पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 47 / 66
यशायाह 47
1“हे बेबीलोन की कुंवारी पुत्री, नीचे उतरकर धूल पर बैठ! हे कसदियों की पुत्री, तू बिना सिंहासन भूमि पर बैठ! क्योंकि अब से तू कोमल और सुकुमारी न कहलाएगी।
2चक्की लेकर आटा पीस। अपना घूंघट हटा और घाघरा समेट ले और उघाड़ी टांगों से नदियों को पार कर।
3तेरी नग्नता उघाड़ी जाएगी और तेरी लज्जा प्रकट होगी। मैं बदला लूंगा और किसी मनुष्य को न छोड़ूंगा।”
4हमारे छुटकारा देने वाले का नाम सेनाओं का यहोवा और इस्राएल का पवित्र है।
5“हे कसदियों की पुत्री, चुपचाप बैठ और अंधियारे में जा, क्योंकि अब से तू राज्य-राज्य की रानी न कहलाएगी।
6मैं अपनी प्रजा से क्रोधित था। मैंने अपने निज भाग को अपवित्र ठहराया और तेरे हाथ में सौंप दिया। तूने उन पर कुछ दया न की, बूढ़ों पर तूने अपना जूआ अत्यन्त भारी कर दिया।
7फिर भी तूने कहा, ‘मैं सर्वदा रानी बनी रहूंगी।’ अतः न तो तूने इन बातों पर विचार किया और न ही यह स्मरण रखा कि इनका अन्त क्या होगा।
8“अब हे कामुक, सुन, तू जो निश्चिन्त रहती है और अपने मन में कहती है, ‘मैं ही हूं और मुझे छोड़ कोई दूसरी नही। न तो मुझे विधवा के समान बैठना पड़ेगा और न बाल-बच्चों का मर-मिटना देखना होगा।’
9परन्तु ये दोनों अर्थात् बाल-बच्चों का मर-मिटना और तेरा विधवा हो जाना एक ही दिन तुझ पर अचानक आ पडें़़गे। तेरे बहुत-से जादू-टोनों और तेरे भारी तंत्र-मंत्रें के होते हुए भी ये विपत्तियां तुझ पर पूरे बल से आ पड़ेंगी।
10तूने अपनी दुष्टता में अपने आप को सुरक्षित समझ कर कहा, ‘मुझे कोई नहीं देखता।’ तेरी बुद्धि और तेरे ज्ञान ने तुझे बहकाया है, क्योंकि तू ने अपने मन में सोचा, ‘मैं ही हूं, मेरे अतिरिक्त कोई नही।’
11परन्तु तुझ पर ऐसा संकट आ पड़ेगा जिसका मंत्र तक तू नहीं जानती, ऐसी विपत्ति आ पड़ेगी कि तू प्रायश्चित्त करके भी उसका निवारण न कर सकेगी, ऐसा विनाश अचानक आ पड़ेगा जिसका तुझे कुछ भी पता नहीं है।
12“अपने तंत्र-मंत्र और उन बहुत सारे जादू-टोनों का जिनका तूने बाल्यावस्था से अभ्यास किया था उपयोग कर। सम्भव है कि तू उनसे लाभ उठा सके, कदाचित् तू उनसे आतंकित कर सके।
13तू अपने अनेक सम्मति देने वालों से थक गई है। अब तेरे ज्योतिषी, जो नक्षत्रें को देखकर भविष्य बताते और नए चाँद देखकर नबूवत करते हैं, खड़े होकर तुझे उन बातों से बचाएं जो तुझ पर आ पड़ेंगी।
14देखो, वे खूटी के समान हो गए, आग ने उन्हें भस्म कर दिया है। वे ज्वाला के प्रकोप से अपने आपको न बचा सकेंगे। तामने के लिए एक भी अंगारा न बचेगा, यह ऐसी आग नहीं होगी जिसके पास कोई बैठ सके!
15वे सब तेरे लिए ऐसे ही हो जाएंगी जिनके लिए तू परिश्रम करती आई है। जो तेरी जवानी से तेरे साथ व्यापार करते आए हैं, उनमें से प्रत्येक ने अपनी ही राह ली है। अब तुझे बचाने वाला कोई न रहा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)