पुराना नियम · एज्रा · अध्याय 3 / 10
एज्रा 3
1जब सातवां महीना आया और इस्राएली अपने-अपने नगर में रह रहे थे, तो सब लोग एक मन होकर यरूशलेम में एकत्रित हुए।
2तब योसादाक के पुत्र येशू तथा उसके भाई जो याजक थे और शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल तथा उसके भाई मिलकर उठ खड़े हुए और उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर की वेदी बनाई कि उस पर परमेश्वर के जन मूसा की व्यवस्था में लिखी गई विधि के अनुसार होमबलि चढ़ाए।
3अतः उन्होंने वेदी को उसी स्थान पर बनाया जहां वह पहले थी, क्योंकि वे उन देशों के लोगों के कारण भयभीत थे; और वे उस पर यहोवा के लिए होमबलि अर्थात् प्रतिदिन प्रातः और सायं काल के होमबलि चढ़ाने लगे।
4जैसा कि लिखा है कि उन्होंने मंडपों का पर्व मनाया तथा जैसा विधि के अनुसार प्रतिदिन के लिए नियत था, निर्धारित संख्या में प्रतिदिन होमबलि चढ़ाई।
5इसके पश्चात् वे निरन्तर होमबलि और नए चांद तथा यहोवा के पवित्र किए गए सभी नियत पर्वों की बलि, और प्रत्येक जन की ओर से यहोवा के लिए दी जाने वाली स्वेच्छाबलि चढ़ाने लगे।
6सातवें महीने के प्रथम दिन से वे यहोवा के लिए होमबलि चढ़ाने लगे, परन्तु अभी तक यहोवा के मन्दिर की नींव नहीं डाली गई थी।
7तब उन्होंने राजगीरों और बढ़इयों को पैसा तथा सीदोन और सोर के निवासियों को खाने-पीने की सामग्री और तेल दिया कि वे फ़ारस के राजा कुस्रू की अनुमति के अनुसार लेबनोन से याफ़ा के समुद्र-तट तक देवदार की लकड़ी ले आए।
8यरूशलेम में स्थित परमेश्वर के भवन में उनके लौट आने के दूसरे वर्ष के दूसरे महीने में शालतीएल के पुत्र जरुब्बाबेल, योसादाक के पुत्र येशू, और उनके शेष भाई अर्थात् याजक, तथा लेवियों ने, तथा उन सबने जो बन्धुवाई से यरूशलेम लौटे थे, कार्य को आरम्भ किया और उन्होंने बीस तथा उससे अधिक आयु वाले लेवियों को यहोवा के भवन के कार्य के निरीक्षण के लिए नियुक्त किया।
9तब येशू अपने पुत्रों और भाइयों सहित कदमीएल तथा उसके पुत्रों के साथ जो यहूदा के वंशज थे, और हेनादाद के पुत्रों तथा उनके लेवीय पुत्रों और भाइयों के साथ मिलकर उठ खड़ा हुआ कि यहोवा के भवन में कारीगरों का निरीक्षण करे।
10जब राजगीर यहोवा के मन्दिर की नींव डाल चुके तो याजक अपनी अपनी वेशभूषा में तुरहियां लिए हुए, और आसाप-वंशीय लेवीय झांझ लिए हुए उठ खड़े हुए कि वे इस्राएल के राजा दाऊद की चलाई रीति के अनुसार यहोवा की स्तुति करे।
11उन्होंने यहोवा की स्तुति करते हुए और उसको धन्यवाद देते हुए इस प्रकार गाया, “वह भला है और उसकी करुणा इस्राएल के ऊपर सदैव के लिए है।” तब सब लोग यहोवा की स्तुति करते हुए उच्च स्वर से जय-जयकार करने लगे, क्योंकि यहोवा के भवन की नींव डाली जा चुकी थी।
12यघपि इस मन्दिर की नींव पड़ते समय अनेक लोगों ने हर्ष से जय-जयकार किया, फिर भी बहुत से याजक और लेवीय और पूर्वजों के घरानों के वे मुखिए अर्थात् वे वृद्ध जिन्होंने प्रथम भवन को देखा था, फूट-फूटकर रो पड़े।
13इसलिए लोगों को उनके जय-जयकार के स्वरों तथा रोने के स्वरों में अन्तर न जान पड़ा। क्योंकि लोग अत्यन्त उच्च स्वर से चिल्ला रहे थे और वह स्वर दूर-दूर तक सुनाई दे रहा था।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)