पुराना नियम · एज्रा · अध्याय 6 / 10
एज्रा 6
1तब राजा दारा की आज्ञा से बेबीलोन के उस अभिलेखागार में जहां ख़जाना रखा जाता था, खोज की गई।
2और मादे प्रान्त के अहमता के गढ़ में एक पुस्तक मिली जिसमें इस प्रकार से लिखा थाः “विज्ञप्ति-
3राजा कुस्रू के प्रथम वर्ष में, राजा कुस्रू ने यह आज्ञा निकालीः ‘परमेश्वर के भवन के विषय जो यरूशलेम में है, मन्दिर अर्थात् वह स्थान जहां बलिदान चढ़ाए जाते हैं फिर से बनाया जाए, और यह पुरानी नींव पर बनाया जाए, इसकी ऊंचाई साठ हाथ और इसकी चौड़ाई साठ हाथ की हो;
4इसमें तीन रद्दे भारी पत्थरों के और एक रद्दा नई लकड़ी का हो; और व्यय राजकोष से दिया जाए।
5और परमेश्वर के भवन के सोने-चांदी के पात्र भी जिन्हें नबूकदनेस्सर यरूशलेम के मन्दिर से निकालकर बेबीलोन ले आया, वे लौटाकर यरूशलेम के मन्दिर में अपने अपने स्थान पर पहुंचाए जाएं, और उनको परमेश्वर के भवन में रख दिया जाए।”
6“इसलिए, अब नदी पार के प्रान्त के हे राज्यपाल तत्तनै, शतर-बोजनै तुम अपने सहयोगियों, अर्थात् नदी पार के अधिकारियों सहित वहां से दूर रहो।
7परमेश्वर के भवन के इस कार्य को चलने दो; यहूदियों के प्रधान और यहूदियों के प्राचीनों को परमेश्वर के भवन को उसके स्थान पर फिर से बनाने दो।
8इसके अतिरिक्त, मैं आज्ञा देता हूं कि परमेश्वर के इस भवन के पुनर्निर्माण में यहूदा के इन प्राचीनों के लिए तुम्हें क्या करना होगाः इन लोगों को पूरा व्यय राजकोष से, अर्थात् नदी पार के करों में से दिया जाए, और वह भी अविलम्ब।
9और स्वर्ग के परमेश्वर के लिए चढ़ाई जाने वाली होमबलि के लिए जिस-जिस वस्तु की उनको आवश्यकता हो, अर्थात् बछड़े, मेढ़े और मेमने, तथा गेहूं, नमक, दाखमधु और अभिषेक के लिए तेल अर्थात् जो कुछ यरूशलेम के याजक मांगें वह सब उन्हें बिना चूके प्रतिदिन दिया जाए,
10कि वे स्वर्ग के परमेश्वर के लिए ग्रहणयोग्य बलिदान चढ़ा सकें और राजा तथा उसकी सन्तान की दीर्घायु के लिए प्रार्थना किया करे।
11और मैंने यह आज्ञा दी है कि जो कोई इस आदेश का उल्लंघन करे, उसके घर में से एक कड़ी निकाली जाए और उस पर उसे छेद दिया जाए और इस कारण उसका घर घूरा बना दिया जाए।
12यदि कोई राजा अथवा प्रजा यरूशलेम स्थित परमेश्वर के इस भवन को नष्ट करने के लिए इस आदेश को बदलने का प्रयास करे, तो परमेश्वर, जिसने उस स्थान को अपने नाम का निवास ठहराया है, उसे नष्ट करे। मुझ दारा ने यह आदेश निकाला है, दृढ़ता से इसका पालन किया जाए!”
13तब नदी पार के राज्यपाल तत्तनै और शतर-बोजनै और उनके सहकर्मियों ने राजा दारा के भेजे गए आदेश को दृढ़ता से लागू किया।
14और यहूदियों और हाग्गै नबी तथा इद्दो के पुत्र जकर्याह की नबूवत के कारण यहूदियों के प्राचीन, मन्दिर को बनाने में सफल रहे। और उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर की आज्ञा और प़फ़ारस के राजा कुस्रु, दारा तथा अर्तक्षत्र की राजाज्ञाओं के अनुसार उसे बनाकर पूरा किया।
15और यह मन्दिर राजा दारा के शासनकाल के छठवें वर्ष में, अदार महीने के तीसरे दिन बनकर पूरा हुआ।
16इस्राएलियों, याजकों, लेवियों और बन्धुवाई से आए शेष लोगों ने आनन्दपूर्वक उत्सव मनाकर परमेश्वर के इस भवन की प्रतिष्ठा की।
17और परमेश्वर के इस भवन की प्रतिष्ठा में उन्होंने एक सौ बछड़े, दो सौ मेढ़े, चार सौ मेमने तथा इस्राएल के गोत्रों की संख्या के अनुसार समस्त इस्राएल के लिए पाप-बलि के रूप में बारह बकरे चढ़ाए।
18तब मूसा की पुस्तक में लिखे अनुसार, यरूशलेम में परमेश्वर की अराधना के लिए उन्होंने याजकों के दल और लेवियों के क्रम ठहराए।
19और प्रथम माह के चौदहवें दिन, निर्वासन से आए हुए लोगों ने फसह मनाया।
20सभी याजकों और लेवियों ने अपने आपको शुद्ध किया था; वे सब-के-सब शुद्ध थे। तब उन्होंने उन सब लोगों के लिए जो निर्वासन से लौटे थे, अपने भाई याजकों के लिए तथा अपने लिए फसह के मेमने बलि किए।
21जिन लोगों ने उस देश की जातियों की अशुद्धता से अपने आपको अलग कर लिया था कि वे इस्राएल के यहोवा परमेश्वर की खोज करें, उन सभों ने निर्वासन से लौटे इस्रालियों के साथ मिलकर फसह खाया।
22और वे सात दिन तक अख़मीरी रोटी का पर्व बड़े आनन्द के साथ मनाते रहे, क्योंकि यहोवा ने उनको आनन्दित किया था, और अश्शूर के राजा का मन उनकी ओर ऐसा फेर दिया था कि परमेश्वर अर्थात् इस्राएल के परमेश्वर के भवन के कार्य में वह उनकी सहायता करे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)