Loading account

पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 27 / 48

यहेजकेल 27

1फिर यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा;

2“हे मनुष्य की सन्तान, सूर के विषय में एक विलापगीत आरम्भ कर,

3और समुद्र-तट के अनेक द्वीपों से व्यापार करने वाली नगरी अर्थात् समुद्र के प्रवेशद्वार पर स्थित सूर से कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे सूर, तूने कहा है, ‘मैं सर्वांग सुन्दर हू।’

4तेरी सीमाएं समुद्र के मध्य हैं, तेरे निर्माताओं ने तुझे सर्वांग सुन्दर बनाया है।

5उन्होंने तेरे सब तख़्ते सनीर के सनौवर और मस्तूल लेबनोन के देवदार से बनाए है।

6तेरी पतवारें उन्हाेंने बाशान के बांज वृक्षों, और तेरे फ़र्श साइप्रस द्वीप के सनौवर से हाथी दांत जड़कर बनाए है।

7तेरा पाल मिस्र के कशीदा किये हुए महीन मलमल का बना था, इसलिए वह तेरी ध्वजा बन गई। और तेरी चांदनी एलीशा के द्वीपों से लाए गए नीले और बैंजनी कपड़ों से बनी थी।

8सीदोन और अर्वद के रहने वाले तेरे मांझी थे। हे सूर, तेरे मध्य पाए जाने वाले बुद्धिमान लोग तेरे नाविक थे।

9गेबाल के पुरनिये और बुद्धिमान मनुष्य मरम्मत करने के लिए तेरे साथ थे। समुद्र के सारे जहाज और उनके नाविक तेरा व्यापार सम्भालने के लिए तेरे साथ थे।

10तेरी सेना में फारसी, लूदी और पूती योद्धा थे। वे तुझमें अपनी ढालें और टोप टांग कर तेरा प्रताप बढ़ाते थे।

11तेरी शहरपनाह पर चारों ओर अर्वदी और तेरी सेना के लोग थे, और तेरी गुम्मटों पर गम्मदी थे। उन्होंने चारों ओर शहरपनाह पर अपनी ढालें लटकाई थी। उन्होंने तेरी सुन्दरता को परिपूर्ण किया।

12सब प्रकार के धन की बहुतायत के कारण तर्शीश तेरा ग्राहक था। उसके लोग चांदी, लोहा, रांगा और सीसा द्वारा तेरे माल का दाम चुकाते थे।

13यावान, तूबल और मेशेक तुझसे व्यापार करते थे। दास-दासी तथा कांसे के पात्रों द्वारा वे दाम चुकाते थे।

14बेत-तोगर्मा के निवासी तेरे माल के बदले घोड़े, युद्ध के घोड़े और खच्चर देते थे।

15ददानी तुझसे व्यापार करते थे। अनेक द्वीप तेरा बाजार थे। वे हाथीदांत और आबनूस लाकर तेरा दाम चुकाते थे।

16तेरे माल की बहुतायत के कारण सीरिया तेरा ग्राहक था। उसके लोग मरकत, बैंजनी कपड़ा और बूटेदार वस्त्र, महीन मलमल, मूंगा और लालड़ी द्वारा मूल्य चुकाते थे।

17यहूदा और इस्राएल देश तेरे साथ व्यापार करते थे। वे तेरे माल के बदले मिन्नीत के गेहूं, मीठी रोटी, शहद, तेल और मरहम द्वारा मूल्य चुकाते थे।

18तेरे माल और सब प्रकार की धन सम्पत्ति की बहुतायत के कारण दमिश्क तेरे साथ हेलबोन के दाखमधु और श्वेत ऊन का व्यापार करता था।

19वदान और यावान ऊजल के माल के बदले तुझसे लोहे, तेजपात और अगर का व्यापार करते थे।

20ददान तेरे साथ घोड़ों की जीन के कपड़े का लेन-देन करता था।

21अरब और केदार के सब प्रधान तेरे साथ मेमनों, मेढ़ों और बकरों का व्यापार करते थे। इनके लिए वे तेरे साथ लेन-देन करते थे।

22शबा और रामा के व्यापारी तेरे साथ लेन-देन करते थे। वे सब प्रकार के उत्तम मसालों, सब प्रकार के मूल्यवान जवाहरात और सोना देकर तेरा माल खरीदते थे।

23हारान, कन्ने, अदन, शबा, अश्शूर और कलमद के व्यापारी तेरे साथ लेन-देन करते थे।

24वे तेरे साथ अपने व्यापार में उत्तम-उत्तम वस्त्रों, बूटेदार नीले कपड़ों, भिन्न-भिन्न रंग के गलीचों, तथा बटी हुई रस्सियों का व्यापार करते थे।

25तर्शीश के जहाज तेरा माल ढोया करते थे। तू समुद्र के मध्य सम्पन्न और अति प्रतिष्ठित हो गई थी।

26तेरे मांझी तुझे गहरे जल में ले आए हैं; पूर्वी पवन ने तुझे समुद्र के बीचोंबीच तोड़ दिया है।

27तेरे विनाश के दिन तेरी धन-सम्पत्ति, तेरे माल-असबाव, तेरे व्यापार के माल, तेरे मांझी, तेरे नाविक, मरम्मत करने वाले तेरे कारीगर, तेरे व्यापारी, तेरे सब सैनिक, और तेरी सारी टुकड़ियां जो तेरे साथ हैं, वे सब समुद्र के गर्त में समा जाएंगे।

28तेरे नाविकों की चीख-पुकार से सारे तटवर्ती क्षेत्र थरथरा उठेंगे।

29और सब खेने वाले, अर्थात् मांझी और समुद्र के सब नाविक अपने-अपने जहाज़ों से उतरकर भूमि पर खड़े हो जाएगे।

30वे तेरे लिए जोर-जोर से चिल्लाएंगे और फूट-फूट कर रोएंगे। वे अपने सिर पर धूल डालेंगे और राख में लोटेंगे।

31वे तेरे कारण अपना सिर मुंडवा लेंगे और टाट ओढ़ेंगे, तथा घोर सन्ताप के कारण तेरे लिए रोएंगे और अत्यधिक शोकित होंगे।

32इसके अतिरिक्त वे शोक में तेरे लिए विलापगीत रचेंगे और तेरे लिए यह कहकर शोक करेंगे कि सूर के समान कौन है? जो समुद्र के मध्य चुपचाप पड़ी है,

33जब तेरा माल समुद्र द्वारा बाहर जाता था तब बहुत-सी जातियां उससे तृप्त होती थी। तूने अपने धन और माल की बहुतायत से पृथ्वी के राजाओं को धनी कर दिया।

34अब, जबकि तू समुद्र की गहराई में लहरों से टूट गई है तो तेरा माल और तेरे सब साथी भी तेरे साथ नष्ट हो गए है।

35समुद्र तट के सब निवासी तेरे कारण विस्मित हैं और उनके राजा अत्यधिक भयभीत हैं; उनके मुख पर भय छा गया है।

36देश-देश के लोगों के मध्य व्यापारी तुझ पर सीटीं बजाते है। तू भय का कारण हो गई है, अब तेरा अस्तित्व ही न रहेगा।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)