23यह उनकी दृष्टि में झूठा शकुन ठहरेगा। उन्होंने पक्की शपथ खाई है, परन्तु वह अधर्म का स्मरण कराता है कि वे बन्दी बनाए जाए।

24इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः क्योंकि तुम्हारे अपराध प्रकट हो गए हैं, तुमने अपने अधर्म को स्मरण कराया है, जिससे तुम्हारे सब कार्यों में पाप ही पाप दिखाई देते हैं, हां, इसलिए कि तुम स्मृति-चिह्न बन गए हो, तुम उन्हीें के कारण बन्दी बनाए जाओगे।

25‘हे इस्राएल के अधर्मी और दुष्ट प्रधान, तेरा अन्तिम दिन और दण्ड का समय आ गया है।

26प्रभु यहोवा यों कहता है; पगड़ी उतार दे, मुकुट भी उतार दे। अब यह वैसा नहीं रहेगा। जो नीचा है उसे ऊंचा और जो ऊंचा है उसे नीचा कर।

27विनाश, विनाश, मैं इसका सर्वनाश करूंगा। जब तक इसका अधिकारी न आए यह ऐसा ही उजाड़ रहेगा, और मैं उसे यह सौंप दूंगा’

28“हे मनुष्य की सन्तान, तू नबूवत करके कह कि अम्मोनियों और उनकी निन्दा के विषय में प्रभु यहोवा यों कहता हैः तलवार, म्यान से खींची तलवार जो घात के लिए चमकाई गई है कि भस्म करने के काम आए और बिजली के समान ठहरे।

29जबकि वे तेरे लिए झूठे दर्शन देखते, झूठा शकुन विचारते हैं-कि तू उन घात होने वाले दुष्टों की गर्दनों पर पड़े जिनका अन्तिम दिन और दण्ड का समय आ गया है।

30उसे म्यान में रख ले। जिस स्थान में तू बनाई गई थी, अर्थात् तेरी उत्पत्ति के देश में ही मैं तेरा न्याय करूंगा।

31मैं तुझ पर अपना कोप उंडेल दूंगा, तुझ पर अपने क्रोध की अग्नि भड़काऊंगा, और मैं तुझे क्रूर लोगों के हाथ में सौंप दूंगा जो विनाश करने में निपुण है।

32तू आग के लिए ईंधन ठहरेगी, तेरा खून देश में बहेगा और तुझे स्मरण न किया जाएगा, क्योंकि मुझ यहोवा ने ऐसा ही कहा है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)