पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 3 / 66
यशायाह 3
1सुनो, प्रभु’ सेनाओं का यहोवा, यरूशलेम और यहूदा से भंडार और सहारा दोनों अर्थात् रोटी का सम्पूर्ण संचय तथा पानी की समस्त आपूर्ति रोक देगा,
2अर्थात् शूरवीर और योद्धा, न्यायी और नबी, भावी विचारने वाले और प्राचीन को,
3पचास सैनिकों के प्रधान तथा प्रतिष्ठित पुरुष को, परामर्शदाता तथा निपुण कारीगर और चतुर जादूगर को दूर करेगा।
4मैं लड़कों को उनके शासक बनाऊंगा, हां, नन्हें बच्चे उन पर शासन करेंगे,
5प्रत्येक का एक दूसरे के द्वारा तथा अपने पड़ोसी के द्वारा दमन होगा; वृद्धों के विरुद्ध युवक तथा आदरणीय लोगों के विरुद्ध नीच उठ खड़े होंगे।
6जब कोई पुरुष अपने पिता के घर में अपने भाई को पकड़कर कहेगा, “तेरे पास पोशाक है, तू हमारा शासक होगा, और ये उजड़े देश तेरे ही अधीन हों,”
7तो उस दिन वह मना करेगा, “मुझसे प्रबन्ध न होगा, क्योंकि मेरे घर में न तो रोटी है और न पोशाक; मुझे लोगों पर शासक नियुक्त न करो।”
8यरूशलेम तो लड़खड़ा गया है और यहूदा गिर गया है, क्योंकि उनके वचन और उनके कार्य यहोवा के विरुद्ध रहे हैं, और जो उसकी महिमामय उपस्थिति से विद्रोह कर चुके है।
9उनके चेहरे भी उनके विरुद्ध साक्षी देते है। सदोम के समान वे अपने पापों को प्रकट करते हैं; वे उन्हें छिपाते तक नही। उन पर हाय! वे स्वयं अपने ऊपर हानि लाए है।
10धर्मियों से कहो कि उनका भला होगा, क्योंकि वे अपने कामों का फल खाने पाएंगे।
11दुष्ट पर हाय! उसका बुरा ही होगा, क्योंकि उसके कामों का फल उसको मिलेगा।
12हे मेरी प्रजा! बच्चे ही तुझ पर अत्याचार करते हैं, और स्त्रियां तुझ पर शासन करती है। हे मेरी प्रजा! तुम्हारे अगुवे तुम्हें भटका देते हैं और तुम्हारे मार्ग को भुला देते है।
13यहोवा मुकद्दमा लड़ने के लिए उठा, और लोगों का न्याय करने के लिए खड़ा है।
14यहोवा अपनी प्रजा के प्राचीनों तथा प्रधानों का मुकद्दमा करने को आता है, “तुम ही तो दाख की बारी को चट कर गए हो; कंगालों से लूटा हुआ माल तुम्हारे ही घरों में है,
15तुम क्यों मेरी प्रजा को दबाते तथा कंगालों का सिर कुचलते हो?” यह सेनाओं के प्रभु यहोवा का वचन है।
16यहोवा ने यह भी कहा, “क्योंकि सिय्योन की पुत्रियां घमंड करतीं और सिर ऊंचे करके चलतीं, आंखे मटकातीं तथा ठुमुक-ठुमुक कर कदम रखतीं तथा अपने पैरों के पायलों को छमछमाती हैं,
17इसलिए प्रभु यहोवा सिय्योन की पुत्रियों के सिरों को खाज से पीड़ित करके गंजे करेगा।”
18उस दिन प्रभु उनकी पायलों, जालियों, चन्द्रहारों,
19झुमकों, कंगनों, घूंघटों,
20सिर के गहनों, बाजू-बन्दों, करधनियों, इत्रदानों, ताबीजों,
21अंगूठियों, नथनियों,
22सुन्दर वस्त्रों, कुर्त्तियों, पोशाकों, बटुओं,
23दर्पणों, मलमल के वस्त्रों, चुन्नियों और ओढ़नियों की सुन्दरता को मिटा देगा।
24तब ऐसा होगा कि सुगन्ध के स्थान पर दुर्गन्ध, और करधनी के स्थान पर रस्सी होगी, सजे-संवरे बालों के स्थान पर गंजापन, सुन्दर वस्त्रों के स्थान पर टाट का कटिबन्ध तथा सुन्दरता के स्थान पर दागे जाने के चिह्न होंगे।
25तेरे पुरुष तलवार से, हां, तेरे शूरवीर युद्ध में मारे जाएंगे।
26उसके प्रवेश-द्वार विलाप करेंगे तथा शोक मनाएंगे, और वह उजाड़ होकर भूमि पर बैठेगी।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)