पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 29 / 48
यहेजकेल 29
1दसवें वर्ष के दसवें महीने के बारहवें दिन यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
2“हे मनुष्य की सन्तान, अपना मुख मिस्र के राजा फि़रौन के विरुद्ध करके उसके और सारे मिस्र के विरुद्ध नबूवत कर।
3ऐसा कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे मिस्र के राजा फि़रौन, हे अपनी नदियों के मध्य पड़े हुए विशाल मगरमच्छ, तू जिसने कहा है कि मेरी नील मेरी है, और मैंने ही उसे बनाया है, देख, मैं तेरे विरुद्ध हू।
4मैं तेरे जबड़ों में कांटे फंसाऊंगा, मैं तेरी खाल में तेरी नदियों की सब मछलियां चिपटाऊंगा, तब मैं तुझे और तेरे साथ तेरी खाल में चिपटी हुई तेरी नदियों की सब मछलियों को नदियों में से खींच लाऊंगा।
5तब मैं तुझे और तेरी नदियों की सब मछलियों को निर्जन प्रदेश में फेंक दूंगा; तू खुले मैदान में पड़ा रहेगा; तू न तो इकट्ठा किया जाएगा और न बटोरा जाएगा। मैंने तुझे वन के पशुओं और आकाश के पक्षियों का भोजन होने के लिए दे दिया है।
6तब मिस्र के सब निवासी जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं, क्योंकि वे तो इस्राएल के घराने के लिए मात्र नरकट की टेक थे।
7जब उन्होंने तुझे हाथ से पकड़ा, तो तूने टूटकर उन सबके कन्धों को उखाड़ दिया, और जब उन्होंने तेरा सहारा लिया तब तू टूट गया, और उन सबकी कमर की नसें चढ़ गईं।
8इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः देख, मैं तुझ पर तलवार चलवाऊंगा और तुझमें से मनुष्य और पशु दोनों का सर्वनाश कर दूंगा,
9और मिस्र देश उजाड़ और निर्जन हो जाएगा। तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हू। “तूने कहा है, ‘नील मेरी है, और मैंने उसे बनाया है,’
10इसलिए देख, मैं तेरे और तेरी नदियों के विरुद्ध हूं और मैं मिस्र देश को मिगदोल से लेकर सवेने वरन् इथियोपिया की सीमा तक बिल्कुल उजाड़ और निर्जल कर दूंगा।
11चालीस वर्ष तक न तो उसमें किसी मनुष्य का और न पशु का पैर पड़ेगा और न कोई उसमें वास करेगा।
12अतः मैं मिस्र देश को उजड़े हुए देशों के मध्य उजाड़ देश ठहराऊंगा और उसके नगर चालीस वर्ष तक उजड़े हुए नगरों में उजाड़ रहेंगे। और मैं मिस्रियों को जाति-जाति में तितर-बितर कर दूंगा और उन्हें देश-देश में बिखेर दूंगा।
13“क्याेंकि प्रभु यहोवा यों कहता हैः चालीस वर्ष के पश्चात् मैं मिस्रियों को उन लोगों में से जिनके बीच वे तितर-बितर किए गए थे एकत्र करूंगा।
14और मैं मिस्रियों की दशा सुधारूंगा तथा उन्हें उनकी जन्मभूमि पत्रेस देश में लौटा दूंगा, और वे वहां एक छोटे से देश के रूप में रहेंगे।
15वह राज्यों में सबसे छोटा होगा, वह फिर कभी जातियों में प्रधान न होगा, और मैं उन्हें ऐसा छोटा करूंगा कि वे अन्य जातियों पर शासन न कर सकेंगे।
16और मिस्र फिर कभी इस्राएल के घराने का विश्वासपात्र न रहेगा; परन्तु यह उसके लिए मिस्रियों की ओर फिरने के अधर्म का स्मरण दिलाएगा। तब वे जान लेंगे कि मैं प्रभु यहोवा हू।”
17अब सत्ताइसवें वर्ष के पहले महीने के पहले दिन यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
18“हे मनुष्य की सन्तान, बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी सेना से सूर के विरुद्ध कठोर परिश्रम कराया; सबके सिर गंजे किए गए, और सबके कन्धों की चमड़ी छीली गई, परन्तु उसको तथा उसकी सेना को सूर से उस परिश्रम का कोई फल न मिला।
19इसलिए प्रभु यहोवा यों कहता हैः देख, मैं बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर को मिस्र देश दे दूंगा। वह उसकी धन-सम्पत्ति को उठा ले जाएगा। वह उसका सब कुछ लूटकर अपने अधिकार में कर लेगा, और यही उसकी सेना के लिए पारिश्रमिक होगा।
20मैंने उसके परिश्रम के लिए उसको मिस्र देश इस कारण दिया है कि उन्होंने मेरे लिए परिश्रम किया था।” प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
21“उस दिन मैं इस्राएल के लिए एक सींग उगाऊंगा और उनके मध्य तेरा मुंह खोलूंगा। तब वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)