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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 50 / 66

यशायाह 50

1यहोवा यों कहता हैः “वह तलाक-पत्र कहां है जिसे देकर मैंने तेरी माता को हटा दिया था? अथवा मैंने किस महाजन के हाथ तुम्हें बेचा है? देखो, तुम अपने ही अधर्म के कारण बिक गए, और तुम्हारे ही अपराधों के कारण तुम्हारी माता त्यागी गई है।

2क्या कारण था कि जब मैं आया तब कोई न मिला, जब मैें पुकारा तब उत्तर देने वाला कोई न था? क्या मेरा हाथ ऐसा छोटा है जो छुड़ा न सके? अथवा मुझ में बचाने का सामर्थ्य ही न रहा? देखो, मैं अपनी घुड़की से ही समुद्र को सुखा देता हूं, मैं नदियों को निर्जल स्थान बना देता हूं; जल के अभाव में उनकी मछलियां गन्धाने लगती हैं और प्यासी मर जाती है।

3मैं अन्धकार को आकाश का वस्त्र और टाट को उसका ओढ़ना बनाता हू।”

4प्रभु यहोवा ने मुझे शिष्य की जीभ दी है कि मैं थकितों को अपने वचन से सम्भालना जानूंं प्रतिदिन भोर को वह मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनू।

5प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और न तो मैं अनाज्ञाकारी हुआ और न ही पीछे हटा।

6मैंने पीटने वालों की ओर अपनी पीठ और दाढ़ी नोचने वालों की ओर अपने गाल कर दिए; अपमानित करने और थूकने वालों से मैंने अपना मुख न छिपाया।

7क्योंकि प्रभु यहोवा मेरी सहायता करता है, इसलिए मैं अपमानित न हुआ, और इसलिए मैंने अपना माथा चकमक के समान कड़ा किया, क्योंकि मुझे निश्चय है कि मुझे लज्जित न होना पड़ेगा।

8जो मुझे निर्दोष ठहराता है वह मेरे निकट है, अतः मुझसे कौन मुकद्दमा लड़ेगा? आओ, हम एक दूसरे का सामना करें! मेरा विरोधी कौन है? वह मेरे सामने आए!

9देखो, प्रभु यहोवा ही मेरा सहायक है। कौन है जो मुझे दोषी ठहराएगा? देखो, वे सब वस्त्र के समान पुराने हो जाएंगे, उनको कीड़े खा जाएंगे।

10तुम में कौन है जो यहोवा का भय मानता हो, और उसके दास की बातों का पालन करता हो, जो प्रकाश के बिना अन्धकार में चलता हो? वह यहोवा के नाम पर भरोसा रखे और अपने परमेश्वर पर आस लगाए रहे।

11देखो, तुम सब जो आग जलाते, जो अपने आपको जलती लकड़ियों से घेर लेते हो, अपनी आग की ज्योति में चलो और जिन लकड़ियों को तुमने धधकाया है उन्हीं के मध्य चलो। मेरे हाथ से तो तुम्हें यही मिलेगाः तुम संकट में पड़े रहोगे।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)