पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 15 / 66
यशायाह 15
1मोआब के विषय में नबूवतः निश्चय ही मोआब के आर नगर का एक ही रात में उजाड़ और विनाश हो गया। निश्चय ही मोआब के कीर का भी एक ही रात में उजाड़ और विनाश हो गया।
2वे रोने के लिए मन्दिर और दीबोन अर्थात् ऊंचे स्थानों पर चले गए है। नबो और मेदबा के विषय में मोआब हाय-हाय करता है। प्रत्येक का सिर मूंडा गया है और प्रत्येक की दाढ़ी काटी गई है।
3सड़कों पर लोग टाट पहने हुए हैं; अपने घरों की छतों पर और चौराहों पर सब लोग आंसू बहा-बहाकर विलाप कर रहे है।
4हेशबोन और एलाले भी चीख-पुकार रहे हैं, उनका स्वर यहस तक सुनाई दे रहा है। इसलिए मोआब के हथियारबन्द चीख रहे हैं; उनका मन भीतर-ही-भीतर कांप उठता है।
5मेरा हृदय मोआब के लिए पुकार उठा है; उसके लोग सोअर तथा एग्लत-शलीशिय्या तक भागे जा रहे है। वे लूहीत की चढ़ाई पर रोते हुए चढ़ रहे हैं; निश्चय ही होरोनैम के मार्ग पर वे अपने महाविनाश पर हाहाकार कर रहेे है।
6क्योंकि निम्रीम का जल सूख गया; निश्चय ही घास कुम्हला गई, हां, हरी घास सूख गई है, और अब वहां कुछ भी हरियाली नहीं रही।
7इस कारण जो धन उन्होंने एकत्र किया और बचा रखा है, उसे वे अराबीम की तंग घाटी में ले जा रहे है।
8क्योंकि उनके विनाश की चिल्लाहट मोआब की सीमाओं तक पहुंच रही है, उसका हाहाकार एगलैम तक और उसकी चीख पुकार बेर-एलीम तक सुनाई पड़ती है।
9क्योंकि दीमोन के जलाशय लहू से भरे हैं; निश्चय ही मैं दीमोन पर और विपत्ति डालूंगा, मोआब के भगोड़ों तथा देश के बचे हुए लोगों के विरुद्ध एक सिंह भेजूंगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)