पुराना नियम · हबक्कूक · अध्याय 1 / 3
हबक्कूक 1
1वह प्रभावशाली वचन जिसे हबक्कूक नबी ने दर्शन में पाया।
2हे यहोवा, कब तक मैं तुझे सहायता के लिए पुकारूं और तू न सुने? मैं तेरे सम्मुख ‘अत्याचार’! ‘अत्याचार’! चिल्लाता हूं, फिर भी तू नहीं बचाता।
3तू मुझे अधर्म के काम क्यों दिखाता है और क्यों दुष्टता के काम देखने को विवश करता है? विनाश और उपद्रव तो मेरे सामने होते रहते है। झगड़ा होता है और विवाद बढ़ता जाता है।
4इसलिए व्यवस्था शिथिल हो गई है और कभी भी न्याय चुकाया नहीं जाता, क्योंकि दुष्ट लोग धर्मियों को घेरे रहते हैं, इसलिए न्याय बिगाड़ दिया जाता है।
5जाति-जाति के लोगों पर ध्यान लगाकर देखो आश्चर्य-चकित हो जाओ! क्योंकि मैं तुम्हारे दिनों में एक ऐसा काम करने वाला हूं कि यदि तुम्हें बताया भी जाता तो तुम विश्वास नहीं करते।
6क्योंकि देखो मैं कसदियों को तुम्हारे विरुद्ध खड़ा करूंगा। वे क्रूर और प्रचंड जाति के हैं, जो दूसरों के निवासस्थानों पर अधिकार करने के लिए पृथ्वी भर में चलते फिरते है।
7वे भयानक और डरावने हैं, वे स्वयं ही न्याय और प्रभुत्व के कर्त्ता है।
8उनके घोड़े चीतों से भी अधिक तेज भागने वाले हैं, और सांझ के समय निकलने वाले भेड़ियों से भी अधिक क्रूर है। उनके घोड़े सरपट दौड़े आते हैं, उनके घुड़सवार दूर-दूर से चले आते है। वे उस उकाब के समान उड़कर आते हैं जो अपने अहेर पर झपट्टा मारता है।
9वे सब उपद्रव करने चले आते हैं, सामने की ओर मुंह किए हुए झुंड के झुंड बढ़े आते है। वे रेत के समान बन्धुओं को इकट्ठा करते है।
10वे राजाओं को ठट्ठों में उड़ाते हैं और हाकिमों पर हंसते है। वे दृढ़ गढ़ों को कुछ नहीं समझते वरन् दमदमा बांधकर उन्हें जीत लेते है।
11तब वे आंधी के समान वहां से बहकर आगे बढ़ जाएंगे। परन्तु वे दोषी ठहराए जाएंगे। उनका बल ही उनका देवता है।
12हे यहोवा, हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे पवित्र, क्या तू सनातनकाल से नहीं है? हम मरेंगे नही। हे यहोवा, तूने उन्हें न्याय करने के लिए ठहराया है, और हे मेरी चट्टान, तूने उन्हें सुधारने के लिए नियुक्त किया है।
13तेरी आंखें ऐसी शुद्ध हैं कि तू बुराई को देख ही नहीं सकता, और न तू दुष्टता पर दृष्टि कर सकता है। फिर तू विश्वासघातियों पर क्यों दृष्टि करता और जब दुष्ट अपने से अधिक धर्मी को निगल जाते हैं, तब तू क्यों चुप रहता है?
14तूने मनुष्यों को समुद्र की मछलियों और उन रेंगने वाले कीड़े-मकोड़ों के समान क्यों बनाया है। जिन पर कोई शासक नहीं?
15ये लोग उन सबको कांटे से पकड़कर उठा लेते और अपने जाल में घसीट कर महाजाल में समेट लेते हैं, इसलिए वे आनन्दित और मग्न होते है।
16वे अपने जालों के लिए बलिदान चढ़ाते और अपने महाजाल के आगे धूप जलाते हैं क्योंकि इन्हीं के द्वारा उनका भाग अधिक और उनका भोजन चिकना होता है।
17क्या वे अपने जालों को खाली करते रहेंगे? क्या वे जाति-जाति के लोगों को निर्दयता से घात करते रहेंगे?
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)