पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 49 / 50
उत्पत्ति 49
1तब याकूब ने अपने पुत्रों को बुलाकर कहा, “इकट्ठे हो जाओ, कि मैं तुमको बताऊँ की आनेवाले दिनों में तुम पर क्या-क्या बीतेगा।
2हे याकूब के पुत्रों इकट्ठे होकर सुनो, और अपने पिता इस्राएल की बातें ध्यान से सुनो।
3“हे रूबेन, तू मेरा पहलौठा, मेरा बल और मेरे पौरुष का पहला फल है, प्रतिष्ठा और सामर्थ्य का उत्तम भाग तू ही है।
4तू जल के समान अनियंत्रित है इसलिए श्रेष्ठ न ठहरेगा, क्योंकि तूने अपने पिता के बिछौने पर चढ़कर उसे अशुद्ध कर दिया-वह तो मेरी खाट पर चढ़ा।
5“शमौन और लेवी तो भाई-भाई हैं, उनकी तलवारें हिंसा के हथियार है।
6मेरा मन उनकी सलाह न माने, मेरी महिमा उनकी सभा में न मिले। क्योंकि उन्होंने अपने क्रोध में एक मनुष्य को घात किया। और स्वेच्छाचारी होकर बैल की पूंछ काटी।
7धिक्कार है उनके क्रोध को क्योंकि वह प्रचण्ड था, और उनका रोष क्योंकि वह निर्दय था। मैं उन्हें याकूब में अलग-अलग और इस्राएल में तितर-बितर कर दूंगा।
8“हे यहूदा, तेरे भाई तेरी प्रशंसा करेंगे, तेरा हाथ तेरे शत्रुओं की गर्दन पर पड़ेगा। तेरे पिता के पुत्र तुझे दण्डवत् करेंगे।
9यहूदा सिंह का बच्चा है। हे मेरे पुत्र, तू शिकार करके ऊपर चढ़ आया है। वह सिंह के समान दबकर बैठ गया है, और शेरनी को छेड़ने का दुस्साहस कौन करेगा?
10यहूदा से तब तक राजदण्ड न छूटेगा और न उसके पैरों के बीच से शासकीय राजदण्ड हटेगा जब तक कि शीलो न आए; और राज्य-राज्य के लोग उसकी आज्ञा मानेंगे।
11वह गदहे के बच्चे को दाखलता से और अपनी गदही की बच्ची को उत्तम दाखलता से बांधेगा, वह अपने वस्त्र दाखमधु से और अपने चोगे अंगूरों के रस में धोएगा।
12उसकी आंखें दाख-मधु से चमकीली और उसके दांत दूध से श्वेत होंगे।
13“जबूलून समुद्र के तीर पर निवास करेगा, वह जहाजों के लिए बन्दरगाह का काम देगा, और उसका छोर सीदोन के निकट पहुंचेगा।
14“इस्साकार एक बलवान गदहा है, जो भेड़शाला में लेटा रहता है।
15जब उसने देखा कि विश्रामस्थान अच्छा है और देश मनोहर है तो उसने बोझ उठाने के लिए कंधे को झुकाया और बेगार करने वाले दास के समान बन गया।
16“दान इस्राएल के गोत्रों में से एक गोत्र होकर अपने लोगों का न्याय करेगा।
17दान मार्ग में का सांप, और रास्ते का एक नाग होगा जो घोड़े की एड़ी को डसता है, जिससे उसका सवार पछाड़ खाकर गिर पड़ता है।
18हे यहोवा, मैं तुझसे उद्धार पाने की आस लगाए हू।
19“गाद पर एक दल चढ़ाई तो करेगा, पर वह उसी दल के पिछले भाग पर छापा मारेगा।
20“आशेर का अन्न उत्तम होगा, और वह राजा के लिए उत्तम भोजन उत्पन्न करेगा।
21“नप्ताली छूटी हुई एक हरिणी है, वह मीठी-मीठी बातें बोलता है।
22“यूसुफ एक फलवन्त डाली है, वह सोते के पास लगी हुई फलवन्त लता की एक डाली है, उसकी डालियां दीवार पर फैल जाती है।
23धनुर्धारियों ने उस पर भयंकर आक्रमण किया और उस पर तीर मारे और उसके पीछे पड़ गए।
24परन्तु उसका धनुष दृढ़ रहा और उसकी भुजाएं याकूब के शक्तिमान परमेश्वर के हाथों के द्वारा फुर्तीली हुईं। उसी के पास से वह चरवाहा अर्थात् इस्राएल का पत्थर आएगा।
25यह तेरे पिता के उस ईश्वर का काम है जो तेरी सहायता करता है, उस सर्वशक्तिमान का जो तुझे ऊपर आकाश से आशीषें देता है।
26तेरे पिता के आशीर्वाद, मेरे पूर्वजों के आशीर्वादों से सनातन पहाड़ियों तक अधिक बंट गए है। वे यूसुफ के सिर पर रहें और उसके सिर के मुकुट पर रहें जो अपने भाइयों में न्यारा है।
27“बिन्यामीन फाड़ने वाला भेड़िया है, सवेरे तो वह शिकार को फाड़ खाता है और संध्या को वह लूट को बांट लेता है।”
28इस्राएल के बारह गोत्र ये ही हैं और यही उनके पिता ने उन्हें आशीर्वाद देते समय कहा। उसने उनमें से हर एक को उसकी योग्यता के अनुसार उपयुक्त आशीर्वाद दिया।
29तब उसने आज्ञा देकर उनसे कहा, “मैं अपने लोगों में मिलने पर हूं: मुझे मेरे पूर्वजों की उस गुफ़ा में मिट्टी देना जो हित्ती एप्रोन के खेत में है।
30अर्थात् उसी गुफा में जो कनान देश में मम्रे के सामने वाली मकपेला की भूमि में है; जिसे इब्राहीम ने हित्ती एप्रोन के हाथ से कब्रिस्तान के लिए मोल लिया था।
31वहां इब्राहीम और उसकी पत्नी सारा को मिट्टी दी गई थी, वहीं इसहाक और उसकी पत्नी रिबका को भी मिट्टी दी गई थी और वहीं मैंने लिआ को भी मिट्टी दी है।
32वह भूमि और वह गुफा जो उस भूमि में है हित्तियों के हाथ से मोल ली गई है।”
33जब याकूब अपने पुत्रों को आज्ञा दे चुका तब उसने खाट पर अपने पैर समेटे और प्राण त्याग दिया और अपने लोगों में जा मिला।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)