पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 49 / 66
यशायाह 49
1हे द्वीपो, मेरी सुनो, और दूर-दूर देश के लोगो, ध्यान दो। यहोवा ने मुझे गर्भ से ही बुलाया, जब मैं मां के पेट में था तभी उसने मेरा नाम बताया।
2उसने मेरे मुंह को तेज तलवार के समान बताया, अपने हाथ की आड़ में मुझे छिपा रखा है, और मुझे विशेष तीर बनाकर अपने तरकश में छिपा लिया है।
3उसने मुझसे कहा, “तू मेरा दास इस्राएल है, मैं तुझमें अपनी महिमा प्रकट करूंगा।”
4परन्तु मैंने कहा, “मैंने तो व्यर्थ परिश्रम किया, मैंने अपना बल व्यर्थ ही खो दिया है; फिर भी मेरा न्याय तो यहोवा के पास और मेरे परिश्रम का फल परमेश्वर के हाथ में ही है।”
5यहोवा ने मुझे गर्भ ही से इसलिए रचा कि मैं उसका दास होकर याकूब को उसकी ओर फेर लाऊं, जिससे कि इस्राएल उसके पास इकट्ठा हो सके-क्योंकि यहोवा की दृष्टि में मैं आदरयोग्य ठहरा हूं, और मेरा परमेश्वर मेरा बल है-
6वह अब यों कहता हैः “यह तो एक हल्की-सी बात है कि तू याकूब के गोत्रों का उद्धार करने इस्राएल के बचाए हुए लोगों को लौटा ले आने के लिए मेरा दास ठहरे। मैं जाति-जाति के लोगों के लिए तुझे ज्योति भी ठहराऊंगा जिससे कि मेरा उद्धार पृथ्वी के छोर-छोर तक पहुंच जाए।”
7हे! तू जो तुच्छ जाना जाता, जो जातियों की दृष्टि में घृणित है और शासकों का दास है, इस्राएल का छुड़ाने वाला और उसका पवित्र, अर्थात् यहोवा तुझसे यों कहता हैः “राजा तुझे देखकर उठ खड़े होंगे, और शासक दण्डवत् करेंगे। यह यहोवा के कारण होगा जो विश्वसनीय है और इस्राएल का पवित्र है और जिसने तुझे चुन लिया है।”
8यहोवा यों कहता हैः “अपनी कृपा के समय मैंने तेरी सुन ली, उद्धार करने के दिन मैंने तेरी सहायता की है। मैं तेरी रक्षा करके तुझे लोगों के लिए एक वाचा ठहराऊंगा कि तू देश को सुधारे और उनकी उजड़ी हुई मीरास को फिर से उनका निज भाग होने के लिए उन्हें दिला दे,
9और बन्दियों से कहे, कि वे निकल आएं, और उनसे जो अन्धियारे में हैं, कि वे प्रकट हो जाए। तब मार्गों के किनारे ही वे पेट भरेंगे और प्रत्येक नंगे टीले पर उनको चराई मिलेगी।
10वे न तो भूखे होंगे और न प्यासे, न उन्हें झुलसाने वाली धूप या लू से कुछ हानि होगी, क्योंकि जिसने उन पर तरस खाया है वही उनकी अगुवाई करेगा और उन्हें जल के सोतों के पास ले जाएगा।
11मैं अपने सब पर्वताें को मार्ग बना दूंगा, और मेरे राजमार्ग ऊंचे किए जाएंगे।
12देखो, ये दूर-दूर से आएंगे-कुछ उत्तर से, कुछ पश्चिम से, और कुछ सिनीम देश से।”
13हे आकाश, ऊंचे स्वर से आनन्द मना! और हे पृथ्वी, मग्न हो! हे पर्वतो, गला फाड़कर जय-जयकार करो! क्योंकि यहोवा ने अपनी प्रजा को शान्ति दी है, और वह अपने दीन लोगों पर दया करेगा।
14परन्तु सिय्योन ने तो कहा है, “यहोवा ने मुझे त्याग दिया है, प्रभु ने मुझे भुला दिया है।”
15“क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दुधमुंहे बच्चे को भूल जाए या कोई अपने ही गर्भ से जन्मे पुत्र पर दया न करे? चाहे ये भूल जाएं तो भूल जाएं, परन्तु मैं तुझे नहीं भूलूंगा।
16देख, मैंने तेरा नाम अपनी हथेली पर खोद कर लिख लिया है; तेरी शहरपनाह निरन्तर मेरे सामने है।
17तेरे वंशज फुर्ती से आ रहे हैं; तेरे विनाशक और उजाड़ने वाले तेरे पास से चले जाएंगे।
18अपनी आंखें उठाकर चारों ओर देखः वे सबके सब इकट्ठे होकर तेरे पास आ रहे है।” यहोवा की वाणी है, “मेरे जीवन की शपथ, निश्चय तू उन सबको आभूषण के समान पहन लेगी, और उन्हें दुल्हन के सदृश धारण करेगी।
19तेरे जो स्थान बंजर और निर्जन हैं और तेरा जो देश उजाड़ पड़ा है उनमें अब निवासियों की बहुतायत के कारण वे न समाएंगे और तुझको नष्ट करने वाले दूर हो जाएंगे।
20जिन बच्चों के कारण तू शोकित थी, वे फिर तेरे कानों में कहने पाएंगे, ‘यह स्थान मेरे लिए छोटा है-मेरे लिए और स्थान तैयार कर कि मैं रहने पाऊ।’
21तब तू अपने मन में कहेगी, ‘इनको किसने मेरे लिए उत्पन्न किया? मैं तो निस्सन्तान हो गई थी। मेरी कोख बन्द हो चुकी थी। मैं निर्वासित थी और यहां-वहां भटकती-फिरती थी, तो फिर इनको किसने पाला? देखो, मैं अकेली छोड़ दी गई थी, तो फिर ये सब कहां से आ गए?”
22प्रभु यहोवा यों कहता हैः “देखो, मैं अपना हाथ उठाकर जाति-जाति के लोगों को संकेत करूंगा और देश-देश के लोगों के सामने अपना झंडा खड़ा करूंगा, और वे तेरे पुत्रों को अपनी-अपनी गोद में लिए आएंगे, और तेरी पुत्रियों को अपने कन्धों पर चढ़ाकर ले आएंगे।
23राजा तेरी देखभाल करने वाले होंगे, और उनकी राजकुमारियां तेरी धाइयां होंगी। वे भूमि तक झुककर तुझे दण्डवत् करेंगे और तेरे पैरों की धूल चाटेंगे। तब तू यह जान लेगी कि मैं ही यहोवा हू। जो आशा रखकर मेरी बाट जोहेंगे वे कभी लज्जित न होंगे।”
24क्या शूरवीर के हाथ से शिकार छीना जा सकता है? अथवा अत्याचारी के हाथ से बन्धुवे छुड़ाए जा सकते हैं?
25यहोवा तो यों कहता हैः “वीर के भी बन्धुवे उससे ले लिए जाएंगे, तथा अत्याचारी के हाथ से शिकार छुड़ा लिया जाएगा, क्योंकि जो तुझसे लड़ते हैं मैं उनसे लड़ूंगा, और मैं तेरे पुत्रों को बचाऊंगा।
26मैं तुझ पर अत्याचार करने वालों को उन्हीं का मांस खिलाऊंगा, और वे अपना ही लहू पीकर ऐसे मतवाले होंगे जैसे नए दाखमधु से होते है। तब सब प्राणी समझ जाएंगे कि तेरा उद्धारकर्ता और तेरा छुड़ाने वाला, हां, याकूब का सामर्थी, मैं यहोवा ही हू।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)