पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 38 / 48
यहेजकेल 38
1तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचाः
2“हे मनुष्य की सन्तान, मागोग देश के गोग की ओर अपना मुख करके रोश, मेशेक और तूबल के प्रधान के विरुद्ध नबूवत कर
3और कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः हे गोग, रोश, मेशेक और तूबल के प्रधान, देख, मैं तेरे विरुद्ध हूं;
4मैं तुझे घुमा दूंगा और तेरे जबड़ों में आंकड़े डालकर तुझे और तेरे साथ सारी सेना, अर्थात् सुसज्जित सब घोड़ों और घुड़सवारों, हां, फरी, ढालें तथा तलवार धारण की हुई तेरी विशाल सेना को बाहर ले आऊंगा।
5उनके साथ फ़ारस, इथियोपिया और पूत होंगे जो सबके सब ढाल और टोप धारण किए हुए होंगे।
6गोमेर भी अपनी सारी सेना सहित और सुदूर उत्तर का बेत-तोगर्मा अपनी सम्पूर्ण सेना सहित आएंगे-तेरे साथ अनेक जातियों के लोग होंगे।
7“तू अपने चारों ओर इकट्ठी सारी सेना के साथ तैयार हो जा और अपने को तैयार रख और उनका रक्षक बन।
8बहुत दिनों के पश्चात् तू बुलाया जाएगा और अन्तिम वर्षों में तू उस देश में पहुंचेगा जो तलवार के मुंह से छुड़ा लिया गया हो और जिसके निवासी अनेक जातियों से इस्राएल के उन पर्वतों पर एकत्र किए गए होंगे जो लगातार उजाड़ पड़े थे। परन्तु तुझे वहां ऐसे लोग मिलेंगे जो भिन्न भिन्न जातियों में से लाए जाकर सबके सब निडर होकर रहते हो।
9तू चढ़ाई करेगा, तू आंधी के समान आएगा, तू अपने सारे दलों और अनेक जाति के लोगों सहित बादल के समान देश पर छा जाएगा।
10“प्रभु यहोवा यों कहता हैः उस दिन ऐसा होगा कि तेरे हृदय में अनेक विचार उठेंगे ओर तू एक कुटिल योजना बनाएगा।
11और तू कहेगा, ‘मैं शहरपनाह-रहित गांवों के देश पर आक्रमण करूंगा। मैं उन पर आक्रमण करूंगा जो शान्त और निश्चिन्त रहते हैं और सबके सब बिना शहरपनाह और बिना बेंड़ों तथा फाटकों के बसे हुए हैं,
12जिससे लूटूं और माल को ले लूं तथा अपना हाथ उन खंडहरों पर बढ़ाऊं जो अब बस गए हैं, और उन लोगों के विरुद्ध जाऊं जो जाति-जाति में से इकट्ठे हुए हैं, जिन्होंने पशु और धन-सम्पत्ति प्राप्त की हैं और जो पृथ्वी के केन्द्र में बसे हुए है।’
13शबा, ददान और तर्शीश तथा उसके सब गांवों के व्यापारी तुझसे कहेंगे, ‘क्या तू लूट-मार करने आया है? क्या तूने अपने दल को इसलिए इकट्ठा किया है कि लूटकर चांदी-सोना छीन ले, पशु और धन-सम्पत्ति उठा ले जाए, और बड़ी लूट की सामग्री पर कब्जा करे?’
14“इसलिए हे मनुष्य की सन्तान, नबूवत करके गोग से कह कि प्रभु यहोवा यों कहता हैः जिस दिन मेरी प्रजा इस्राएल निडर रहेगी, क्या तुझे मालूम नहीं होगा?
15तू अनेक देश के लोगों के साथ जो सबके सब घोड़ों पर सवार होंगे, एक बड़ी भीड़ और शक्तिशाली सेना बनकर सुदूर उत्तर से आएगा।
16और जैसे बादल भूमि पर छा जाता है वैसे ही तू मेरी प्रजा इस्राएल के विरुद्ध चढ़ आएगा। हे गोग, अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि मैं तुझे अपने देश के विरुद्ध चढ़ा लाऊंगा, कि जब मैं तेरे द्वारा, जातियों की आंखों के सामने पवित्र ठहराया जाऊं, तो वे मुझे जान ले।
17“प्रभु यहोवा यों कहता हैः क्या तू वही नहीं जिसके विषय में मैंने प्राचीनकाल में अपने दासों अर्थात् इस्राएल के नबियों के द्वारा कहा था, जिन्होंने उन दिनों में कई वर्षों तक नबूवत करके कहा कि गोग को परमेश्वर इस्राएल के विरुद्ध लाएगा?
18‘जब गोग उस दिन इस्राएल देश के विरुद्ध आक्रमण करेगा तो ऐसा होगा कि मेरी जलन मेरे क्रोध में भड़क उठेगी, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।
19मैं अपनी जलन और अपनी क्रोधाग्नि में कहता हूं कि उस दिन इस्राएल देश में निश्चय एक भारी भूकम्प होगा।
20समुद्र की मछलियां, आकाश के पक्षी, मैदान के पशु, पृथ्वी पर रेंगने वाले समस्त जीव-जन्तु, तथा इस पृथ्वी पर रहने वाले सब मनुष्य मेरी उपस्थिति से कांप उठेंगे। पर्वत भी गिरा दिए जाएंगे, चट्टानें ढा दी जाएंगी, और प्रत्येक शहरपनाह भूमि पर गिर जाएगी।
21प्रभु यहोवा की यह वाणी हैः अपने सारे पर्वतों पर मैं उसके विरुद्ध तलवार चलाने की आज्ञा दूंगा। भाई-भाई के बीच तलवार चलेगी।
22मरी और रक्तपात से मैं उसे दण्ड दूंगा। मैं उस पर, उसकी सेना पर, और उसके साथ की अनेक जातियों पर प्रचंड वर्षा लाऊंगा। मैं ओले, आग और गन्धक बरसाऊंगा।
23मैं अपने आपको महान् और पवित्र ठहराऊंगा और बहुत-सी जातियों की दृष्टि में अपने आपको प्रकट करूंगा, और वे जान लेंगे कि मैं यहोवा हू।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)