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पुराना नियम · यहेजकेल · अध्याय 43 / 48

यहेजकेल 43

1तब वह मुझे उस फाटक के पास ले गया जिसका मुख पूर्व की ओर था।

2और देखो, इस्राएल के परमेश्वर का तेज पूर्व की ओर से प्रकट हुआ और उसकी आवाज बहुत जल की सी थी, और पृथ्वी उसके तेज से चमक उठी।

3और यह उस दर्शन के समान था जो मैंने उस समय देखा था जब वह नगर का विनाश करने आया था। और ये दर्शन उस दर्शन के समान थे जो मैंने कबार नदी के किनारे देखा था; और मैं मुंह के बल गिर पड़ा।

4और यहोवा का तेज भवन में उस फाटक से आया जिसका मुख पूर्व की ओर था।

5और आत्मा मुझे ऊपर उठाकर भीतरी आंगन में ले आया और देखो, भवन यहोवा के तेज से भर गया।

6जबकि वह मनुष्य मेरे पास खड़ा था, मैंने किसी को भवन में से मुझसे बातें करते सुना।

7और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, यह मेरा सिंहासन और मेरे पांव रखने का स्थान है जहां मैं इस्राएलियों के मध्य सदैव निवास करूंगा। और न इस्राएल का घराना अर्थात् न उसके लोग और न उनके राजा फिर कभी मेरे पवित्र नाम को अशुद्ध करेंगे, अपने व्यभिचार से, अपने मृतक राजाओं के शवों से,

8तथा मेरी देहली के समीप अपनी देहली और मेरे चौखट के पास ही अपने चौखट बनाने से, जिससे मेरे और उनके मध्य केवल दीवार का ही अन्तर रह जाता था। उन्होंने मेरे पवित्र नाम को अपने किए हुए घृणित कार्यों से अपवित्र किया। अतः मैंने अपने क्रोध में उन्हें भस्म कर दिया।

9अब वे अपने व्यभिचार और अपने राजाओं के शवों को मुझसे बहुत दूर कर दें तब मैं उनके मध्य सदैव निवास करूंगा।

10हे मनुष्य की सन्तान, तू इस्राएल के घराने को इस भवन का नमूना समझा जिस से वे अपने अधर्म के कारण लज्जित हो। वे इस नमूने पर विचार-विमर्श करे।

11और जो कुछ उन्होंने किया है यदि वे उसके कारण लज्जित हों तो इस भवन की रूपरेखा को उन्हें बतला दे। इसकी बनावट, इसके बाहर जाने के मार्ग, इसके प्रवेश द्वार, इसके आकार, इसकी विधियां और इसके सब नियम उनको बता और उनके सामने लिख जिससे वे इसके सम्पूर्ण आकार और इसकी विधियों को मानें और उनके अनुसार चले।

12इस भवन का नियम यह हैः इस पर्वत के शिखर के चारों ओर का सम्पूर्ण क्षेत्र परमपवित्र है। इस भवन का यही नियम है।

13और वेदी का नाप हाथ के नाप के अनुसार यह हैः हाथ का नाप साधारण हाथ से चार अंगुल बड़ा है। आधार एक हाथ होगा, और चौड़ाई एक हाथ, उसके चारों ओर का किनारा एक-एक बित्ता, और वेदी के आधार की यह ऊंचाई होगी;

14और भूमि पर के आधार से लेकर निचले कगार तक ऊंचाई दो हाथ और चौड़ाई एक हाथ हो; और छोटी कगार से लेकर बड़ीे कगार तक चार हाथ हों और उसकी चौड़ाई हाथ भर की हो।

15और वेदी की भट्टी चार हाथ की होगी और वेदी की भट्टी से ऊपर की ओर चार सींग निकले हो।

16वेदी की भट्टी बारह हाथ लम्बी और बारह हाथ चौड़ी हो अर्थात् वर्गाकार हो।

17और कगार चारों ओर से चौदह हाथ लम्बी और चौदह हाथ चौड़ी हो। उसके चारों ओर का किनारा आधा हाथ और उसका आधार चारों ओर एक हाथ हो तथा उसकी सीढ़ियां पूर्व की ओर हो।”

18और उसने मुझसे कहा, “हे मनुष्य की सन्तान, प्रभु यहोवा यों कहता है कि जिस दिन वेदी बन जाए तो उस पर होमबलि चढ़ाने और लहू छिड़कने की ये विधियां हों:

19प्रभु यहोवा यों कहता है कि लेवीय याजकों में से सादोक-वंशियों को जो सेवा करने मेरे समीप आएं, पापबलि के लिए एक बछड़ा दिया जाए।

20और तुम उसका कुछ लहू लेकर उसे चारों सींगों पर तथा कगारों के चारों कोनों पर और चारों ओर की किनारों पर लगाना, इस प्रकार उसे शुद्ध करना और उसके लिए प्रायश्चित करना।

21फिर तुम पापबलि के बछड़े को भी लेकर उसे पवित्र स्थान के बाहर निर्धारित स्थान में जला देना।

22दूसरे दिन एक दोष-रहित बकरा, पापबलि करके चढ़ाना। जिस प्रकार बछड़े के द्वारा वेदी शुद्ध की गई उसी प्रकार बकरे के द्वारा भी की जाए।

23जब तुम वेदी को शुद्ध कर चुको तब रेवड़ में से एक दोष-रहित बछड़ा और एक मेढ़ा लेना,

24तब तुम उन्हें यहोवा के सम्मुख लाना, और याजक उन पर नमक डालकर उन्हें यहोवा के सामने होमबलि करके चढ़ाए।

25सात दिन तक तू प्रतिदिन एक बकरा पापबलि के लिए तैयार करना और एक बछड़ा तथा रेवड़ में से एक मेढ़ा भी तैयार करना। ये दोष-रहित हो।

26सात दिन तक वेदी के लिए प्रायश्चित करके उसे शुद्ध किया जाए, इस प्रकार उसका अर्पण किया जाए।

27जब ये दिन पूरे हो जाएं, तब आठवें दिन से आगे को याजक वेदी पर तुम्हारे होमबलि और मेलबलि चढ़ाएं, और मैं तुम्हें ग्रहण करूंगा, प्रभु यहोवा की यही वाणी है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)