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पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 48 / 50

उत्पत्ति 48

1तब ऐसा हुआ कि इन बातों के पश्चात् किसी ने यूसुफ से कहा, “देख, तेरा पिता बीमार है।” तब वह मनश्शे और एप्रैम नाम के अपने दो पुत्रों को साथ लेकर उसके पास चला।

2जब याकूब को यह बात बताई गई, देख, तेरा पुत्र यूसुफ तेरे पास आया है,” तो इस्राएल अपने आपको सम्भालकर खाट पर बैठ गया।

3तब याकूब ने यूसुफ से कहा, “सर्वशक्तिमान परमेश्वर ने कनान देश के लूज में मुझे दर्शन देकर मुझे आशीष दी।

4और उसने मुझसे कहा, ‘देख, मैं तुझे फुला-फला कर अत्यन्त बढ़ाऊंगा और मैं तुझे जातियों का मूल बनाऊंगा और तेरे पश्चात् तेरे वंशजों को यह देश सदा के लिए उनकी निज भूमि होने के लिए दे दूंगा।’

5और अब तेरे दोनों पुत्र जो मिस्र में मेरे आने से पहले उत्पन्न हुए वे मेरे हैं; अर्थात् जिस प्रकार रूबेन और शमौन मेरे हैं उसी प्रकार एप्रैम और मनश्शे भी मेरे ही ठहरेंगे।

6परन्तु उनके पश्चात् जो सन्तान उत्पन्न हुई वह तेरी होगी; परन्तु उत्तराधिकार में वे अपने भाइयों के ही वंश में गिने जाएंगे।

7जब मैं पद्दन से आ रहा था तब मार्ग में, एप्राता पहुंचने के कुछ दूर पहले राहेल कनान देश में मर गई और मैंने उसे वहीं एप्राता के मार्ग में अर्थात् बैतलहम में मिट्टी दी।”

8जब इस्राएल ने यूसुफ के पुत्रों को देखा तो उसने पूछा, “ये कौन हैं?”

9और यूसुफ ने अपने पिता से कहा, “ये मेरे पुत्र हैं, जो परमेश्वर ने मुझे यहां दिए है।” तब उसने कहा, “उनको मेरे पास ले आ कि मैं उन्हें आशीर्वाद दू।”

10इस्राएल की आंखें बुढ़ापे के कारण इतनी धुंधली हो गई थीं कि उसे दिखाई नहीं देता था। तब यूसुफ उन्हें उसके पास ले गया और उसने उन्हें चूमकर गले लगाया।

11तब इस्राएल ने कहा, “मुझे आशा न थी कि मैं तेरा मुंह देखूंगाः परन्तु देख, परमेश्वर ने मुझे तेरा वंश भी दिखाया है।”

12तब यूसुफ ने उन्हें घुटनों के पास से हटाकर और मुंह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत् की।

13तब यूसुफ ने उन दोनों को लिया, एप्रैम को अपने दाहिने हाथ से कि वह इस्राएल के बाएं हो और मनश्शे को अपने बाएं हाथ से कि वह इस्राएल की दाहिनी ओर हो, फिर उन्हें उसके पास ले गया।

14और इस्राएल ने अपना दाहिना हाथ बढ़ाकर एप्रैम के सिर पर रखा जो छोटा था, और बांया हाथ मनश्शे के सिर पर रख दिया यघपि मनश्शे पहलौठा था।

15फिर उसने यूसुफ को आशीर्वाद देते हुए कहा, “परमेश्वर जिसके सामने मेरे पूर्वज इब्राहीम और इसहाक चले, परमेश्वर जो मेरे जन्म से लेकर आज तक मेरे जीवन का चरवाहा बना है,

16वह दूत जो मुझे सारी बुराई से बचाता आया है, इन लड़कों को आशीष दे; और ये मेरे और तेरे पूर्वजों इब्राहीम और इसहाक के कहलाएं और पृथ्वी पर बहुतायत से बढ़े।”

17जब यूसुफ ने देखा कि मेरे पिता ने अपना दाहिना हाथ एप्रैम के सिर पर रखा है तो यह उसे बुरा लगा; इसलिए उसने पिता का हाथ पकड़ लिया कि वह एप्रैम के सिर पर से उठाकर उसे मनश्शे के सिर पर रखे।

18और यूसुफ ने अपने पिता से कहा, “हे पिता, ऐसा न कर, क्योंकि पहलौठा तो यह है, इसके सिर पर अपना दाहिना हाथ रख।”

19परन्तु उसके पिता ने इनकार किया और कहा, “हे मेरे पुत्र, मैं जानता हू। इससे भी एक जाति उत्पन्न होगी और यह भी महान हो जाएगा। फिर भी इसका छोटा भाई इससे भी महान् हो जाएगा और इसके वंश से बहुत-सी जातियां निकलेंगी।”

20फिर उसने उसी दिन यह कहकर उनको आशीर्वाद दिया, “इस्राएल तेरा नाम लेकर यह आशीर्वाद दिया करेंगे, ‘परमेश्वर तुझे एप्रैम और मनश्शे के समान बना दे’!” इस प्रकार उसने मनश्शे से पहले एप्रैम को स्थान दिया।

21तब इस्राएल ने यूसुफ से कहा, “देख, मैं मरने पर हूं, परन्तु परमेश्वर तुम्हारे साथ रहेगा और तुम्हें तुम्हारे पूर्वजों के देश में लौटा ले जाएगा।

22और मैं तुझको तेरे भाइयों से अधिक उस भूमि का भाग देता हूं जिसे मैंने अपनी तलवार और धनुष द्वारा एमोरियों के हाथ से ले लिया है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)