पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 43 / 66
यशायाह 43
1परन्तु अब, हे याकूब, तेरा सृष्टिकर्ता- हे इस्राएल, तेरा सृजनहार यहोवा यों कहता है, “मत डर, क्योंकि मैंने तुझे छुड़ा लिया है; मैंने तुझे नाम लेकर बुलाया है, तू मेरा ही है!
2जब तू जल में से होकर जाए, मैं तेरे संग-संग रहूंगा, और जब तू नदियों में से होकर चले, वे तुझे न डुबाएंगी। जब तू अग्नि में से होकर चले तो वह तुझे न झुलसाएगी, न ही उसकी लौ तुझे जलाने पाएगी।
3क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूँ, इस्राएल का पवित्र, तेरा उद्धारकर्ता हू। तेरी छुड़ौती के लिए मैंने मिस्र को तथा तेरे बदले इथियोपिया और सबा को दिया है।
4तू मेरी दृष्टि में अनमोल और प्रतिष्ठित है और मैं तुझ से प्रेम करता हूं, इसलिए मैं तेरे बदले मनुष्य, वरन् तेरे जीवन के बदले राज्य-राज्य के लोग दे दूंगा।
5मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं: मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा और पश्चिम से भी इकट्ठा करूंगा।
6मैं उत्तर से कहूंगा, ‘उन्हें छोड़ दे।’ तथा दक्षिण से, ‘उनको रोके मत रख!’ मेरे पुत्रों को दूर से तथा मेरी पुत्रियों को पृथ्वी के छोर से ले आओ,
7अर्थात् हर एक को जो मेरे नाम का कहलाता है, जिसको मैंने अपनी महिमा के लिए सृजा है, तथा जिसको मैंने रचा और बनाया है।”
8उन लोगों को ले आओ जिनकी आंखें तो हैं फिर भी अन्धे हैं और कान तो हैं फिर भी बहरे है।
9जाति जाति के लोग इकट्ठे किए जाएं और राज्य राज्य के लोग एकत्रित हो। इनमें से कौन हैं जो यह घोषणा कर सकते और बीती हुई बातों को बता सकते हैं? वे स्वयं अपने साक्षी ले आएं कि सच्चे ठहरे। लोग सुनें और कह सकें, “यह सत्य है।”
10यहोवा की वाणी है, “तुम मेरे साक्षी और मेरे दास हो जिन्हें मैंने इसलिए चुना है कि तुम समझकर मुझ पर विश्वास करो और यह जान लो कि मैं वही हू। न तो मुझसे पहले कोई परमेश्वर हुआ और न मेरे बाद कोई होगा।
11मैं, हां, मैं ही यहोवा हूं और मुझे छोड़ कोई उद्धारकर्ता नही।
12मैंने ही घोषणा की, उद्धार किया और वर्णन भी किया है। तुम्हारे मध्य कोई पराया देवता न था; इस कारण तुम ही मेरे साक्षी हो, मैं परमेश्वर हूँ।” यहोवा की यही वाणी है।
13“अनन्तकाल से ही मैं परमेश्वर हूं, और ऐसा कोई नहीं जो मेरेे हाथ से छुड़ा सके। जो कुछ मैं करता हूं उसे कौन बदल सकता है?”
14तुम्हारा छुड़ाने वाला और इस्राएल का पवित्र, यहोवा यों कहता हैः “तुम्हारे कारण मैंने बेबीलोन को बुलवाया है, और मैं उन सबको बन्दी बनाकर ले आऊंगा और कसदियों को भी उन्हीं के जहाजों पर जिन पर वे फूलते हैं, ले आऊंगा।
15मैं यहोवा, तुम्हारा पवित्र, इस्राएल का सृजनहार, तुम्हारा राजा हू।”
16जो समुद्र में मार्ग और प्रचण्ड धारा में पथ बनाता है,
17जो रथों और घोड़ों को, सेना और शूरवीरों को ले आता है-वे तो एक साथ लेट गए और फिर उठ नहीं पाते, वे बुझ गए और बत्ती के समान विलुप्त हो गए हैं-वह यहोवा यों कहता हैः
18“बीती हुई बातों का स्मरण न करो न भूतकाल की बातों पर सोच-विचार करो।
19देखो मैं एक नया काम करूंगा। वह अभी प्रकट होगा। क्या तुम उससे अनजान ही बने रहोगे? मैं जंगल में एक मार्ग बनाऊंगा और मरुभूमि में नदियां बहाऊंगा।
20वन पशु, हां, गीदड़ और शुतुर्मुर्ग भी मेरी महिमा करेंगे, क्योंकि मैंने अपनी चुनी हुई प्रजा के पीने के लिए जंगल में जल दिया तथा मरुभमि में नदियां बहाई है।
21जिस प्रजा को मैंने अपने लिए बनाया है, वह मेरा गुणानुवाद करेगी।
22“फिर भी हे याकूब, तूने मुझे नहीं पुकारा, वरन् हे इस्राएल, तू मुझसे ऊब गया है।
23तू मेरे लिए होमबलि की भेड़ें नहीं लाया, न ही बलिदान चढ़ाकर तूने मेरी महिमा की। मैंने तुझ पर बलिदान चढ़ाने का बोझ नहीं लादा, न ही धूप जलाने के लिए तुझे थकाया है।
24तूने मेरे लिए रुपए से अगरबत्ती मोल नहीं ली, न ही मुझे बलिदानों की चर्बी से तृप्त किया है, परन्तु तूने अपने पापों का बोझ मुझ पर लाद दिया है और मुझे अपने अधर्म के कामों से थका दिया है।
25“मैं, हां मैं ही हूं, जो अपने ही निमित्त तेरे अपराधों को मिटा देता हूं, और मैं तेरे पापों का स्मरण न करूंगा।
26मुझे स्मरण दिला। आ, हम आपस में वाद-विवाद करे। तू अपना पक्ष प्रस्तुत कर कि निर्दोष ठहर सके।
27तेरे मूल पिता ने पाप किया, और तेरे प्रतिनिधियों ने मेरे विरुद्ध अपराध किए है।
28अतः मैं पवित्रस्थान के अधिकारियों को अपवित्र ठहराऊंगा और मैं याकूब को विनाश तथा इस्राएल को निन्दित होने के लिए सौंप दूंगा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)