पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 22 / 48
यहेजकेल 22
1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
2“हे मनुष्य की सन्तान, क्या तू न्याय न करेगा? क्या तू इस खूनी नगरी का न्याय न करेगा? तू उसके सब घृणित कार्य उसे जता दे।
3और तू कहना कि प्रभु यहोवा यों कहता है, हे नगरी तू जो अपने मध्य रक्तपात करती है जिससे तेरा समय आए और तू अपने हित के विरुद्ध अशुद्ध होने के लिए मूर्तियां गढ़ती है।
4तू रक्तपात करने के कारण दोषी, तथा गढ़ी हुई मूर्तियों के कारण तू स्वयं अशुद्ध ठहरी है। इस प्रकार तू अपने दिन पूरे कर चुकी और अपने वर्षों के अन्त में पहुंच गई है, अतः मैंने तुझे जाति-जाति के लिए निन्दा और सब देशों के लिए ठट्ठे का कारण ठहराया है।
5हे बदनाम और कोलाहल से भरी हुई नगरी जो तेरे समीप और तुझसे दूर हैं वे सब तेरा ठट्ठा करेंगे।
6देख, इस्राएल के शासक अपने सामर्थ्य के अनुसार रक्तपात करने के लिए तुझमें रहे है।
7उन्होंने तुझमें अपने-अपने माता-पिता को तुच्छ जाना, विदेशियों का दमन किया और अनाथ तथा विधवा के साथ अन्याय किया है।
8तूने मेरी पवित्र वस्तुओं को तुच्छ जाना और मेरे सब्त के दिनों को अपवित्र किया है।
9ओछे लोग रक्तपात करने के लिए तुझमें रहे हैं, उन्होंने पर्वतों की वेदियों का भोजन खाया है और तेरे मध्य उन्होंने व्यभिचार के काम किए है।
10तुझमें उन्होंने पिता की नग्नता को उघाड़ा है, तुझमें उन्होंने ट्टतुमति स्त्री से बलात्कार किया है।
11किसी ने अपने पड़ोसी की पत्नी से कुकर्म किया, तो किसी ने अपनी पुत्र-वधू के साथ व्यभिचार करके उसे भ्रष्ट किया, तो किसी ने तुझमें अपनी बहन अर्थात् अपने पिता की पुत्री से बलात्कार किया है।
12तुझमें हत्या करने के लिए उन्होंने घूस ली, तूने सूद और ब्याज लिया, तूने दमन करके लाभ के लिए अपने पड़ोसी को चोट पहुंचाई तथा तूने मुझे भुला दिया,” यहोवा की यही वाणी है।
13“इसलिए देख, तूने अन्याय से जो लाभ प्राप्त किया और तेरे मध्य जो रक्तपात हुआ उन दोनों के कारण मैं तुझ पर हाथ उठाता हू।
14जिन दिनों मैं तेरे साथ निपटूं, क्या तेरा हृदय सह सकेगा, या तेरे हाथ दृढ़ रह सकेंगे? मुझ यहोवा ने यह कहा है, मैं ऐसा ही करूंगा।
15मैं तुझे जाति-जाति के मध्य तितर-बितर कर दूंंगा और देश-देश में बिखेर दूंगा, और तेजी अशुद्धता को तुझमें से मिटा दूंगा।
16और तू जाति-जाति के देखते हुए अपने आपको अशुद्ध ठहराएगी और जान जाएगी कि मैं ही यहोवा हू।”
17तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
18“हे मनुष्य की सन्तान, इस्राएल का घराना मेरी दृष्टि में धातु का मैल हो गया है। उसके सब लोग भट्टी में का कांसा, रांगा, लोहा और सीसा हैं; वे चांदी का मैल है।
19अतः प्रभु यहोवा यों कहता हैः इसलिए कि तुम सबके सब धातु का मैल हो गए हो, देखो, मैं तुम्हें यरूशलेम के मध्य इकट्ठा करने वाला हू।
20जैसे वे चांदी, कांसा, लोहा, सीसा और रांगा पिघलाने के लिए भट्टी में इकट्ठा करके उस पर आग धधकाते हैं, वैसे ही मैं अपने क्रोध व प्रकोप में तुम्हें इकट्ठा करके भट्टी में डालकर पिघलाऊंगा।
21मैं तुम्हें इकट्ठा करूंगा और तुम्हारे ऊपर अपनी क्रोधाग्नि भड़काऊंगा और तुम उसके मध्य पिघलाए जाओगे।
22जैसे चांदी भट्टी में पिघलाई जाती है वैसे तुम भी उसके मध्य पिघलाए जाओगे। तब तुम जान लोगे कि मुझ यहोवा ने तुम पर अपना क्रोध उंडेला है।”
23तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
24“हे मनुष्य की सन्तान, उससे कहः तू वह भूमि है जो क्रोध के दिन शुद्ध नहीं हुई और न जिस पर वर्षा हुई।
25जिसमें गरजने वाले और अपने शिकार को फाड़ने वाले सिंह के समान उसके मध्य नबियों ने षड्यन्त्र किया है। उन्होंने प्राणियों को खा लिया, उन्होंने ख़जाने और बहुमूल्य वस्तुओं को हड़प लिया है। उन्होंने उसमें की अनेक स्त्रियों को विधवा बना दिया है।
26उसके याजकों ने मेरी व्यवस्था का उल्लंघन किया है और मेरी पवित्र वस्तुओं को भ्रष्ट किया है; उन्होंने पवित्र-अपवित्र में कोई भेद नहीं किया, उन्होंने शुद्ध-अशुद्ध में कोई अन्तर नहीं सिखाया, वे मेरे पवित्र सब्त के दिनों से आंखें चुराते है। मैं उनके मध्य अपवित्र ठहरा हू।
27उसमें के प्रधान, फाड़ खाने वाले भेड़ियों के समान है। वे अन्याय से लाभ उठाने के लिए लहू बहाते और जीवन नष्ट करते है।
28उसके नबी अपने झूठ पर लीपा पोती करते, झूठे दर्शन देखते, झूठा शकुन विचारते और जबकि परमेश्वर ने उनसे कुछ नहीं कहा, वे कहते हैं, ‘परमेश्वर यहोवा यों कहता है’
29और देश के लोगों ने अन्धेर किया, लूट-पाट की, और दीन-दरिद्र के साथ अन्याय किया, और अन्यायपूर्वक परदेशी का दमन किया।
30मैंने उनके मध्य एक ऐसे मनुष्य की खोज की जो शहरपनाह की मरम्मत करे, और देश के लिए दरार में मेरे सामने खड़ा हो जिससे मैं उसे नष्ट न करूं; परन्तु मुझे कोई न मिला।
31अतः मैंने अपना क्रोध उन पर उंडेल दिया और अपनी क्रोधाग्नि से उन्हें भस्म कर दिया है। मैंने उनकी चाल उन्हीं के सिर पर लौटा दी है।” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)