पुराना नियम · यशायाह · अध्याय 56 / 66
यशायाह 56
1यहोवा यों कहता हैः “न्याय को बनाए रखो और धार्मिकता के कार्य करो, क्योंकि मेरा उद्धार आने वाला है और मेरी धार्मिकता प्रकट होने वाली है।
2क्या ही धन्य है वह व्यक्ति जो ऐसा करता, हां, वह मनुष्य जो इसका पालन करता है, जो सब्त को अपवित्र करने से बचा रहता है, और अपने हाथ को सब तरह की बुराई करने से रोकता है।”
3जो परदेशी यहोवा का भक्त हो गया है वह यह न कहे, “यहोवा मुझे निश्चय ही अपनी प्रजा से अलग करेगा।” न ही खोजा यह कहे, “देखो, मैं तो एक सूखा वृक्ष हू।”
4यहोवा यों कहता हैः “जो खोजे मेरे सब्तों को मानते और वही करते हैं जो मुझे भाता है और मेरी वाचा का दृढ़ता से पालन करते हैं,
5मैं उन्हें अपने भवन और अपनी शहरपनाह में एक स्मारक, और एक ऐसा नाम दूंगा जो पुत्र और पुत्रियों से उत्तम होगा, मैं उनको सदा का एक ऐसा नाम दूंगा जो मिटाया न जाएगा।
6“वे परदेशी भी जो यहोवा के भक्त इस अभिप्राय से बन जाते हैं कि उसकी सेवा करें और यहोवा के नाम से प्रीति रखें और उसके दास हो जाएं, अर्थात् वे सब जो सब्त को अपवित्र करने से बचे रहते हैं और मेरी वाचा का दृढ़ता से पालन करते हैं,
7उनको मैं अपने पवित्र पर्वत पर ले आऊंगा और अपने प्रार्थना के जीवन में आनन्दित करूंगा। उनके होमबलि और मेलबलि मेरी वेदी पर ग्रहण किए जाएंगे; क्योंकि मेरा भवन सब जातियों के लिए प्रार्थना का भवन कहलाएगा।”
8प्रभु यहोवा, जो इस्राएल के बिखरे हुओं को इकट्ठा करता है, वह यों कहता हैः “जो पहले से ही इकट्ठे किए हुए हैं उनके साथ मैं औरों को भी मिला दूंगा।”
9हे मैदान के सब पशुओं, हे वन के सब जानवरों, आकर फाड़ खाओ!
10उसके पहरेदार अन्धे हैं, वे सबके सब कुछ भी नहीं जानते। वे सभी ऐसे गूंगे कुत्ते हैं जो भौंक नहीं सकते। वे लेटे रहकर स्वप्न देखने और नींद से प्रीति रखने वाले है।
11ये कुत्ते लालची हैं, ये कभी तृप्त नहीं होते। ये ऐसे चरवाहे हैं जिनमें समझ ही नही। सबने अपना-अपना मार्ग लिया, उनमें से प्रत्येक अपने ही लाभ के लिए अधर्म की कमाई में जुट गया।
12वे कहते हैं, “आओ, हम मदिरा ले आएं और अत्यधिक पीकर छक जाएं, और कल का दिन भी आज के समान वरन् और भी सुहावना होगा।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)