पुराना नियम · एज्रा · अध्याय 4 / 10
एज्रा 4
1जब यहूदा और बिन्यामीन के शत्रुओं ने यह सुना कि निर्वासन से लौटकर आए हुए लोग इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिए एक मन्दिर बना रहे हैं
2तब उन्होंने जरुब्बाबेल और पूर्वजों के घराने के मुखियों के पास जाकर उनसे कहा, “हमें भी अपने साथ भवन बनाने दो, क्योंकि तुम्हारे ही समान हम भी तुम्हारे परमेश्वर के खोजी हैं; और अश्शूर के राजा एसर-हद्दोन के समय से ही, जो हमें यहां ले आया, उसी के लिए बलिदान चढ़ाते चले आ रहे है।”
3जरुब्बाबेल, येशू तथा इस्राएल के पूर्वजों के घरानों के शेष सभी मुखियों ने उनसे कहा, “हमारे परमेश्वर के लिए किए जा रहे इस भवन-निर्माण में हमारे साथ तुम्हारा कोई साझा नहीं, वरन् हम स्वयं मिलकर इस्राएल के परमेश्वर यहोवा के लिए उसे बनाएंगे, जैसा कि प़फ़ारस के राजा कुस्रू ने हमें आज्ञा दी है।”
4तब उस देश के लोग यहूदा के लोगों को निराश करने और निर्माण-कार्य को रोकने के लिए डराने-धमकाने लगे।
5और प़फ़ारस के राजा कुस्रू के जीवन भर वरन् प़फ़ारस के राजा दारा के शासनकाल तक उनकी सम्मति को विफल करने के लिए भाड़े के सलाहकार उनके विरुद्ध लगाए।
6क्षयर्ष के शासनकाल के आरम्भ में उन्होंने यहूदा और यरूशलेम के निवासियों के विरुद्ध एक अभियोग-पत्र लिखा।
7अर्तक्षत्र के दिनों में बिशलाम, मिथ्रदात, ताबेल तथा शेष उनके सभी सहयोगियों ने प़फ़ारस के राजा अर्तक्षत्र को पत्र लिखा। पत्र अरामी भाषा में लिखा गया था।
8तब सेनापति रहूम तथा शास्त्री शिमशै ने मिलकर यरूशलेम के विरुद्ध राजा अर्तक्षत्र को इस आशय का एक पत्र लिखा।
9अर्थात् सेनापति रहूम और शास्त्री शिमशै तथा उनके अन्य सभी सहयोगी, न्यायाधीश, उप-राज्यपाल, अधिकारी, सचिव, तथा एरेक, बेबीलोन और शूशन अर्थात् एलाम देश के रहनेवाले-
10आदि उन सभी जातियों ने जिन्हें महान् एवं माननीय ओस्नप्पर ने निर्वासित करके सामरिया नगर तथा फ़रात नदी के पार के शेष भू-भाग में बसाया था, एक पत्र लिखा।
11जो पत्र उन्होंने उसके पास भेजा उसकी प्रति यह हैः “महाराज, अर्तक्षत्र के नाम नदी पार के प्रान्त में रहने वाले लोगों अर्थात् तेरे सेवकों की ओर से;
12महाराज को ज्ञात हो कि जो यहूदी तेरे यहां चले गए थे, वे हमारे यहां यरूशलेम में आ गए है। वे इस द्रोही और दुष्ट नगर का पुनर्निर्माण कर रहे हैं, और वे नींव की मरम्मत करके शहरपनाह बना रहे है।
13अब राजा को यह ज्ञात हो कि यदि नगर पुनः बस गया और उसकी शहरपनाह बनकर पूरी हो गई, तो वे लोग सीमाशुल्क, कर और चुंगी नहीं देंगे, और इससे राजाओं के राजस्व की हानि होगी।
14और इसलिए कि हम राजभवन का नमक खाते हैं, यह हमारे लिए उचित नहीं कि हम राजा का अपमान होते देखें; अतः हमने पत्र भेजकर राजा को सूचित किया है,
15जिससे तेरे पूर्वजों के अभिलेखों में एक बार खोज-बीन की जाए। और तू उन अभिलेखों में पाएगा और जान सकेगा कि वह एक द्रोही नगर है जो राजाओं और प्रान्तों को हानि पहुंचाता रहा है, और उसमें उन्होंने इससे पहले भी विद्रोह किया है; इसीलिए वह नगर उजाड़ दिया गया था।
16हम राजा को सूचना देते हैं कि यदि वह नगर पुनः बस गया और उसकी शहरपनाह बनकर तैयार हो गई, तो परिणाम यह होगा कि नदी के इस पार तेरा कुछ न रहेगा।
17तब राजा ने सेनापति रहूम, शास्त्री शिमशै तथा सामरिया और नदी पार के शेष प्रान्तों में रहने वाले उनके सहकर्मियों को यह उत्तर भेजाः “कुशल हो! और अब यह
18कि जो पत्र तुम लोगों ने हमारे पास भेजा, उसका अनुवाद मेरे सामने पढ़ा गया है।
19मेरी आज्ञा से खोज की गई और यह पाया गया कि यह नगर पहले भी राजाओं के विरुद्ध सिर उठा चुका है और उसमें विद्रोह तथा उपद्रव होते रहे है।
20और यरूशलेम में सामर्थी राजा भी हुए जो नदी पार के प्रान्तों पर राज्य करते थे और कर; सीमाशुल्क तथा चुंगी उनको दी जाती थी।
21अतः अब एक आदेश निकाल कि ये लोग कार्य बन्द कर दें, तथा यह नगर तब तक न बनाया जाए जब तक कि मेरी ओर से आदेश न दिया जाए।
22सावधान! इसे कार्यान्वित करने में ढील न देना। राजाओं की हानि करने वाली यह बुराई क्यों बढ़ने पाए?”
23तब जैसे ही राजा अर्तक्षेत्र के इस पत्र की प्रति रहूम और शास्त्री शिमशै और उनके सहयोगियों के सामने पढ़ी गई, उन्होंने शीघ्र यहूदियों के पास यरूशलेम जाकर शस्त्र-बल प्रयोग द्वारा उन्हें रोक दिया।
24तब यरूशलेम में परमेश्वर के भवन का कार्य रुक गया, और यह फ़ारस के राजा दारा के शासन के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)