पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 22 / 52
यिर्मयाह 22
1यहोवा यों कहता है, “यहूदा के राजा के भवन में जाकर यह वचन कह,
2“हे यहूदा के राजा, तू, जो दाऊद के सिंहासन पर विराजमान है, तू, तेरे कर्मचारी और तेरे सब लोग जो इन फाटकों से प्रवेश करते हैं, यहोवा का यह वचन सुने।
3यहोवा यों कहता है, “न्याय और धार्मिकता के कार्य करो और लुटे हुए मनुष्य को उस पर अत्याचार करने वाले के वश से छुड़ाओ। परदेशी, अनाथ और विधवा पर अन्धेर व उपद्रव मत करो और इस स्थान पर निर्दोष का लहू मत बहाओ।
4यदि तुम वास्तव में ऐसा करोगे तो इस भवन के फाटकों से राजा प्रवेश करेंगे और दाऊद के स्थान पर सिंहासन पर बैठेंगे। इस प्रकार स्वयं राजा, उसके सेवक और उसके लोग रथों और घोड़ों पर सवार होकर आया-जाया करेंगे।’
5यहोवा यों कहता है; ‘परन्तु यदि तुम इन वचनों का पालन नहीं करोगे, तो मैं अपनी ही सौगंध खाकर कहता हूं कि यह भवन उजड़ जाएगा।”’
6यहूदा के राजा के घराने के सम्बन्ध में यहोवा यों कहता है, “तू मेरे लिए गिलाद के समान और लेबनोन के शिखर के समान है; फिर भी निश्चयपूर्वक मैं तुझे बंजर भूमि और निर्जन नगरों के समान बना डालूंगा।
7क्योंकि मैं तेरे विरफ़द्ध नाश करने वालों को भेजूंगा और प्रत्येक जन हथियार लिए होगा; और वे तेरे उत्तम से उत्तम देवदारों को काट डालेंगे और उन्हें आग में झोंक देंगे।
8और जातियों के लोग इस नगर से होकर निकलेंगे और वे एक-दूसरे से कहेंगे, ‘यहोवा ने इस बड़े नगर की दशा ऐसी क्यों कर दी है?’
9तब वे उन्हें उत्तर देंगे, ‘इसका कारण यह है कि उन्हाेंने अपने परमेश्वर यहोवा की वाचा को त्यागकर अन्य देवताओं को दण्डवत् किया और उनकी उपासना की।”’
10मरे हुए के लिए मत रोओ और न उनके लिए विलाप करो, पर उसके लिए लगातार रोओ जो चला जाता है; क्योंकि वह फिर कभी लौटकर नहीं आएगा, न अपने देश को देखेगा।
11क्योंकि यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र शल्लूम के विषय में जो अपने पिता योशिय्याह के स्थान पर राजा बना और जो इस स्थान से निकल गया, यहोवा यों कहता है, “वह फिर कभी नहीं लौटेगा,
12वह उसी स्थान में मर जाएगा जहां वे उसे बन्धुवा बनाकर ले गए और फिर इस देश को नहीं देखेगा।
13“उस पर हाय जो अपना घर अधर्म से और अपनी ऊपरी मंजिलें अन्याय से बनाता है; जो अपने पड़ोसी से बेगारी में काम कराता है और उसको उसकी मजदूरी नहीं देता।
14वह कहता है, ‘मैं अपने लिए लम्बा-चौड़ा घर और ऊपरी मंजिल को बड़ी और हवादार बनाऊंगा और कमरों को देवदार की लकड़ियों से पाटकर लाल रंग से रगूंगा।’
15क्या तू इस कारण राजा बना है कि तेरे पास देवदार अधिक हैं? क्या तेरा पिता खाता-पिता, और न्याय और धार्मिकता के काम नहीं किया करता था? जिससे वह सुखी था।”
16यहोवा यों कहता है, “उसने सताए हुओं और दरिद्रों का न्याय चुकाया इसीलिए वह सुखी रहा। क्या ऐसा करना ही मुझे जानना नहीं है?
17परन्तु तेरी आंखें और तेरा हृदय तो बेईमानी से अपने लिए केवल लाभ कमाने, निर्दोष का लहू बहाने, अत्याचार के कार्य करने और लूटने-खसोटने पर ही लगे हुए है।”
18इस कारण यहूदा के राजा योशिय्याह के पुत्र यहोयाकीम के विषय में यहोवा यह कहता है, “वे उसके लिए इस प्रकार विलाप नहीं करेंगे, ‘हाय मेरे भाई, हाय मेरी बहन!’ न ही वे उसके लिए इस प्रकार विलाप करेंगे, ‘हाय मेरे स्वामी, हाय तेरा वैभव!’
19उसका गाड़ा जाना गदहे के समान होगा अर्थात् वह घसीट कर यरूशलेम के फाटक से बाहर फेंक दिया जाएगा।
20लेबनोन पर चढ़कर और बाशान पहुंच कर ऊंचे स्वर से चिल्ला, अबारिम से भी चिल्ला क्योंकि तेरे सब प्रेमी नष्ट हो गए है।
21जब तू भरी-पूरी थी मैंने तुझसे बातें की। परन्तु तूने कहा ‘मैं न सुनूंगी।’ जवानी के दिनों से ही तेरा यही व्यवहार रहा है कि तूने मेरी बात न मानी।
22वायु तेरे सब चरवाहों को उड़ा ले जाएगी। तेरे प्रेमी बन्दी बना दिए जाएंगे। तब तू अपनी दुष्टता के कारण लज्जित होगी और तेरा मुंह काला होगा।
23हे लेबनोन के देवदार पर बने घोंसले में रहने वाली, जब तुझे प्रसव की पीड़ाएं उठेंगी तो तू कराह उठेगी उस स्त्री के समान जो जच्चा की पीड़ा से पीड़ित हो।
24“मेरे जीवन की सौगंध” यहोवा कहता है, “यहूदा का राजा यहोयाकीम का पुत्र कोन्याह चाहे मेरे दाहिने हाथ की अंगूठी ही क्यों न होता फिर भी मैं उसे निकाल फेंकता;
25और मैं तुझे उनके हाथ में कर दूंगा जो तेरे प्राण की खोजी हैं, हां, उनके हाथ में जिनसे तू भयभीत होता है, यहां तक कि बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर और कसदियों के हाथ में कर दूंगा।
26मैं तुझे और तेरी माता को जिससे तू उत्पन्न हुआ ऐसे देश में जो तुम्हारी जन्मभूमि नहीं है, फेंक दूंगा और तुम वहीं मरोगे।
27परन्तु जिस देश में लौटने की वे बड़ी लालसा करते हैं वहां नहीं लौट पाएंगे।
28क्या यह मनुष्य कोन्याह एक तुच्छ और टूटा हुआ पात्र है? क्या वह एक ऐसा पात्र है जिसे कोई नहीं चाहता? फिर वह और उसके वंशज क्यों एक ऐसे देश में फेंक दिए गए जिसे वे नहीं जानते थे।
29हे देश, देश, देश यहोवा का वचन सुन!
30यहोवा यों कहता है, ‘इस मनुष्य को निर्वंश लिखो, ऐसा मनुष्य जो अपने जीवनकाल में सम्पन्न नहीं होगा, क्योंकि इसके वंश का कोई भी पुरफ़ष दाऊद के सिंहासन पर बैठकर अथवा पुनः यहूदा का शासक बन कर सम्पन्न नहीं होगा।’”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)