पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 50 / 52
यिर्मयाह 50
1बेबीलोन और कसदियों के देश के विषय में यहोवा ने यिर्मयाह नबी के द्वारा यह वचन कहाः
2“जातियों में बताओ और सुनाओ। घोषित करो और झंडा ऊंचा करो। इसे मत छिपाओ वरन् कहो, ‘बेबीलोन बन्दी बना लिया गया है, बेल को लज्जित कर दिया गया है, मरोदक को नष्ट कर दिया गया है। उसकी प्रतिमाएं अपमानित कर दी गई हैं, उसकी मूर्तियां चूर-चूर कर दी गई है।’
3क्योंकि उत्तर दिशा से एक जाति उसके विरफ़द्ध आ खड़ी हुई है; यह उसके देश को उजाड़ देगी, और उसमें कोई भी निवासी नहीं बचेगा। मनुष्य और पशु दोनों भाग जाएंगे, उसमें कोई न रहेगा!
4यहोवा की यह वाणी है कि उन दिनों में और उस समय इस्राएल के पुत्र आएंगे, वे और यहूदा के पुत्र दोनों एक साथ आएंगे। वे रोते हुए जाएंगे और वे यहोवा अपने परमेश्वर को ढूढें़गे।
5वे अपना मुंह सिय्योन की ओर करके सिय्योन का मार्ग पूछते हुए आएंगे कि वे एक साथ मिलकर यहोवा के साथ एक अनन्त वाचा बांधें जो कभी भूली न जाए।
6मेरी प्रजा खोई हुई भेड़ें बन गई है। उनके चरवाहों ने उन्हें भटका दिया है। उन्होंने उनको पहाड़ों पर भटका दिया है; वे एक पहाड़ से दूसरी पहाड़ी पर चली गईं हैं और अपने बैठने के स्थान को भूल गई है।
7जितनों ने उन्हें पाया वे उनको खा गए; और उनके शत्रुओं ने कहा, हम दोषी नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने यहोवा के विरफ़द्ध जो धार्मिकता का निवासस्थान और उनके पूर्वजों की आशा है, पाप किया है।
8बेबीलोन के बीच से भाग जाओ, और कसदियों के देश से निकल जाओ; जैसे बकरे अपने झुंड के अगुवे होते हैं वैसे बनो।
9क्योंकि देख, मैं उत्तर से बड़ी-बड़ी जातियों का एक दल उभार कर ला रहा हूं कि वह बेबीलोन के विरफ़द्ध चढ़ाई करे, और वे उसके विरुद्ध युद्ध की पांति बांधेेंगे; वहां से वह बन्धुवाई में ले ली जाएगी। उनके तीर एक कुशल योद्धा के समान होंगे जो व्यर्थ नहीं लौटता।
10और कसदियों का देश लूटा जाएगा। जो उसे लूटेंगे उनके पास पर्याप्त लूट का माल होगा। ”यहोवा की यही वाणी है।
11“तुम जो प्रसन्न हो, तुम जो हर्षित हो, तुम जो मेरे भाग को लूटते हो, तुम बछिया के समान उछलते हो और जवान घोड़ों की नाईं हिनहिनाते हो,
12तुम्हारी माता अत्यन्त लज्जित होगी, तुम्हारी जननी का अनादर किया जाएगा। देखो, वह सब देशों में तुच्छ होगी और एक जंगल, सूखी भूमि और मरफ़स्थल ठहरेगी।
13यहोवा के क्रोध के कारण उसमें कोई बसने न पाएगा, वह सदा उजाड़ पड़ी रहेगी; जो कोई बेबीलोन के पास से गुजरेगा वह विस्मित हो जाएगा और उसके सब घावों को देखकर ताली बजाएगा।
14हे सब धनुर्धारियों, बेबीलोन के विरफ़द्ध चारों ओर से पांति बांधो। उस पर तीर चलाओ, अपने तीरों को मत रख छोड़ो, क्योंकि उसने यहोवा के विरफ़द्ध पाप किया है।
15चारों ओर से उसके विरफ़द्ध ललकारो। उसने हार मान ली है, उसके खम्भे गिर गए हैं, उसकी दीवारें ढह गईं हैं, क्योंकि यहोवा ने बदला लिया है, तुम भी उससे बदला लो। जैसा उसने दूसरे के साथ किया है वैसा ही तुम भी उसके साथ करो।
16बेबीलोन में से बीज बोने वाले, और फसल के समय कटाई करने वाले को नष्ट करो। वे अत्याचारी की तलवार के सामने से अपने लोगों की ओर मुड़ कर अपने देश को भाग जाएंगे।
17“इस्राएल एक भटकी हुई भेड़ है, सिंहों ने उसे भगा दिया है। पहले तो अश्शूर के राजा ने उसे खाया, और अन्त में बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने उसकी हड्डियां तोड़ डाली।
18इसलिए इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः देखो, जैसे मैंने अश्शूर के राजा को दण्ड दिया, वैसे ही मैं बेबीलोन के राजा तथा उसके देश को दण्ड दूंगा।
19और मैं इस्राएल को उसकी चराई में लौटा ले आऊंगा, और वह कर्मेल और बाशान में चरेगा, और उसकी इच्छा एप्रैम के पहाड़ी देश और गिलाद में तृप्त की जाएंगी।”
20यहोवा की यह वाणी है, “उन दिनों और उस समय, ‘इस्राएल के अधर्म की खोज करने पर भी नहीं मिलेगा। यहूदा के पाप खोजने पर भी नहीं मिलेंगे; क्योंकि जिनको मैं बचाए रखूंगा उनको मैं क्षमा कर दूंगा।”
21“मरातैम देश और पकोद के निवासियों के विरफ़द्ध चढ़ाई कर, उनको मार और उनका सर्वनाश कर,” यहोवा की यह वाणी है, और जो-जो आज्ञा मैंने तुझे दी हैं उन सभी के अनुसार कर।
22“देश में युद्ध और विनाश का कोलाहल है।
23सारी पृथ्वी का हथौड़ा कैसे कट गया और चूरचूर हो गया है। बेबीलोन देशों के बीच में कैसे भय का कारण बन गया है।
24हे बेबीलोन, मैंने तेरे लिए फंदा लगाया, और तू उसमें फँस भी गया, तू स्वयं उससे अनजान था; तुझे ढूंढ़कर पकड़ लिया गया है क्योंकि तू यहोवा का विरोध करने में लगा हुआ है।
25यहोवा ने अपना शस्रागार खोल दिया है और अपने क्रोध के हथियारों को निकाल लिया है, क्योंकि कसदियों के देश में सेनाओं के प्रभु यहोवा का यह एक काम है।
26दूर-दूर से उसके पास आओ; उसके अन्न के भंडारों को खोलो अनाज के ढेरों की नाईं उसका भी ढेर लगा दो और उसका ऐसा सर्वनाश करो कि उसमें कुछ भी बचा न रहे।
27उसके सब जवान बैलों को तलवार से घात करो, वे वध होने के स्थान में उतर जाए। उन पर हाय क्योंकि उनका दिन अर्थात् उनके दण्ड का समय आ गया है।
28बेबीलोन के देश से भागने वालों और शरणार्थियों का शब्द सुनाई दे रहा है कि सिय्योन में हमारे परमेश्वर यहोवा का बदला, हां, उसके मन्दिर के बदले की घोषणा करे।
29“सब धनुर्धारियों को बेबीलोन के विरफ़द्ध इकट्ठा करोः चारों ओर से उसके विरफ़द्ध छावनी डालो, कोई भी भागकर निकलने न पाए उसके काम के अनुसार उसको बदला दोः जैसा उसने किया है वैसा उसके साथ करो। क्योंकि वह इस्राएल के पवित्र हां, यहोवा ही के विरफ़द्ध अभिमानी हो गया है।
30इसलिए उसके जवान पुरफ़ष उसकी सड़कों में मारे जाएंगे, और उसके सब योद्धा शान्त कर दिए जाएंगे,” यहोवा की यही वाणी है।
31“हे अभिमानी, देख, मैं तेरे विरफ़द्ध हू।” सेनाओें के प्रभु यहोवा की यही वाणी है, “क्योंकि तेरा दिन आ गया है, और वह समय भी जब मैं तुझे दण्ड दूंगा,
32और अभिमानी ठोकर खाकर गिरेगा, कोई उसे उठाने वाला न होगा; और मैं उसके नगरों में आग लगाऊंगा, जिससे उसके चारों ओर सब कुछ भस्म हो जाएगा।”
33सेनाओं का यहोवा यों कहता है, “इस्राएलियों और यहूदियों दोनों पर अत्याचार हुआ है, और उनको बन्धुवा बनाने वाले उन्हें पकड़े रहते हैं, और जाने नहीं देते।
34उनका छुड़ाने वाला सामर्थी है, उसका नाम सेनाओं का यहोवा है; वह निश्चय उनका मुकद्दमा लड़ेगा, जिससे कि वह पृथ्वी में शान्ति परन्तु बेबीलोन के निवासियों में अशान्ति लाए।
35यहोवा की यह वाणी है, “कसदियों हां, बेबीलोन के निवासियों पर, और उसके अधिकारियों और उसके सलाहकारों पर तलवार चले।
36भविष्य बताने वालों पर तलवार चले, और वे मूर्ख बन जाए। उसके शूरवीरों पर तलवार चले, और वे नष्ट हो जाए।
37उनके घोड़ों और रथों पर तलवार चले, और सब विदेशियों पर जो उसके बीच में हैं, और वे स्रियां बन जाए। उसके कोष पर तलवार चले और वे लूट लिए जाए।
38उसके जलाशयों पर सूखा पड़े और वे सूख जाए। क्योंकि यह मूर्तियों से भरा देश है, और लोग भयानक मूर्तियों के पीछे पागल है।
39इसलिए जंगली जन्तु वहां गीदड़ों के साथ मिलकर रहेंगे, शुतुर्मुर्ग भी उसमें वास करेंगे, और वह फिर कभी बसाया नहीं जाएगा, न पीढ़ी से पीढ़ी तक उसमें कोई वास करेगा।”
40यहोवा की यह वाणी है, “जिस प्रकार परमेश्वर ने सदोम और अमोरा को उनके आस-पास के नगरों के साथ उलट दिया था, कोई मनुष्य वहां नहीं रहेगा, और न कोई मनुष्य का पुत्र उसमें बसने पाएगा।
41देखो, एक प्रजा उत्तर दिशा से आ रही है, और एक बड़ी जाति और अनेक राजा पृथ्वी की छोर से उकसाए जाएंगे।
42वे अपने धनुष और भाले पकड़े हुए हैं, वे क्रूर और निर्दयी है। उनका शब्द समुद्र की गर्जन के समान है, वे घोड़ों पर सवार हैं और हे बेबीलोन की बेटी, वे युद्ध की पांति बांधे हुए वीर के समान तुझ पर चढ़े आते है।
43बेबीलोन के राजा ने उनके विषय में समाचार सुन लिया है, और उसके हाथ ढीले पड़ गए; पीड़ा ने हां, जच्चा की सी पीड़ा ने उसे जकड़ लिया है।
44देखो, सिंह के समान कोई यरदन के घने जंगल में से सदा हरी-भरी चरागाह के विरफ़द्ध चढ़ आएगा; परन्तु क्षण भर में मैं उसे वहां से भगा दूंगा, और अपने चुने हुए को उस पर नियुक्त करूंगा। क्योंकि मेरे तुल्य कौन है, कौन मुझ पर मुकद्दमा करेगा? तब ऐसा चरवाहा कौन है जो मेरे सामने खड़ा रह सके?
45इसलिए यहोवा की उस योजना के विषय में जो उसने बेबीलोन के विरफ़द्ध बनाई है और कसदियों के देश के विरफ़द्ध ठहराए उसके उद्देश्यों के विषय में भी सुनोः निश्चय वे उनको यहां तक कि भेड़-बकरियों के बच्चों को भी घसीट ले जाएंगे। निश्चय वह उनके कारण उनकी चरागाह को उजाड़ देगा।
46बेबीलोन के पतन का समाचार सुनकर पृथ्वी कांप उठी है, और जाति-जाति में चिल्लाहट सुनी गई है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)