पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 37 / 48
यहेजकेल 37
1यहोवा का हाथ मुझ पर था और उसने मुझे यहोवा के आत्मा के द्वारा बाहर लाकर घाटी के मध्य खड़ा कर दिया। घाटी हड्डियों से भरी थी।
2उसने मुझे चारों ओर उनके मध्य घुमाया और देखो, घाटी के तल पर बहुत-सी हड्डियां थीं और वे बिल्कुल सूखी थी।
3और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, क्या ये हड्डियां जीवित हो सकती हैं?” तब मैंने उत्तर दिया, “हे प्रभु यहोवा, तू ही जानता है।”
4उसने फिर मुझसे कहा, “इन हड्डियों से नबूवत करके उनसे कह, ‘हे सूखी हड्डियो, यहोवा का वचन सुनो।
5प्रभु यहोवा इन हड्डियों से यों कहता हैः देखो, मैं साँस को तुममें डालूंगा जिससे तुम जीवित हो जाअो।
6और मैं तुम पर नसें चढ़ाकर मांस भरूंगा और तुम्हें त्वचा से ढांप दूंगा, और तुममें सांस डालूंगा कि तुम जी उठो, और तब तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हूं’।”
7अतः जैसे मुझे आज्ञा दी गई मैंने नबूवत की। जैसे ही मैंने नबूवत की तो देखो, एक आवाज और खड़खड़ाहट हुई, और हड्डियां इकट्ठी होकर एक दूसरे से जुड़ गईं।
8तब मैंने दृष्टि की और देखो, उन पर नसें चढ़ गईं और मांस भर गया और त्वचा ने उन्हें ढांप लिया; परन्तु उनमें कुछ भी श्वास नहीं था।
9तब उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, श्वास से नबूवत कर, हां, नबूवत करके श्वास से कह, प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे श्वास, चारों दिशाओं से आकर इन घात किए हुओं में श्वास फूंकों कि वे जीवित हो जाए।”
10अतः उसकी इस आज्ञा के अनुसार मैंने नबूवत की और उनमें श्वास आ गया और वे जीवित होकर अपने पैरों पर खड़े हो गए, और एक अत्यन्त विशाल सेना बन गई।
11तब उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, ये हड्डियां इस्राएल का सम्पूर्ण घराना है। वे कहते हैं हमारी हड्डियां सूख गई हैं, हमारी आशा नष्ट हो गई। हम पूर्णतः मिटा दिए गए है।
12इसलिए नबवूत करके उनसे कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे मेरी प्रजा के लोगो देखो, मैं तुम्हारी कब्रें खोलकर तुम्हें कब्रों में से निकालूंगा और तुम्हें इस्राएल देश में पहुंचा दूंगा।
13जब मैं तुम्हारी कब्रें खोलकर तुम्हें निकालूंगा, तब हे मेरी प्रजा के लोगो, तुम जान लोगे कि मैं यहोवा हू।
14और मैं अपना आत्मा तुममें डालूंगा, तुम जीवित हो जाओगे और मैं तुम्हें तुम्हारे निज देश में पहुंचा दूंगा। तब तुम जान लोगे कि मुझ यहोवा ने ऐसा कहा, और पूरा भी किया है, यहोवा की यही वाणी है।”
15यहोवा का यह वचन फिर मेरे पास पहुंचाः
16“और हे मनुष्य की सन्तान, तू अपने लिए एक छड़ी ले और उस पर लिख, ‘यहूदा और उसके साथी इस्राएल की सन्तान के लिए, फिर दूसरी छड़ी ले और उस पर लिख, ‘यूसुफ की अर्थात् एप्रैम और उसके साथी समस्त इस्राएल के घराने के लिए।’
17फिर अपने लिए उन दोनों को ऐसे जोड़ दे कि वे तेरे हाथ में एक ही हो जाए।
18फिर जब तेरी प्रजा के लोग तुझसे पूछें, कि क्या तू नहीं बताएगा कि इन सबसे तेरा क्या अभिप्राय है,
19तो उनसे कहना कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः देखो, मैं यूसुफ की छड़ी को लेकर जो एप्रैम और उसके साथी अर्थात् इस्राएल के गोत्रों के हाथ में है, यहूदा की छड़ी के साथ रखूंगा और उन्हें एक छड़ी कर दूंगा। वे दोनों मेरे हाथ में एक ही ठहरेंगी।
20और जिन छड़ियों पर तू लिखेगा वे उनकी आंखों के सामने तेरे हाथ में रहे।
21और उनसे कहना, ‘प्रभु यहोवा यों कहता हैः देखो, मैं इस्राएलियों को उन जातियों में से जहां जहां वे गए हैं निकाल लाऊंगा और उन्हें चारों ओर से इकट्ठा करके उनके निज देश में ले आऊंगा।
22और मैं उन्हें उस देश में जो इस्राएल के पर्वतों पर है एक ही जाति कर दूंगा और उन सबका एक ही राजा होगा, और वे भविष्य में दो जाति नहीं रहेंगी और न भविष्य में दो राज्यों में विभाजित होंगी।
23और वे अपने आपको अपनी मूर्तियों, अथवा अपनी घृणित वस्तुओं, अथवा अपने अपराधों से अशुद्ध न करेंगे, परन्तु मैं उनको उन निवासस्थानों से छुड़ाऊंगा जिनमें उन्होंने पाप किया और उन्हें शुद्ध करूंगा। तब वे मेरी प्रजा होंगे और मैं उनका परमेश्वर होऊंगा।’
24“तब मेरा दास दाऊद उनका राजा होगा, और उन सबका एक ही चरवाहा होगा। वे मेरे नियमों को मानेंगे और मेरी विधियाें का पालन करके उन पर चलेंगे।
25वे उस देश में रहेंगे जो मैंने अपने दास याकूब को दिया था जिसमें तुम्हारे पूर्वज भी रहे। वे और उनके वशंज और उनके वंशजों के वंशज भी सदैव उसमें रहेंगे, और मेरा दास दाऊद सदैव के लिए उनका प्रधान होगा।
26मैं उनके साथ शान्ति की वाचा बांधूंगा जो उनके साथ सदाकाल की वाचा ठहरेगी। मैं उन्हें बसाऊंगा और बढ़ाऊंगा और उनके मध्य सदैव के लिए अपना पवित्रस्थान स्थापित करूंगा।
27मेरा निवासस्थान भी उनके साथ रहेगा। मैं उनका परमेश्वर होऊंगा, और वे मेरी प्रजा होंगे।
28जब मेरा पवित्रस्थान सदैव के लिए उनके मध्य होगा तब सब जातियां जान जाएंगी कि इस्राएल को पवित्र करने वाला मैं यहोवा हू।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)