पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 42 / 66
यशायाह 42
1“मेरे दास को देखो जिसे मैं सम्भाले हूं, मेरे चुने हुए को, जिससे मेरा जी प्रसन्न है! मैंने उस पर अपना आत्मा रखा है, वह जाति जाति के लिए न्याय लाने वाला होगा।
2वह न तो चिल्लाएगा, न ऊंचे शब्द से बोलेगा, और न मार्ग में अपनी वाणी सुनाएगा।
3कुचले हुए नरकट को वह न तोड़ेगा और न टिमटिमाती हुई बत्ती को बुझाएगा। वह सच्चाई से न्याय चुकाएगा।
4जब तक कि वह न्याय को पृथ्वी पर स्थिर न कर चुकेगा वह न तो हताश और न ही निराश होगा और द्वीप उसकी व्यवस्था की बाट जोहेंगे।”
5यहोवा परमेश्वर जिसने आकाश को सृजा और उसे ताना है, जिसने पृथ्वी को और उसकी उपज को फैलाया है, जो उस पर के लोगों को श्वास, हां, उस पर चलने फिरने वालों को आत्मा देता है, वह यों कहता हैः
6“मैं यहोवा हूं, मैंने तुझे धार्मिकता में बुलाया है, मैं तेरा हाथ थामकर तेरी रक्षा भी करूंगा, और मैं तुझे प्रजा के लिए वाचा तथा जातियों के लिए प्रकाश ठहराऊंगा,
7कि तू अन्धों की आंखें खोले तथा बन्दियों को बन्दीगृह से और अन्धेरे में पड़े हुओं को काल कोठरी से निकाले।
8मैं यहोवा हूं, यही मेरा नाम है, मैं अपनी महिमा दूसरे को न दूंगा और जो स्तुति मेरी है उसे खुदी हुई मूर्तियों को न दूंगा।
9देखो, पहले की बातें तो बीतने पर हैं, अब मैं नई बातें बताता हू। उनके होने से पहले ही मैं तुमको सुनाता हू।”
10हे समुद्र पर चलने वालो और उसमें की सब वस्तुओं, हे द्वीपो, और उनके निवासियो, यहोवा के लिए एक नया गीत गाओ, पृथ्वी के छोर-छोर से उसकी स्तुति करो।
11जंगल और उसके नगर अर्थात् केदार के लोगों की बस्तियां अपनी आवाज ऊंची उठाए। सेला के निवासी ऊंचे स्वर से गाएं, वे पर्वतों की चोटियों पर से ऊंचे शब्द से ललकारे।
12द्वीपों में लोग यहोवा की महिमा करें, उसकी स्तुति करे।
13यहोवा वीर के समान निकलेगा, वह योद्धा के समान अपनी जलन भड़काएगा। वह ऊंचे शब्द से पुकारेगा, हां, युद्ध के लिए ललकारेगा। वह अपने शत्रुओं पर प्रबल होगा।
14बहुत समय से तो मैं चुप रहा, मैं मौन साधे स्वयं को रोके रहा; अब जच्चा के समान कराहूंगा, मैं हांफ-हांफ कर सांस भरूंगा।
15मैं पर्वतों और पहाड़ियों को उजाड़ डालूंगा और उनके सब पेड़-पौधों को झुलसा दूंगा; मैं नदियों को द्वीप बना दूंगा और तालाबों को सुखा दूंगा।
16मैं अन्धों को एक ऐसे मार्ग से ले जाऊंगा जिसे वे नहीं जानते; मैं उनको ऐसे पथों पर ले चलूंगा जिन्हें वे नहीं जानते। मैं उनके आगे-आगे अन्धकार को प्रकाश करूंगा और ऊबड़-खाबड़ स्थानों को समतल करूँगा। ये कार्य मैं करूंगा और उनको न त्यागूंगा।
17जो लोग खुदी हुई मूर्तियों पर भरोसा रखते और ढाली गई प्रतिमाओं से कहते हैं, “तुम हमारे ईश्वर हो,” उन्हें पीछे हटना और अत्यन्त लज्जित होना पड़ेगा।
18हे बहरो, सुनो! हे अन्धो, आंखे खोलो कि तुम देख सको।
19मेरे दास को छोड़ और कौन अन्धा है अथवा मेरे भेजे हुए सन्देशवाहक के तुल्य कोैन बहरा है? मेरे मित्र के सदृश और कौन अन्धा है?
20तू बहुत-सी बातें देखता तो है परन्तु उन पर ध्यान नहीं देता, कान तो खुले हैं पर कोई सुनता नही।
21यहोवा अपनी धार्मिकता के निमित्त व्यवस्था को महान् और महिमामय बनाने से प्रसन्न हुआ।
22परन्तु ये तो लुटे-पिटे लोग हैं, सबके सब गîक्कों में फंस गए हैं अथवा काल कोठरियों में बन्दी बना लिए गए है। वे ऐसे शिकार हो गए हैं कि उनको छुड़ाने वाला कोई न रहा, और ऐसी लूट कि कोई नहीं कहता, “उन्हें लौटा दो!”
23तुम में से कौन इस पर कान लगाएगा? भविष्य में कौन ध्यान देेकर सुनेगा?
24किसने याकूब को लुटने के लिए दे दिया और इस्राएल को लुटेरों के वश में कर दिया? क्या यह यहोवा ही नहीं था जिसके विरुद्ध हमने पाप किया, और जिसके मार्गों में उन्होंने चलना न चाहा और न जिसकी व्यवस्था को माना?
25इसीलिए उसने उस पर अपने क्रोध की ज्वला उंडेल दी और भयंकर युद्ध भड़काया; और यघपि लपटें उसके चारों ओर फैल गईं फिर भी उसने न पहचाना; और इसने उसे जला भी दिया, फिर भी उसने कोई ध्यान न दिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)