पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 48 / 66
यशायाह 48
1“हे याकूब के घराने के लोगो, तुम जो इस्राएल के नाम से पुकारे जाते हो, जो यहूदा के मूल से उत्पन्न हुए, जो यहोवा के नाम की शपथ खाते और इस्राएल के परमेश्वर से प्रार्थना करते तो हो परन्तु सच्चाई और धार्मिकता से नहीं, सुनो!
2वे तो अपने आपको पवित्र नगर का बतलाते हैं और इस्राएल के परमेश्वर का सहारा लेते हैं, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है।
3पिछली बातों को तो मैंने बहुत पहले से ही बता दिया था, वे मेरे मुख से निकलीं, मैंने उनकी घोषणा की, फिर उनको तुरन्त कर भी डाला, और वे पूरी हुईं।
4मैं जानता था कि तू हठी है और तेरी गर्दन की नसें लोहे की हैं और तेरा माथा कांसे का है,
5इसलिए इन बातों को मैंने पहले से ही तुझे बता दिया, उनके होने से पहले ही मैंने तुझे बता दिया था, ऐसा न हो कि तू कहने पाए, ‘यह मेरे देवता का काम है, मेरी खुदी हुई और ढली हुई मूर्ति की आज्ञा से यह सब हुआ है।’
6तूने सुना है, अतः सब पर ध्यान दे। क्या तुम इसका प्रचार न करोगे? अब से मैं तुझे नई-नई और ऐसी गुप्त बातें बताऊंगा जिन्हें तू नहीं जानता।
7वे अभी-अभी सृजी गई हैं, प्राचीनकाल से नही। आज से पहले तूने उन्हें सुना भी न था, कहीं तू यह न कहने पाए, ‘देख, मैं तो इन्हें जानता था।
8परन्तु न तो तूने सुना और न ही जाना। तेरे कान प्राचीनकाल से ही खुले न थे। मैं तो जानता था कि तू कपटपूर्ण व्यवहार करेगा। गर्भ से ही तू विद्रोही कहलाया।
9अपने ही नाम के कारण मैं कोप करने में विलम्ब करता हूं, और अपनी महिमा के कारण अपने आपको रोक रखता हूँ, ऐसा न हो कि मैं तुझे मिटा डालू।
10देख, मैंने तुझे शुद्ध तो किया है परन्तु चांदी के समान नहीं; मैंने दुख की भट्ठी में तुझे परख लिया है।
11अपने निमित्त, हां, अपने ही निमित्त मैं यह करूंगा। मेरा नाम क्योंकर अपवित्र ठहरे? मैं अपनी महिमा दूसरे को नहीं दूंगा।
12“हे याकूब, हे मेरे बुलाए हुए इस्राएल, मेरी सुन। मैं वही हूं, मैं ही आदि और मैं ही अन्त हू।
13निश्चय मेरे ही हाथ ने पृथ्वी की नींव डाली, और मेरे दाहिने हाथ ने आकाश के गणों को फैलाया। जब मैं उनको बुलाता हूं तो वे एक साथ आ खड़े हो जाते है।
14तुम सब इकट्ठे होकर सुनो! उनमें से किसने इन बातों की घोषणा की? यहोवा उससे प्रेम करता है। वह बेबीलोन पर अपनी भली इच्छा पूरी करेगा, हां, कसदियों के विरुद्ध उसका हाथ उठेगा।
15मैंने हां, मैंने ही कहा, मैंने ही उसको बुलाया है। मैं उसको ले आया हूं और वह अपने मार्गों में सफल होगा।
16मेरे निकट आकर इस बात को सुनोः आदि से लेकर अब तक मैंने कोई बात गुप्त में नहीं कही, जब से यह हुआ तब से मैं वहां था।” और अब प्रभु यहोवा और उसके आत्मा ने मुझे भेजा है।
17तेरा छुड़ाने वाला, इस्राएल का पवित्र अर्थात् यहोवा यों कहता हैः “मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिए शिक्षा देता हूं और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग से तुझे ले चलता हू।
18भला होता कि तूने मेरी आज्ञाओं पर ध्यान दिया होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरी धार्मिकता समुद्र की लहरों के समान होती,
19तेरा वंश बालू के समान होता और तेरी निज सन्तान उसके कणों के तुल्य होती, तथा उनका नाम मेरी उपस्थिति से न कभी काटा और न ही मिटाया जाता।”
20बेबीलोन से निकल जाओ! कसदियों के मध्य से भाग जाओ! जय-जयकार करते हुए इस बात का प्रचार करके सुनाओ, पृथ्वी के छोर-छोर तक इसकी चर्चा फैलाओ, कहोः “यहोवा ने अपने दास याकूब को छुड़ा लिया है।”
21जब वह उन्हें मरुभूमि में से ले गया तब वे प्यासे न हुएः उसने उनके लिए चट्टान में से पानी बहाया, उसने चट्टान को चीरा और जल बह निकला।
22“दुष्टों के लिए कोई शान्ति नहीं,” यहोवा का यही वचन है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)