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पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 46 / 66

यशायाह 46

1बेल देवता झुक गया, नबो नतमस्तक हो गया, उनकी प्रतिमाएं पशुओं और मवेशियों पर लदी है। जिसको तुम उठाए फिरते हो, वह अब भारी बोझ बन गया है, हां, थकाने वाला बोझ।

2वे नतमस्तक हुए, वे सब झुक गए; वे उस भार को छुड़ा नहीं सके, परन्तु आप ही बन्धुवाई में चले गए है।

3“हे याकूब के घराने, हां, इस्राएल के घराने के शेष बचे हुए सब लोगो, मेरी सुनोः मैं तुम्हें गर्भ से ही उठाए और जन्म से ही लिए फिरा हू।

4तुम्हारे बुढ़ापे में भी मैं वैसा ही बना रहूंगा, और तुम्हारे बाल पकने के समय तक तुम्हें उठाए रहूंगा। मैंने ही तुम्हें बनाया और मैं तुम्हें लिए फिरूंगा। मैं तुम्हें उठाए रहूंगा और छुड़ाता रहूंगा।

5“तुम मेरी उपमा किससे दोगे और मुझे किसके समान बताओगे तथा किससे मेरी तुलना करोगे कि हम एक समान ठहरें?

6जो थैली का सोना बिथराते और चांदी को कांटे पर तोलते हैं, वे सुनार को मजदूरी देकर उससे देवता बनवाते हैं, फिर उसे दण्डवत् करके उसकी उपासना करते है।

7वे उसे कन्धे पर उठाकर लिए फिरते हैं, वे उसे उसके स्थान पर रख देते हैं और वह वहीं खड़ा रहता है। वह अपने स्थान से हिल नहीं सकता। यदि कोई उसकी दुहाई भी दे, वह उसे उत्तर नहीं दे सकता, न ही उसे विपत्ति से छुड़ा सकता है।

8“हे अपराधियो, इस बात को स्मरण करो, इस पर ध्यान दो और अपना मन लगाओ।

9प्राचीनकाल की बातें स्मरण करो जो आरम्भ ही से हैं, क्योंकि मैं ही परमेश्वर हूँ, अन्य कोई नही। मैं ही परमेश्वर हूँ, और मेरे तुल्य कोई नहीं है।

10मैं अन्त की बात आदि से और जो बातें अब तक नहीं हुईं उन्हें प्राचीनकाल से बताता आया हू। मैं कहता हूं कि मेरी योजना स्थिर रहेगी और मैं अपनी भली इच्छा पूरी करूंगा।

11मैं पूर्व दिशा से एक उकाब को, अर्थात् दूर देश से अपनी योजना को पूरी करने वाले एक पुरुष को बुलाता हूँ। निश्चय मैंने यह कहा है और मैं ही इसे पूरा करूंगा। मैंने ही यह योजना बनाई है और निश्चय ही इसे पूरी करूंगा।

12“हे हठीले मन वालो, तुम जो धार्मिकता से दूर हो, मेरी सुनो!

13मैं अपनी धार्मिकता को निकट लाने पर हूँ, वह दूर नहीं है। उद्धार करने में मैं विलम्ब न करूंगा। मैं सिय्योन को उद्धार, हां, इस्राएल को अपनी महिमा दूंगा।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)