पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 48 / 52
यिर्मयाह 48
1मोआब के विषय में सेनाओं का यहोवा इस्राएल का परमेश्वर यों कहता हैः “नबो पर हाय क्योंकि वह नष्ट कर दिया गया है; किर्यातैम लज्जित कर दिया गया है, वह जीत लिया गया है। ऊंचा गढ़ झुका दिया गया और तहस-नहस कर दिया गया है।
2मोआब की प्रशंसा अब नहीं होती; हेशबोन में उसके विरफ़द्ध उन्होंने हानि की युक्ति बनाई; ‘आओ हम उसे ऐसा सर्वनाश करें कि वह फिर एक राज्य न रहे!’ हे मदमेन, तू भी निर्जन कर दिया जाएगा और तलवार तेरे पीछे चलेगी।
3होरोनैम से चिल्लाहट का यह शब्द, ‘सर्वनाश और भयंकर विनाश हो गया है!’
4मोआब टूट गया है और उसके नन्हें बच्चों ने व्यथा की पुकार मचाई है।
5क्योंकि लूहीत की चढ़ाई वे लगातार रोते हुए चढ़ेंगे और होरोनैम की उतार में उन्होंने विनाश की हृदय-विदारक पुकार सुनी है।
6भागो, अपना प्राण बचाओ। जिससे कि तुम उस झाड़ी के समान बन जाओ जो मरफ़स्थल में होती है।
7क्योंकि तुझे अपनी उपलब्धियों और अपने ख़जानों पर भरोसा है इसलिए तू स्वयं ही बन्दी बना लिया जाएगा और कमोश देवता अपने पुरोहितों और सामन्तों सहित बन्धुवाई में चला जाएगा
8और एक विनाशक प्रत्येक नगर में आएगा कि कोई भी नगर बचा न रहे। यहोवा के वचन के अनुसार, प्रत्येक घाटी उजाड़ दी जाएगी, और प्रत्येक पठार भी नष्ट कर दिया जाएगा।
9मोआब के पंख लगा दो कि वह दूर उड़ जाए। और उसके नगर उजड़ जाएं और वह निर्जन हो जाए।
10“शापित है वह जो यहोवा का काम ढिलाई से करता है और वह भी शापित है जो अपनी तलवार को लहू बहाने से रोक कर रखता है।
11“मोआब बाल्यकाल से ही सुखी रहा है; उसकी तलछट में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हुई, वह एक बर्तन से दूसरे में उंडेला नहीं गया, वह बन्धुवाई में नहीं गया, इसलिए उसका स्वाद उसमें बना हुआ है और उसकी सुगन्ध ज्यों की त्यों है।
12“इसलिए देखो, वे दिन आ रहे हैं,” यहोवा की यह वाणी है, “जब मैं उसके पास उनको भेजूंगा जो बर्तनों को उलटते हैं और वे उसे उलट देंगे, उसके बर्तनों को खाली कर देंगे और उसके घड़ों को चकनाचूर कर डालेंगे।
13जिस प्रकार इस्राएल का घराना बेथ-एल से लज्जित हुआ था जिस पर उनका भरोसा था उसी प्रकार मोआब भी कमोश से लज्जित होगा।
14तुम कैसे कह सकते हो कि हम शूरवीर हैं, पराक्रमी योद्धा हैं?
15मोआब और उसके नगरों पर विनाशकारी चढ़ आया है। उसके चुने हुए जवान घात होने के लिए उतर आए है।” महाराजाधिराज जिसका नाम सेनाओ का यहोवा है उसकी यह वाणी है।
16मोआब का सर्वनाश निकट है, उसका संकट वेग से आ पहुंचा।
17तुम सब जो उसके आसपास रहते हो तुम सब भी जो उसकी कीर्ति से परिचित हो उसके लिए विलाप करो और कहो, ‘वह सामर्थी राजदण्ड, वह गौरवमय लाठी कैसी टूटी पड़ी है!’
18हे दीबोन की रहने वाली, तू अपने वैभव से उतरकर प्यासी भूमि पर बैठ, क्योंकि मोआब का विनाश करने वाला तेरे विरफ़द्ध चढ़ आया है, उसने तेरे दृढ़-गढ़ों को नष्ट कर दिया है।
19हे अरोएर की रहने वाली, तू मार्ग पर खड़ी होकर चौकसी कर, जो भागता है उससे पूछ और जो बच निकलती है उससे कह, “क्या हुआ है?”
20मोआब लज्जित कर दिया गया है क्योंकि वह चकनाचूर कर दिया गया है, विलाप करो और रोओ अर्नोन के किनारे घोषित करो कि मोआब का विनाश हो गया है।
21चौरस भूमि का न्याय हो चुका है अर्थात् होलोन, यहसा, मेपात,
22दीबोन, नबोबेत-दिबलातैम,
23किर्य्यातैम, बेतगामूल और बेतमोन,
24करिय्योत, बोस्रा और मोआब देश के अन्य सब नगरों का भी चाहे वे दूर हों या निकट।
25मोआब का सींग काट दिया गया है और उसकी भुजा तोड़ डाली गई है।” यहोवा की यही वाणी है।
26“उसको मतवाला करो, क्योंकि वह यहोवा के प्रति हठीला बन गया हैः अतः मोआब अपने ही वमन में लोटेगा और ठट्ठे का कारण भी बन जाएगा।
27क्या तेरी दृष्टि में इस्राएल भी ठट्ठों का कारण न बना था? अथवा क्या वह चोरों के मध्य पकड़ा गया था? क्योंकि जब भी तू उसके विषय में बोलता था अपना सिर तिरस्कार से हिलाया करता था।
28हे मोआब के निवासियों, अपने-अपने नगरों को छोड़कर चट्टान की दरारों में बस जाओ, और उस फाख़्ता के समान बनो जो खाई के मुहाने के एक ओर अपना घोंसला बनाता है।
29हमने मोआब के अभिमान के विषय में सुना है कि वह बहुत अभिमानी है, और उसके अहंकार, घमंड, दम्भ और गर्व से फूले हुए मन के विषय में भी।”
30यहोवा की यह वाणी है “मैं उसके रोष को जानता हूं कि यह व्यर्थ ही है, उसके डींग मारने से कुछ भी बन न पड़ा।
31इसीलिए मैं मोआब के लिए विलाप करूंगा यहां तक कि समस्त मोआब के लिए मैं रो उठूंगा, मैं कीर-हेरेस के निवासियों के लिए आहें भरूंगा।
32हे सिबमा की दाखलता, जितना याजेर के लिए रोया गया उससे भी अधिक मैं तेरे लिए रोऊंगा। तेरी डालियां तो समुद्र पार तक फैल गई हैं, वे याजेर की झील तक पहुंच गई हैं; ग्रीष्मकाल के तेरे फलों और दाख की तेरी फसल पर भी विनाश करने वाला टूट पड़ा है।
33अतः आनन्द करना और मग्न होना फलवन्त बारियों से, हां, मोआब के देश से ही छीन लिया गया है। और मैंने दाखरस के कुंडों से दाख को समाप्त कर डाला है, कोई उनमें ललकार कर न रौंदेगा और वह ललकार आनन्द की ललकार न होगी।
34हेशबोन की चिल्लाहट से लेकर एलाले और यहस तक फिर सोअर से होरोनैम और एग्लतशलीशिया तक उन्होंने अपनी आवाज उठाई है; क्योंकि निम्रीम का जल भी सूख गया है।”
35यहोवा की वाणी है, “जो कोई ऊंचे पर चढ़ावा चढ़ाता है और जो अपने देवताओं के लिए धूप जलाता है उन दोनों का मैं मोआब में से अन्त कर डालूंगा।
36“इसलिए मेरा मन मोआब के लिए बांसुरी के समान रो-रोकर अलापता है; मेरा मन कीर-हेरेस के लोगों के लिए भी बांसुरी के समान रो-रोकर अलापता है। इसलिए उन्होंने अपनी बहुतायत की कमाई को खो दिया है।
37क्योंकि प्रत्येक का सिर मुड़ा दिया गया है और प्रत्येक की दाढ़ी छांट दी गई है; सब के हाथों में घाव हैं और उनकी कमरों में टाट बंधा है।
38मोआब के सब घरों की छतों पर और उसकी गलियों में चारों ओर विलाप हो रहा है; क्योंकि मैंने मोआब को बेकार बरतन के समान तोड़ डाला है,” यहोवा की यह वाणी है।
39“वह कितना चूर-चूर हो गया। उन्होंने कितना विलाप किया है! मोआब ने कैसे अपनी पीठ फेर ली है-वह लज्जित है! अतः मोआब अपने चारों ओर के लोगोें के लिए ठट्टेðò और आतंक का कारण बनेगा।”
40क्योंकि यहोवा यों कहता है, “देखो, कोई उकाब के समान झपटेगा और अपने पंखों को मोआब के विरफ़द्ध फैलाएगा।
41करिय्योत ले लिया गया है और दृढ़ नगरों पर अधिकार कर लिया गया है, इसलिए उस दिन मोआब के शूरवीरों का मन जच्चा के मन के समान हो जाएगा।
42मोआब-नष्ट कर दिया जाएगा, वह जाति न रह पाएगी, क्योंकि वह यहोवा के सामने अहंकारी बन गया है।”
43यहोवा की यह वाणी है, “हे मोआब के निवासियो, आतंक, गड्हे और फंदे तुम पर आ रहे है।
44जो कोई आतंक से भागेगा वह गड्हे में गिर पड़ेगा, और जो गड्हे से बाहर निकलेगा वह फंदे में फंस जाएगा; क्योंकि मैं उस पर अर्थात् मोआब पर उनके दण्ड का समय ले आऊंगा,” यहोवा की यही वाणी है।
45“हेशबोन की छाया में भगोड़े निर्बल होकर खड़े हुए हैं, क्योंकि हेशबोन से एक आग और सीहोन के मध्य से एक लपट निकल पड़ी है, और उसने मोआब के माथे को और गुलछर्रे उड़ाने वाले बलवइयों की खोपड़ी को भस्म कर दिया है।
46हे मोआब, तुझ पर हाय! कमोश की प्रजा नष्ट हो गई है; क्योंकि तेरे बेटे बन्दी बनाए गए हैं और तेरी बेटियां बन्धुवाई में चली गई है।
47फिर भी अन्तिम दिनों में मैं मोआब को बन्धुवाई से लौटा ले आऊंगा,” यहोवा की यह वाणी है। मोआब के दण्ड का वचन यहीं तक हुआ।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)