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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 2 / 66

यशायाह 2

1वह वचन जो आमोस के पुत्र यशायाह ने यहूदा और यरूशलेम के विषय में दर्शन में पाया।

2अब, अन्त के दिनों में ऐसा होगा कि यहोवा के भवन का पर्वत सब पर्वतों में प्रमुख ठहराया जाएगा और पहाड़ियों से ऊंचा किया जाएगा; और सब जातियां उसकी ओर उमड़ पड़ेंगी।

3जाति-जाति के लोग आकर कहेंगे, “आओ, हम यहोवा के पर्वत पर चढ़कर, याकूब के परमेश्वर के भवन को जाएं, कि वह हमें अपने मार्गों के विषय में सिखा सके, और हम उसके मार्गों पर चल सकें।” क्योंकि व्यवस्था सिय्योन से और यहोवा का वचन यरूशलेम से निकलेगा।

4और वह जाति-जाति का न्याय करेगा, तथा देश-देश के लोगों को अपना निर्णय सुनाएगा; तब वे अपनी तलवारों को पीट-पीटकर हल की फाल तथा अपने भालों को हंसिया बना देंगे। एक देश दूसरे देश के विरुद्ध तलवार नहीं उठाएगा, और न भविष्य में वे फिर कभी युद्ध-विघा सीखेंगे।

5हे याकूब के घराने, आ, हम यहोवा की ज्योति में चले।

6तूने तो अपनी प्रजा याकूब के घराने को त्याग दिया है, क्योंकि वे तो पूर्व के प्रभाव से भर गए हैं, तथा पलिश्तियों के समान शकुन विचारते हैं और विदेशियों से हाथ मिलाते है।

7उनका देश चांदी और सोने से भी भरपूर है, उनके ख़जानों का अन्त नहीं; उनका देश घोड़ों से भी भरा है तथा उनके रथ अनगिनत है।

8उनका देश मूर्तियों से भरा है; वे अपने हाथ की कारीगरी को जिसे उनकी अंगुलियों ने संवारा है, दण्डवत् करते हैं।

9अतः साधारण लोग दीन किए गए हैं, और बड़े लोगों को नीचा दिखाया गया है, फिर भी उन्हें क्षमा न कर।

10यहोवा के भय से तथा उसकी प्रभुता के तेज के कारण चट्टान में घुस और मिट्टी में छिप जा।

11घमंड से चढ़ी हुई मनुष्य की आंखें नीची की जाएंगी तथा मनुष्य का अहंकार चूर-चूर किया जाएगा, और उस दिन यहोवा ही महिमान्वित होगा।

12क्योंकि एक दिन सेनाओं का यहोवा प्रत्येक अभिमानी, अहंकारी तथा घमंड से फूलने वाले का लेखा अवश्य लेगा, जिससे ऐसा व्यक्ति नीचा दिखाया जाए।

13और लेबनोन के सब ऊंचे और बड़े देवदारों पर, तथा बाशान के सब बांजवृक्षों पर,

14समस्त विशाल पर्वतों तथा सब ऊंची पहाड़ियों पर,

15प्रत्येक ऊंची मीनार तथा प्रत्येक शहरपनाह पर,

16तर्शीश की सब नौकाओं और समस्त सुन्दर जलयानों पर वह दिन आ पड़ेगा।

17मनुष्य का गर्व चूर किया जाएगा तथा मनुष्यों का घमंड तोड़ दिया जाएगा और उस दिन यहोवा ही महिमान्वित होगा।

18मूर्तियां पूर्णतया मिट जाएंगी।

19जब यहोवा पृथ्वी को कम्पित करने के लिए उठेगा तो उसके प्रकोप तथा उसकी प्रभुता के तेज के कारण मनुष्य चट्टानों की गुफ़ाओं तथा भूमि की खोहों में जा घुसेंगे।

20उस दिन लोग अपनी सोने चांदी की मूर्तियों को जिन्हें उन्होंने दण्डवत् करने के लिए बनाया था, छछूंदरों और चमगादड़ों के आगे फेकेंगे।

21जब यहोवा पृथ्वी को कम्पित करने के लिए उठेगा तब उसके प्रकोप तथा उसकी प्रभुता के तेज के कारण लोग चट्टानों की गुफ़ाओं तथा पत्थरों की दरारों में घुस जाएंगे।

22अतः मनुष्य से जिसकी श्वास उसके नथनों में है, दूर ही रहो क्योंकि उसका मूल्य है ही क्या?

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)