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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 25 / 52

यिर्मयाह 25

1योशिय्याह के पुत्र यहूदा के राजा यहोयाकीम के राज्य के चौथे वर्ष अर्थात् बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर के राज्य के पहले वर्ष में यहूदा के सब लोगों के सम्बन्ध में यिर्मयाह के पास यह वचन पहुंचा,

2जिसे यिर्मयाह नबी ने यहूदा के सब लोगों और यरूशलेम के सब निवासियों को इस प्रकार सुनाया,

3“आमोन के पुत्र यहूदा के राजा योशिय्याह के राज्य के तेरहवें वर्ष से लेकर आज के दिन तक अर्थात् इन तेईस वर्षों से यहोवा का वचन मेरे पास पहुंचता आया है जिसे मैंने तुम्हें बार-बार सुनाया परन्तु तुमने नहीं सुना।

4यघपि तुमने यहोवा के दास नबियों की न तो सुनी और न उनकी बात पर कान लगाया फिर भी वह उन्हें तुम्हारे पास यह कहने के लिए बार-बार भेजता आया है कि

5अपनी-अपनी बुरी चाल और अपने-अपने बुरे कामों से फिरो और उस देश में बसे रहो जिसे यहोवा ने तुमको और तुम्हारे पूर्वजों को युग-युगान्तर के लिए दिया है।

6और अन्य ईश्वरों के पीछे चलकर न तो उनकी उपासना करो और न उन्हें दण्डवत् करो, और अपने हाथ के कार्यों से मुझे क्रोध न दिलाओ, तब मैं तुम्हें कुछ हानि न पहुंचाऊंगा।”

7यहोवा कहता है, “फिर भी तुमने मेरी न सुनकर अपने हाथों के कार्यों से मुझे क्रोध दिलाया जिससे तुम्हारी ही हानि हुई।

8इसलिए सेनाओं का यहोवा यों कहता है, ‘तुमने जो मेरे वचन नहीं माने,

9देखो, मैं उत्तर में रहने वाले सब कुलों को बुला भेजूंगा, और मैं अपने दास बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर को इस देश के, इसके निवासियों के, और उन सब जातियों के विरफ़द्ध जो इसके आस-पास रहते हैं बुला भेजूंगा, और मैं इनको पूर्णतः नष्ट कर डालूंगा और उनको घृणा और ठट्ठे का कारण बना डालूंगा और सदाकाल के लिए उन्हेंं उजाड़ दूंगा।’ यहोवा की यही वाणी है,

10‘इससे बढ़कर मैं इनसे हर्ष और आनन्द की वाणी, दूल्हा और दुलहन की वाणी, चक्की का शब्द तथा दीपक की ज्योति छीन लूंगा।

11और यह सम्पूर्ण देश उजाड़ और भयावह हो जाएगा और ये सब जातियां सत्तर वर्ष तक बेबीलोन के राजा के दासत्व में रहेंगी।

12“‘सत्तर वर्ष पूरे हो जाने पर मैं बेबीलोन के राजा और उस जाति को अर्थात् कसदियों के देश को उनके अधर्म के लिए दण्ड दूंगा, यहोवा की यह वाणी है, और मैं उसे सदाकाल के लिए उजाड़ डालूंगा।

13मैं उस देश पर अपने उन सब वचनों को पूरा करूंगा जो मैंने उसके विरफ़द्ध कहे और उन सब वचनों को भी जो इस पुस्तक में लिखे गए अर्थात् जिनकी यिर्मयाह ने सब जातियों के विरफ़द्ध नबूवत की है।

14बहुत सी जातियां और बड़े बड़े राजा उनको, हां उन्हंीं को दास बना डालेंगे; और मैं उनके कर्मों और उनके हाथ के कार्यों के अनुसार उनको बदला दूंगा।’”

15इस्राएल का परमेश्वर यहोवा मुझसे यों कहता है, “मेरे हाथ से रोष के दाखमधु का यह प्याला ले और उन सब जातियों को पिला जिनके पास मैं तुझे भेजता हू।

16और वे पीएंगे और उस तलवार के कारण जो मैं उनके मध्य भेजूंगा लड़खड़ाएंगे और उन्मत हो उठेंगे।”

17तब यहोवा के हाथ से मैंने वह प्याला ले लिया और उन सब जातियों को जिनके पास यहोवा ने मुझे भेजा था, पिला दिया।

18अर्थात् यरूशलेम और यहूदा के नगरों को तथा उनके राजाओं और अधिकारियों को जिससे वे उजड़ गए और घृणा, ठट्ठे तथा शाप का कारण बन गए जैसा कि आज तक है;

19मिश्र के राजा फि़रौन को, उसके कर्मचारियों, उच्चाधिकारियों और समस्त प्रजा को,

20सब विदेशियों, ऊज देश के सब राजाओं को, पलिश्तियों के देश के सब राजाओं यहां तक कि अश्कलोन, अज्जा और एक्रोन तथा अश्दोद के शेष बचे हुए सब लोगों को;

21एदोनियों, मोआबियों और अम्मोनियों,

22सूर और सीदोन के सब राजाओं और समुद्र पार के द्वीपों के सब राजाओं को;

23और देदानियों, तेमाइयों, बूजियों तथा उन सबको जो पृथ्वी के छोर-छोर पर हैं,

24और अरब देश तथा मरफ़स्थल में रहने वाली अन्य जातियों के सब राजाओं को;

25और जिम्री, एलाम और मादै के सब राजाओं;

26और क्या दूर क्या निकट, उत्तर के सब राजाओं को एक-दूसरे के साथ और इस जगत में धरती के ऊपर जितने भी राज्य हैं उन सब को भी पिलाया। इन सबके बाद शेषक के राजा को भी पीना पड़ेगा।

27“तब तू उनसे कहना; ‘सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यह कहता हैः पियो और उन्मत्त हो जाओ, वमन करो, उस तलवार के कारण जो मैं तुम्हारे मध्य भेजूंगा गिर पड़ो और कभी न उठो।’

28यदि वे तेरे हाथ से प्याला लेकर पीने से इनकार करें तो तू उनसे कहना, ‘सेनाओं का यहोवा कहता हैः तुम अवश्य पीओगे!

29क्योंकि, मैं इस नगर पर जो मेरे नाम से कहलाता है विपत्ति डालने वाला हूं, तो क्या तुम दण्ड पाने से पूर्णतः छूट जाओगे? तुम दण्ड से नहीं बचोगे, क्योंकि मैं पृथ्वी के सब निवासियों के विरफ़द्ध एक तलवार चलाने वाला हूं, सेनाओं के यहोवा की यह वाणी है।’”

30इसलिए तू उनके विरफ़द्ध इन सब बातों की नबूवत करके उनसे कहना,“यहोवा ऊंचे पर से गरज उठेगा, और अपने पवित्र धाम से अपनी वाणी सुनाएगा; अपनी भेड़शाला के विरफ़द्ध वह जोर से गरजेगा। वह दाख रौंदने वालों के समान धरती के सब निवासियों को ललकारेगा।

31पृथ्वी के छोर तक कोलाहल मच गया है, क्योंकि यहोवा का सब जातियों से विवाद है। वह सब प्राणियों का न्याय करने पर है। दुष्टों को तो उसने तलवार के वश कर दिया है।’ यहोवा की यही वाणी है।”

32सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “देखो, विपत्ति एक जाति से दूसरी जाति में फैल रही है, और पृथ्वी के अन्तिम छोर से एक भारी आंधी उठ रही है।

33उस दिन जो यहोवा द्वारा मारे जाएंगे वे पृथ्वी के एक छोर से दूसरे छोर तक पड़े होंगे। उनके लिए न तो विलाप किया जाएगा, न वे एकत्र कर दफनाए जाएंगे। वे कूड़े के समान भूमि पर पड़े रहेंगे।

34हे चरवाहो, विलाप करो और रोओ; झुंड के हे स्वामियो, तुम राख में लोटो, क्योंकि तुम्हारे वध होने और तितर-बितर होने के दिन आ पहुंचे हैं, और तुम एक चुने हुए पात्र के समान गिरकर चूर-चूर हो जाओगे।

35चरवाहों के भागने का और भेड़ों के झुंड के स्वामियों को बचने का कोई उपाय न रहेगा।

36चरवाहों के रोने का और झुंड के स्वामियों के विलाप का शब्द सुनो, क्योंकि यहोवा उनके चरागाह को नष्ट कर रहा है।

37शान्त चरागाह यहोवा के कोप के कारण सुनसान पड़ गए है।

38वह सिंह की भांति अपनी मांद से निकल पड़ा है क्योंकि अत्याचारी की क्रूरता के कारण और उसके भयंकर रोष के कारण उनका देश उजड़ गया है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)