पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 46 / 50
उत्पत्ति 46
1इस प्रकार इस्राएल अपना सब कुछ लेकर चल पड़ा, और बेर्शेबा में आकर उसने अपने पिता इसहाक के परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाए।
2तब परमेश्वर ने इस्राएल से रात्रि में दर्शनों के द्वारा बातें की और कहा, “याकूब, हे याकूब।” और उसने कहा, “मैं यहां हू।”
3उसने कहा, “मैं परमेश्वर हूं, तेरे पिता का परमेश्वर, मिस्र में जाने से भयभीत न हो, क्योंकि वहां मैं तुझे एक महान् जाति बनाऊंगा।
4मैं तेरे साथ-साथ मिस्र को जाऊंगा; और मैं फिर तुझे निश्चय ही लौटा ले आऊंगा; और यूसुफ अपने हाथों से तेरी आंखें बन्द करेगा।”
5तब याकूब बेर्शेबा से चला; और इस्राएल के पुत्र अपने पिता याकूब और अपने बच्चों और अपनी पत्नियों को उन गाड़ियों पर चढ़ाकर चल पड़े, जो फि़रौन ने उनके लाने के लिए भेजी थी।
6और वे अपने पशुधन और कनान में इकट्ठा की गई अपनी सारी धन-सम्पत्ति को लेकर मिस्र में आए। याकूब और उसके सब वंशज साथ थेः
7उसके साथ उसके पुत्र और उसके पोते, पुत्रियां और पोतियां थी। वह अपनी समस्त सन्तानों को अपने साथ मिस्र में ले आया।
8इस्राएल के पुत्रों के नाम ये हैं अर्थात् याकूब और उसके पुत्र जो मिस्र को गएः याकूब का पहलौठा रूबेन।
9रूबेन के पुत्र हनोक, पल्लू, हेस्रोन और कर्मी
10शमौन के पुत्रः यमूएल, यामीन, ओहद, याकीन, सोहर और शाऊल जो कनानी स्त्री से जन्मा था।
11लेबी के पुत्रः गेर्शोन, कहात और मरारी।
12यहूदा के पुत्रः एर, ओनान, शेलाह, पेरेस और जेरह (परन्तु एर और ओनान कनान देश में ही मर गए थे) और पेरेस के पुत्र हेस्रोन और हामूल थे।
13इस्साकार के पुत्रः तोला, पुब्बा, योब और शिम्रोन।
14जबूलून के पुत्रः सेरेद, एलोन और यहलेल।
15लिआ के पुत्र ये ही हैं, जो उससे याकूब के लिए पद्दन-अराम में उत्पन्न हुए थे, इसके अतिरिक्त उसने उसकी पुत्री दीना को भी जन्म दिया था। इस प्रकार उसके पुत्र-पुत्रियों की कुल संख्या तैंतीस हुई।
16गाद के पुत्रः सिय्योन, हाग्गी, शूनी, एसबोन, एरी, अरोदी और अरेली थे।
17आशेर के पुत्रः यिम्ना, यिश्वा, यिस्वी, बरीआ और उनकी बहन सेरह थी। बरीआ के पुत्रः हेबेर और मल्कीएल थे।
18ये उसी जिल्पा के पुत्र हैं जिसे लाबान ने अपनी पुत्री लिआ को दिया था, और उससे याकूब के सोलह प्राणी उत्पन्न हुए।
19याकूब की पत्नी राहेल के पुत्रः यूसुफ और बिन्यामीन।
20मिस्र देश में ओन के याजक पोतीपेरा की पुत्री आसनत से यूसुफ के मनश्शे और एप्रैम उत्पन्न हुए।
21बिन्यामीन के पुत्रः बेला, बेकेर, अश्बेल, गेरा, नामान, एही, रोश, मुप्पीम, हुप्पीम और आर्द।
22याकूब के पुत्र जो राहेल से उत्पन्न हुए ये कुल चौदह प्राणी थे।
23और दान का पुत्रः हुशीम।
24नप्ताली के पुत्रः यहसेल, गूनी, सेसेर और शिल्लेम।
25बिल्हा के पुत्र ये ही हैं, जिसे लाबान ने अपनी पुत्री राहेल को दिया और ये उससे याकूब के लिए उत्पन्न हुए, ये कुल मिलाकर सात प्राणी थे।
26याकूब के निज वंश के सब प्राणी जो मिस्र में आए, वे उसकी बहुओं को छोड़ कुल मिला कर छियासठ थे।
27और यूसुफ के पुत्र जो मिस्र में उससे उत्पन्न हुए, वे दो प्राणी थे; याकूब के घराने के जितने प्राणी मिस्र में आए वे कुल मिलाकर सत्तर थे।
28फिर उसने यहूदा को अपने आगे यूसुफ के पास भेज दिया कि वह उसे गोशेन का मार्ग दिखाए और वे गोशेन देश में आए।
29तब यूसुफ अपना रथ जुतवाकर अपने पिता इस्राएल से भेंट करने को गोशेन देश को गया, और जैसे ही वह निकट पहुंचा, वह उसके गले से लिपट गया और उसके गले से लिपटे हुए बहुत देर तक रोया।
30तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, “अब चाहे मैं मर जाऊं, क्योंकि अब तो मैंने तेरा मुख देख लिया है, कि तू अभी तक जीवित है।”
31यूसुफ ने अपने भाइयों और अपने पिता के घराने से कहा, “मैं जाकर फि़रौन को बताऊंगा, और उससे कहूंगा, ‘मेरे भाई और मेरे पिता का घराना जो कनान देश में था, मेरे पास आ गए हैं;
32और वे लोग चरवाहे हैं, क्योंकि वे तो पशुओं को पालते आए हैं, और वे अपनी भेड़-बकरियां तथा गाय-बैल और जो कुछ उनका था, सब ले आए है।’
33और जब फि़रौन तुम्हें बुलाकर, पूछे, ‘तुम्हारा उघम क्या है?’
34तो तुम यह कहना, ‘तेरे सेवक लड़कपन से लेकर आज तक पशुओं को पालते आए हैं, हम और हमारे पुरखा भी यही करते आए हैं,’ जिससे कि तुम गोशेन देश में रहने पाओ; क्योंकि सब चरवाहों से मिस्रियों को घृणा है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)