नया नियम · इब्रानियों · अध्याय 9 / 13
इब्रानियों 9
1अब पहिली वाचा में भी उपासना और उस आराधनालय के नियम थे जो पृथ्वी पर था।
2क्योंकि एक तम्बू बनाया गया, जिसके पहिले भाग में दीपदान, मेज़ और भेंट की रोटियाँ थी। यह पवित्र स्थान कहलाता है।
3दूसरे परदे के पीछे तम्बू का वह भाग था जो परम पवित्र स्थान कहलाता है।
4उसमें धूप जलाने के लिए सोने की एक वेदी और वाचा का सन्दूक था जो चारों ओर सोने से मढ़ा हुआ था जिसमें मन्ना से भरा हुआ सोने का मर्तबान और हारून की फूली-फली लाठी तथा वाचा की पटियां थी।
5उसके ऊपर तेजोमय करूब थे जो प्रायशिचत्त के ढक्कन पर छाया किए हुए थे, परन्तु हम इन सब बातों का यहां सविस्तार वर्णन नहीं कर सकते।
6जब ये वस्तुएं इस रीति से तैयार हो चुकीं तो याजक बाहरी तम्बू में निरन्तर प्रवेश कर के सेवा का कार्य सम्पन्न किया करते थे,
7परन्तु दूसरे में केवल महायाजक प्रवेश करता है, और वह भी वर्ष में एक ही बार, और लहू लिए बिना नहीं जाता, जिसे वह अपने और लोगों के, अज्ञानता में किए गए पापों के लिए भेंट चढ़ाता है।
8पवित्र आत्मा इस से यही दर्शाता है कि जब तक बाहरी तम्बू विघमान है, तब तक पवित्र स्थान का मार्ग प्रकट नहीं हुआ।
9यह तम्बू तो वर्तमान समय के लिए दृष्टान्त है जिसके अनुसार ऐसी भेंटें और बलिदान चढ़ाए जाते हैं, जो आराधना करने वालों के विवेक को सिद्ध नहीं कर सकते।
10क्योंकि ये केवल खाने-पीने और नहाने-धोने की विभिन्न विधियों से सम्बन्धित शारीरिक नियम हैं, जो सुधार के समय तक के लिए ठहराए गए है।
11परन्तु जब मसीह आने वाली अच्छी बातों का महायाजक होकर प्रकट हुआ तो उसने और भी बड़े तथा सिद्ध तम्बू में से होकर प्रवेश किया जो हाथ का बनाया हुआ अर्थात् इस सृष्टि का नही।
12और बकरों तथा बछड़ों के लहू द्वारा नहीं, वरन् स्वयं अपने लहू द्वारा सदा के लिए एक ही बार पवित्र स्थान में प्रवेश कर के अनन्त छुटकारा प्राप्त किया।
13क्योंकि यदि अशुद्ध लोगों पर बकरों और बैलों का लहू तथा कलोर की राख का छिड़का जाना देह की शुद्धता के लिए पवित्र करता है,
14तो मसीह का लहू, जिसने अपने आप को सनातन आत्मा द्वारा परमेश्वर के सम्मुख निर्दोष चढ़ा दिया, तुम्हारे विवेक को मरे हुए कामों से और भी अधिक क्यों न शुद्ध करेगा कि तुम जीवित परमेश्वर की सेवा करो?
15और इसी कारण वह नई वाचा का मध्यस्थ है, जिससे कि उस मृत्यु के द्वारा जो प्रथम वाचा के अन्तर्गत किए गए अपराधों का मूल्य चुकाने के लिए हुई, वे जो बुलाए गए हैं अनन्त उत्तराधिकार की प्रतिज्ञा को प्राप्त कर सके।
16क्योंकि जहां वसीयतनामा है, वहां उसके लिखने वाले की मृत्यु का होना आवश्यक है।
17मनुष्यों की मृत्यु के बाद ही वसीयतनामा पक्का होता है। क्योंकि जब तक कोई जीवित रहता है तब तक वसीयतनामा कार्यान्वित नहीं हो सकता।
18अतः प्रथम वाचा भी बिना लहू के नहीं बांधी गई।
19जब मूसा लोगों को व्यवस्था की प्रत्येक आज्ञा सुना चुका तब उसने बछड़ों और बकरों के लहू को पानी, लाल ऊन तथा जूफे के साथ लेकर उस पुस्तक और सब लोगों पर छिड़क दिया और कहा,
20“यह उस वाचा का लहू है जिसकी आज्ञा परमेश्वर ने तुम्हें दी।”
21इसी प्रकार उसने उस तम्बू पर और सेवा के सब पात्रों पर लहू छिड़का।
22व्यवस्था के अनुसार प्रायः सब वस्तुएं लहू के द्वारा शुद्ध की जाती हैं, और लहू बहाए बिना क्षमा है ही नही।
23इसलिए आवश्यक था कि स्वर्गीय वस्तुओं के प्रतिरूप इन बलिदानों के द्वारा शुद्ध किए जाते, परन्तु स्वर्गीय वस्तुएं स्वयं इनसे भी उत्तम बलिदानों के द्वारा शुद्ध की जाती।
24क्योंकि मसीह ने हाथ के बनाए हुए पवित्र स्थान में, जो सच्चे पवित्र स्थान का प्रतिरूप मात्र है, प्रवेश नहीं किया, वरन् स्वर्ग ही में प्रवेश किया कि अब हमारे लिए परमेश्वर के सामने प्रकट हो।
25और यह नहीं कि वह अपने आप को बार बार चढ़ाए-जैसे कि महायाजक प्रति वर्ष लहू लेकर पवित्र स्थान में प्रवेश तो करता है, परन्तु अपना लहू लेकर नहीं-
26अन्यथा जगत की उत्पत्ति के समय के समय से उसे बार बार दुख भोगना पड़ता, परन्तु अब युग के अन्त में वह एक ही बार प्रकट हुआ कि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को मिटा दे।
27और जैसे मनुष्यों के लिए एक ही बार मरना और उसके बाद न्याय का होना नियुक्त किया गया है,
28वैसे ही मसीह भी, बहुतों के पापों को उठाने के लिए एक बार बलिदान होकर, दूसरी बार प्रकट होगा। पाप उठाने के लिए नहीं, परन्तु उनके उद्धार के लिए जो उत्सुकता से उसके आने की प्रतीक्षा करते है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)