पुराना नियम · उत्पत्ति · अध्याय 5 / 50
उत्पत्ति 5
1यह आदम की वंशावली का लेख है। जिस दिन परमेश्वर ने मनुष्य की सृष्टि की, उसने अपने ही स्वरूप में उसे बनाया।
2उसने नर और नारी करके उनकी सृष्टि की, और उन्हें आशीष दी, और उनकी सृष्टि के दिन उनका नाम आदम रखा।
3जब आदम एक सौ तीस वर्ष का था, तब उसकी समानता में, उसके स्वरूप के अनुसार, उसका एक पुत्र उत्पन्न हुआ। उसने उसका नाम शेत रखा।
4शेत के जन्म के पश्चात् आदम आठ सौ वर्ष जीवित रहा तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
5आदम की कुल आयु नौ सौ तीस वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
6जब शेत एक सौ पांच वर्ष का था, तब उससे एनोश उत्पन्न हुआ।
7एनोश के जन्म के पश्चात् शेत आठ सौ सात वर्ष जीवित रहा तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुई।
8और शेत की कुल आयु नौ सौ बारह वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
9जब एनोश नब्बे वर्ष का था, तब उससे केनान उत्पन्न हुआ।
10केनान के जन्म के पश्चात एनोश आठ सौ पन्द्रह वर्ष जीवित रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
11और एनोश की कुल आयु नौ सौ पांच वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
12जब केनान सत्तर वर्ष का था, तब उससे महललेल उत्पन्न हुआ।
13महललेल के जन्म के पश्चात् केनान आठ सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
14और केनान की कुल आयु नौ सौ दस वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
15जब महललेल पैंसठ वर्ष का था, तब उससे येरेद उत्पन्न हुआ।
16और येरेद के जन्म के पश्चात् महललेल आठ सौ तीस वर्ष जीवित रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
17और महललेल की कुल आयु आठ सौ पंचानबे वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
18जब येरेद एक सौ बासठ वर्ष का था, तब हनोक उससे उत्पन्न हुआ।
19हनोक के जन्म के पश्चात् येरेद आठ सौ वर्ष जीवित रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
20और येरेद की कुल आयु नौ सौ बासठ वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
21जब हनोक पैंसठ वर्ष का था, तब उससे मतूशेलह उत्पन्न हुआ।
22मतूशेलह के जन्म के पश्चात् हनोक तीन सौ वर्ष तक परमेश्वर के साथ-साथ चलता रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
23अतः हनोक की कुल आयु तीन सौ पैंसठ वर्ष की हुई।
24हनोक तो परमेश्वर के साथ-साथ चलता था; फिर वह लुप्त हो गया, क्योंकि परमेश्वर ने उसे उठा लिया।
25जब मतूशेलह एक सौ सत्तासी वर्ष का था, तब उससे लेमेक उत्पन्न हुआ।
26और लेमेक के जन्म के पश्चात् मतूशेलह सात सौ बयासी वर्ष जीवित रहा, तथा उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
27और मतूशेलह की कुल आयु नौ सौ उनहत्तर वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
28जब लेमेक एक सौ बयासी वर्ष का था, तब उससे एक पुत्र हुआ।
29उसने यह कह कर उसका नाम नूह रखाः “यह हमारी मेहनत से और हमारे हाथों के परिश्रम से जो यहोवा द्वारा शापित इस भूमि के कारण है, हमें शान्ति देगा।”
30और नूह के जन्म के पश्चात् लेमेक पांच सौ पंचानबे वर्ष जीवित रहा और उसके और भी पुत्र-पुत्रियां हुईं।
31और लेमेक की कुल आयु सात सौ सत्त्तर वर्ष की हुई, तब वह मर गया।
32और नूह पांच सौ वर्ष का हुआ, और शेम, हाम, और येपेत उसके पुत्र थे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)