पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 28 / 48
यहेजकेल 28
1यहोवा का यह वचन मेरे पास फिर पहुंचाः
2“हे मनुष्य की सन्तान, सूर के शासक से कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः इसलिए कि तेरा मन फूल उठा है, और तूने कहा कि मैं ईश्वर हूं, मैं समुद्रों के मध्य ईश्वरों के आसन पर बैठा हूं, और यघपि तू अपना हृदय परमेश्वर-सा दिखाता है फिर भी तू परमेश्वर नहीं, वरन् मनुष्यमात्र है-
3देख, तू दानिएल से भी अधिक बुद्धिमान है, कोई भी भेद तुझसे छिपा नहीं है।
4अपनी बुद्धिमानी और समझदारी से तूने अपने लिए धन अर्जित किया है, और अपने कोषागारों के लिए सोना-चांदी प्राप्त किया है।
5तूने बड़ी बुद्धिमानी और व्यापार से अपने धन की वृद्धि की है, और तेरे धन के कारण तेरा हृदय फूल गया है-
6इस कारण प्रभु यहोवा यों कहता हैः इसलिए कि तूने अपने हृदय को परमेश्वर के हृदय के समान बनाया है,
7देख, मैं तेरे ऊपर विदेशी अर्थात् जाति-जाति में से अत्यन्त क्रूर लोगों को चढ़ा लाऊंगा। वे तेरी बुद्धिमानी की शोभा पर तलवार चलाएंगे और तेरे वैभव को बिगाड़ देंगे।
8वे तुझे कब्र में उतार देंगे और तू समुद्र के मध्य घात किए हुओं की-सी मौत मरेगा।
9क्या तू अपने घात करने वालों के समक्ष याें कहेगा, ‘मैं ईश्वर हूं,’ जबकि तू अपने घायल करने वालों के हाथ में परमेश्वर नहीं, मनुष्य ही है?
10तू विदेशियों के हाथ से ख़तनारहित की मृत्यु मरेगा, क्योंकि मैंने ऐसा कहा है,” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
11यहोवा का वचन फिर मेरे पास पहुंचाः
12“हे मनुष्य की सन्तान, सूर के राजा के विषय में विलापगीत आरम्भ कर और उससे कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः तुझ पर सिद्धता की छाप लगी थी, तू बुद्धि से परिपूर्ण और सर्वांग सुन्दर था।
13तू परमेश्वर के उघान अदन में था। तेरे वस्त्र हर प्रकार के बहुमूल्य माणिक्य अर्थात् लालमणि, पुखराज, हीरा, फीरोजा, सुलैमानी मणि, यशव, नीलमणि, मरकत और लाल से जड़े थे, ये सब सोने के कलापूर्ण खांचों और घरों में जड़ेे हुए थे। जिस दिन तू सृजा गया, उसी दिन वे तैयार किए गए।
14तू सुरक्षा प्रदान करने वाला अभिषिक्त करूब था, और मैंने तुझे वहां रखा था। तू परमेश्वर के पवित्र पर्वत पर था; तू अग्निमय पत्थरों के मध्य चलता-फिरता था।
15अपने सृजे जाने के दिन से लेकर जब तक कि तुझ में कुटिलता न पाई गई तू अपने आचरण में निर्दोष रहा।
16तू व्यापार की बहुतायत के कारण भीतर ही भीतर उपद्रव से भरकर पाप करने लगा, इसलिए मैंने तुझे अपवित्र जानकर परमेश्वर के पर्वत पर से गिरा दिया, और हे सुरक्षा प्रदान करने वाले करूब, मैंने तुझे अग्निमय पत्थरों के मध्य से नाश किया।
17अपनी सुन्दरता के कारण तेरा मन फूल उठा, वैभव के कारण तेरी बुद्धि भ्रष्ट हो गई। मैंने तुझे भूमि पर फेंक दिया, मैंने तुझे राजाओं के सामने रखा कि वे तुझे देखे।
18अपने अधर्मों की अधिकता से और अपने व्यापार की कुटिलता से, तूने अपने पवित्रस्थानों को अपवित्र किया है। इसलिए मैंने तुझमें से ऐसी आग उत्पन्न की जिसने तुझे भस्म कर दिया, और मैंने तुझे सबके देखते भूमि पर भस्म कर दिया है।
19देश-देश के लोगों में से जितने तुझे जानते हैं वे सब तेरे कारण विस्मित हैं, तू भय का कारण हो गया है; और आगे को तू न रहेगा।
20तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा,
21“हे मनुष्य की सन्तान, अपना मुख सीदोन की ओर करके उसके विरुद्ध नबूवत कर
22और कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे सीदोन, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं मैं तेरे मध्य महिमा पाऊंगा। जब मैं उसके मध्य दण्ड दूंगा तब वे जान जाएंगे कि मैं यहोवा हूं, और मैं अपनी पवित्रता उसमें प्रकट करूंगा।
23क्योंकि मैं उस पर महामारी भेजूंगा, उसकी गलियों में रक्तपात होगा, चारों ओर से उस पर तलवार चलेगी, और घायल उसके मध्य गिरेंगे; तब लोग जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।
24और इस्राएल के घराने के लिए, उनके चारों ओर के तिरस्कार करने वालों में से कोई चुभने वाला कांटा या बेधने वाला शूल न रहेगा। तब वे जान लेंगे कि मैं प्रभु यहोवा हू।”
25प्रभु यहोवा यों कहता हैः “जब मैं इस्राएल के घराने को उन लोगों में से इकट्ठा करूंगा जिनके मध्य वे तितर-बितर हुए हैं और जाति-जाति के सामने उनमें अपनी पवित्रता प्रकट करूंगा, तब वे अपने उस देश में निवास करेंगे जिसे मैंने अपने दास याकूब को दिया था।
26वे उसमें निडर बसे रहेंगे। जब मैं उनके चारों ओर के सब तिरस्कार करने वालों को दण्ड दूंगा तब वे घर बनाकर और दाख की बारियां लगाकर सुरक्षित रहेंगे। तब वे जान लेंगे कि मैं ही उनका प्रभु यहोवा हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)