पुराना नियम · हबक्कूक · अध्याय 2 / 3
हबक्कूक 2
1मैं अपने पहरे पर खड़ा रहूंगा और गुम्मट पर चढ़कर ठहरा रहूंगा और इसकी प्रतीक्षा करूंगा कि वह मुझसे क्या कहेगा और मैं ताड़ना के समय क्या उत्तर दूंगा।
2तब यहोवा ने मुझे उत्तर दिया, “दर्शन को लिख और पटियाओं पर सफाई से अंकित कर कि संदेशवाहक उसे लेकर दौड़ सके।
3क्योंकि दर्शन एक निर्धारित समय के लिए हैं; यह शीघ्र ही समय पर पूरा होगा, और इसमें धोखा न होगा। चाहे इसमे कुछ समय लगे, फिर भी इसकी बाट जोहते रहना, क्योंकि यह निश्चय पूरा होगा, इसमें देर न होगी।
4देख, घमंडी का मन सीधा नहीं है, परन्तु धर्मीजन अपने विश्वास से जीवित रहेगा।
5फिर दाखमधु अहंकारी पुरुष को धोखा देता है जिससे वह घर में नहीं रहता। वह अधोलोक के समान अपनी लालसा बढ़ाता और मृत्यु के समान वह कभी संतुष्ट नहीं होता। वह जाति-जाति के सब लोगों को अपने पास खींच लेता और देश-देश के सब लोगों को अपने पास इकट्ठा कर लेता है।
6क्या ये सब उसका ठट्ठा न करेंगे? क्या ये उस पर ताने मार कर और उपहास करके यह न कहेंगे कि हाय उस पर, जो दूसरों के धन से धनी होता और गिरवी की वस्तुओं से अपना घर भर लेता है-पर कब तक?
7क्या तेरे ट्टणी अचानक उठ खड़े न होंगे? और तुझे कंपाने वाले जाग न उठेंगे? निश्चय, तू उनकी लूट बन जाएगा।
8इसलिए कि तूने बहुत जातियों को लूटा है, और इस देश और नगर के सब निवासियों की हत्या की है और उन पर उपद्रव किया है, सब बचे हुए लोग तुझे भी लूट लेंगे।
9हाय! उस पर जो अपने घर के लिए अनुचित लाभ उठाता है कि अपना घोंसला ऊंचे स्थान पर बना कर विपत्ति से बच सके।
10तूने बहुत सी जातियों का सर्वनाश करके अपने घर के लिए एक लज्जा की युक्ति बांधी है और अपने ही प्राण का दोषी ठहरा है।
11निश्चय, दीवार से पत्थर चिल्लाएंगे और छत से कड़ियां उत्तर देंगी।
12हाय उस पर जो रक्तपात करके नगर को बनाता और अत्याचार से नगरी की नींव डालता है।
13क्या यह सेनाओं के यहोवा की ओर से नहीं कि देश-देश के लोग परिश्रम तो करते हैं परन्तु वे आग का कौर हो जाते हैं और जाति-जाति के लोग व्यर्थ ही थक जाते हैं?
14क्योंकि पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है।
15“हाय, तुझ पर जो अपने पड़ोसियों को मदिरा पिलाता, हां, अपना विष मिलाकर उन्हें मतवाला करता है कि उनकी नग्नता देखे।
16तू आदर के बदले अनादर से भर जाएगा, तू भी पीकर अपना नंगापन प्रकट कर, यहोवा के दाहिने हाथ का कटोरा घूमकर तेरी ओर भी आएगा और तेरा वैभव पूर्णतः कलंकित हो जाएगा।
17लेबनोन में तूने जो अत्याचार किया है और पशुओं का जो भयानक सर्वनाश किया है, वह तुझ पर ही आ पड़ेगा, क्योंकि तूने इस देश और नगर तथा इसके सब निवासियों में रक्तपात और हिंसा फैलाई है।
18जब मूर्ति को मूर्तिकार ने ही खोद कर बनाया है तो उस मूर्ति से क्या लाभ? और ढली हुई और झूठ सिखाने वाली मूर्ति से क्या लाभ? उसका बनाने वाला तो गूंगी मूर्तियां बनाकर अपनी ही हस्तकला पर भरोसा रखता है।
19उस पर हाय जो काठ से कहे कि जाग! और निर्जीव पत्थर से कि उठ! क्या वह सिखा सकता है? देख, वह तो सोने और चांदी से मढ़ा हुआ है पर उसमें प्राण नही।
20परन्तु यहोवा तो अपने पवित्र मन्दिर में है, समस्त पृथ्वी उसके सामने शान्त रहे।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)