पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 42 / 52
यिर्मयाह 42
1तब सेना के सब प्रधान, कारेह का पुत्र योहानान, होशायाह का पुत्र याजन्याह, छोटे से लेकर बड़े तक सब लोग
2यिर्मयाह नबी के पास आकर कहने लगेः “हमारी विनती ग्रहण कर और अपने परमेश्वर यहोवा से हमारे लिए अर्थात् हम शेष बचे हुओं के लिए प्रार्थना कर क्योंकि हम जो बहुत थे, थोड़े से बच गए हैं जिन्हें तू अपनी आंखों से देख रहा है।
3तेरा परमेश्वर यहोवा हमें बताए कि हम किस मार्ग पर चलें और क्या कार्य करे।”
4तब यिर्मयाह नबी ने उनसे कहा, “मैंने तुम्हारी सुन ली है, देखो, मैं तुम्हारे वचनों के अनुसार तुम्हारे यहोवा से प्रार्थना करूंगा और ऐसा होगा कि वह समस्त संदेश जो यहोवा तुम्हें उत्तर के रूप में देगा तुम्हें बताऊंगा और तुमसे एक भी बात न छिपाऊंगा।”
5तब उन्होंने यिर्मयाह से कहा, “यदि हम उस समस्त वचन के अनुसार कार्य न करें जिसे तेरा यहोवा परमेश्वर तेरे द्वारा हमें पहुंचाए तो यहोवा हमारे विरफ़द्ध सच्चा और विश्वासनीय साक्षी ठहरे।
6चाहे वह वचन मनोहर हो या बुरा, हम अपने परमेश्वर यहोवा की वाणी सुनेंगे जिसके पास हम तुझे भेज रहे हैं कि जब हम अपने परमेश्वर यहोवा की वाणी सुनें तो हमारा भला हो।”
7फिर दस दिन पश्चात् यहोवा का वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा,
8तब उसने कारेह के पुत्र योहानान को और सेना के सब अधिकारियों को जो उसके साथ थे, और छोटे से लेकर बड़े सब लोगों को अपने पास बुलाया,
9और उनसे कहा, “इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसके पास तुमने मुझे भेजा कि मैं उसके समक्ष तुम्हारी विनती प्रस्तुत करूं यह कहता हैः
10‘यदि तुम देश में ही बसे रहोगे तो मैं तुम्हें बनाए रखूंगा और नष्ट नहीं करूंगा, रोपे रखूंगा उखाडू़ंगा नहीं क्योंकि जो विपत्ति मैंने तुम पर डाली है उससे अपना हाथ रोकूंगा।
11बेबीलोन के राजा से मत डरो, जिससे तुम अभी डरते हो, यहोवा की वाणी है, ‘उससे मत डरो, क्योंकि तुम्हें उसके हाथों से छुड़ाने और बचाने के लिए मैं तुम्हारे साथ हू।
12मैं तुम पर तरस खाऊंगा जिससे वह भी तुम पर तरस खाएगा और तुम्हें फिर से तुम्हारे अपने देश में बसाएगा।
13परन्तु यदि तुम कहो कि हम इस देश में नहीं रहेंगे और अपने परमेश्वर यहोवा की बात न मानकर यह कहो,
14कि हम तो मिस्र देश में जाकर वहीं बसेंगे क्योंकि वहां हम न तो युद्ध देखेंगे, न तुरही की आवाज सुनेंगे और न भूखे मरेंगे।”
15तब तो हे यहूदा के बचे हुए लोगो यहोवा का वचन सुनोः इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “यदि तुम वास्तव में मिस्र में प्रवेश करने के लिए अपना मन लगाओ, और वहीं बसने जाओ
16तो ऐसा होगा कि जिस तलवार से तुम डरते हो वह तुम्हें वहीं मिस्र देश में जा पकड़ेगी और जिस अकाल से तुम चिंतित रहते हो वह मिस्र देश में तुम्हारे पीछे लगा रहेगा और तुम वहीं मर जाओगे।
17अतः वे सब जो मिस्र देश में जा बसने के लिए अपना मन लगाए। वे तलवार, अकाल और मरी से मरेंगे और उस विपत्ति से जो मैं उन पर डालने को हूं उनको बचाने वाला और शरण देने वाला कोई न होगा।”
18क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर, सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “जिस प्रकार मेरा क्रोध और कोप यरूशलेम के निवासियों पर भड़क उठा था उसी प्रकार यदि तुम मिस्र में जाओ तो मेरा कोप तुम पर भी भड़क उठेेगा। तुम तो शाप, घबराहट, कोसने और निन्दा का विषय बन जाओगे और इस स्थान को फिर कभी देखने न पाओगे।”
19हे यहूदा के बचे हुए लोगो, यहोवा ने तुमसे कहा है, “मिस्र मत जाओ।” यह निश्चय जान लो कि मैंने आज तुम्हें चेतावनी दी है।
20तुमने जो अपने आपको ही धोखा दिया है क्योंकि तुमने ही मुझे यह कहकर अपने परमेश्वर यहोवा के पास भेजा था, “हमारे परमेश्वर यहोवा से हमारे लिए प्रार्थना कर और जो कुछ हमारा परमेश्वर यहोवा कहे वही हम से कह और हम उसे मानेंगे।”
21अतः मैंने आज तुम्हें बता दिया परन्तु तुमने अपने यहोवा परमेश्वर की आज्ञा न मानी, यहां तक कि वे बातें भी न मानीं जिन्हें तुम्हें बताने को उसने मुझे भेजा।
22इस कारण अब यह निश्चय जान लो कि जिस स्थान में जाकर तुम बसना चाहते हो, उसी स्थान में तलवार, अकाल और मरी से मर मिटोगे।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)