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पुराना नियम · यिर्मयाह · अध्याय 51 / 52

यिर्मयाह 51

1यहोवा यों कहता हैः “देखो, मैं बेबीलोन और लेब-कामै के निवासियों के विरफ़द्ध एक नष्ट करने वाली आत्मा उभारने वाला हू।

2और मैं विदेशियों को बेबीलोन में भेजूंगा कि वे उसे फटक कर उड़ा दें और उसके देश को निर्जन कर दें; उसकी विपत्ति के दिन वे चारों ओर से उसके विरफ़द्ध हो जाएंगे।

3धनुर्धारी अपना धनुष न ताने, और न ही अपनी झिलम पहन कर उठे; उसके जवानों को मत छोड़ो; उसकी सारी सेना का सर्वनाश करो।

4और वे कसदियों के देश में मरे हुए, और उनकी सड़कों में छिदे हुए गिरेंगे।

5क्योंकि न तो इस्राएल न यहूदा अपने परमेश्वर सेनाओं के यहोवा के द्वारा त्यागा गया है, यघपि इस्राएल के पवित्र के सम्मुख उनका देश पाप से भर गया है।

6बेबीलोन के बीच में से भागो, और तुम में से प्रत्येक अपने प्राण बचाए। उसके दण्ड में तुम भी नष्ट मत हो जाना क्योंकि यह यहोवा के बदला लेने का समय है; वह उसको बदला देने पर है।

7बेबीलोन यहोवा के हाथ में सोने का कटोरा रहा है, वह सारी पृथ्वी को मतवाला कर रहा है। देश-देश के लोगों ने उसके दाखमधु में से पीया है; इसलिए सभी देश पागल हो रहे है।

8बेबीलोन एकाएक गिर गया और टूट गया है; उसके लिए विलाप करो। उसकी पीड़ा के लिए मरहम लाओ; कदाचित् वह चंगा हो जाए।

9हमने बेबीलोन का इलाज किया, परन्तु वह चंगा नहीं हुआ; हम उसको त्याग कर अपने-अपने देश को चले जाएं, क्योंकि उसका न्याय आकाश को छूने लगा है और स्वर्ग तक पहुंच गया है।

10यहोवा ने हमारी धार्मिकता को प्रकट किया है; आओ हम सिय्योन में अपने परमेश्वर यहोवा के कामों का वर्णन करे।

11“तीरों को तेज करो, तरकशों को भर लो। यहोवा ने मादी राजाओं के मन को उभारा है, उसका उद्देश्य बेबीलोन को नष्ट करने का है; क्योंकि यहोवा का वरन् उसके मन्दिर का यही बदला है।

12बेबीलोन की शहरपनाह के विरफ़द्ध एक झंडा खड़ा करो; पहरा अधिक कड़ा करो, पहरफ़ओं को नियुक्त करो, घात लगाने वालों को बैठाओ। क्योंकि यहोवा ने बेबीलोन के निवासियों के विषय मेें जो कहा था, वह अब करने वाला है वरन् किया भी है।

13हे बहुत जलाशयों के बीच में बसने वाली और धन-सम्पत्ति से परिपूर्ण, तेरा अन्त वरन् तेरे जीवन की चरम सीमा आ पहुंची है।

14सेनाओं के यहोवा ने अपनी शपथ खाई हैः निश्चय मैं तुझको टिड्डियों के समान असंख्य मनुष्यों से भर दूंगा, और वे तेरे ऊपर विजय की ललकार करेंगे।”

15उसी ने अपने सामर्थ्य से पृथ्वी को बनाया, अपनी बुद्धि से जगत को स्थापित किया, और अपनी समझ से आकाश को ताना।

16जब वह बोलता है, आकाश में जल का बड़ा शब्द होता है, और वह बादलों को पृथ्वी के छोर से उठाता है, वह वर्षा के लिए बिजली बनाता है और अपने भंडारों से पवन निकाल ले आता है।

17सब मनुष्य मूर्ख, और ज्ञानरहित है। प्रत्येक सुनार को अपनी खोदी हुई मूर्तियों के कारण लज्जित होना पड़ेगा, क्योंकि उसकी ढाली हुई मूर्तियां धोखा देने वाली हैं, और उनमें श्वास नहीं है।

18वे तो व्यर्थ और केवल ठट्ठे के योग्य हैं; दण्ड के समय वे नष्ट होंगी।

19जो याकूब का भाग है वह इनके समान नहीं है; वह तो सबका बनाने वाला है, और इस्राएल जाति उसका निज भाग है; सेनाओं का यहोवा उसका नाम है।

20वह कहता है तू मेरा फरसा, मेरे युद्ध का हथियार है। तुझसे मैं जाति-जाति को टुकड़े-टुकड़े करता हूं, और राज्य-राज्य को नष्ट करता हूं,

21तुझसे मैं घोड़े और सवार दोनों के टुकड़े-टुकड़े करता हूं,

22तुझसे मैं रथ और उसके सारथी के टुकड़े-टुकड़े करता हूं, तुझसे मैं पुरफ़ष-स्री दोनों के टुकड़े-टुकड़े करता हूं, और तुझसे मैं बूढ़े और लड़के दोनों के टुकड़े-टुकड़े करता हूं, और तुझसे मैं युवक और युवतियों के टुकड़े-टुकड़े करता हूं,

23तुझसे मैं चरवाहे और झुंड को टुकड़े-टुकड़े करता हूं, तुझसे मैं किसान और उसके जोड़े बैलों के टुकड़े-टुकड़े करता हूं, और तुझसे मैं राज्यपालों और अधिपतियों के टुकड़े-टुकड़े करता हू।

24परन्तु मैं बेबीलोन को, हां, वहां वास करने वाले सारे कसदियों को उनकी सब बुराई का बदला दूंगा जो उन्होंने तुम्हारी आंखों के सामने सिय्योन में की है, यहोवा की यही वाणी है।

25“हे सर्वनाश करने वाले पहाड़, जो सारी पृथ्वी का सर्वनाश करता है, देख, मैं तेरे विरफ़द्ध हूं,” यहोवा की यह वाणी है, “और मैं अपना हाथ तेरे विरफ़द्ध बढ़ाऊंगा, तुझे चट्टानों पर से लुढ़का दूंगा, और तुझे एक जला हुआ पहाड़ बनाऊंगा।

26वे न तो तुझसे कोने के लिए और न नींव के लिए एक भी पत्थर लेंगे, परन्तु तू सदा के लिए उजाड़ रहेगा,” यहोवा की यही वाणी है।

27देश में झंडा खड़ा करो, जाति-जाति में तुरही फूंको। जाति-जाति को उसके विरफ़द्ध तैयार करो, अरारात, मिन्नी और अश्कनज राज्यों को उसके विरफ़द्ध बुलाओः उसके विरफ़द्ध सेनापति नियुक्त करो, घोड़ों को टिड्डी-दल के समान चढ़ा ले आओ।

28जाति-जाति को, मादी राजाओं को, उनके राज्यपालों और उनके सब अधिपतियों और उसके अधीन प्रत्येक देश को उसके विरफ़द्ध तैयार करो।

29पृथ्वी कांपती और पीड़ित होती है, क्योंकि यहोवा ने बेबीलोन के विरफ़द्ध ठान लिया है कि बेबीलोन देश को उजाड़ दे और निर्जन बना दे।

30बेबीलोन के शूरवीरों ने युद्ध करना बन्द कर दिया है, वे गढ़ों में ही रहते हैं; उनकी शक्ति क्षीण हो गई है, वे औरतों के समान हो रहे हैं; उनके निवासस्थान फूंंक दिए गए हैं, उसके फाटकों के बेंड़ें तोड़ डाले गए है।

31एक दूत पर दूत और संदेशवाहक पर संदेशवाहक मिलने के लिए दौड़ेगा कि बेबीलोन के राजा को सुनाए कि तेरा शहर चारों ओर से ले लिया गया है।

32घाट ले लिए गए, नरकटों के स्थान में आग लगा दी गई है, और योद्धा भयभीत हो गए है।

33क्योंकि इस्राएल का परमेश्वर सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “बेबीलोन की बेटी दांवते समय के खलिहान के समान है; थोड़े ही समय में उसकी कटनी का समय आएगा।”

34बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने मुझे खा लिया और पीस डाला है, उसने मुझे खाली बर्तन के समान कर दिया है; उसने मगरमच्छ के समान मुझको निगल लिया है, उसने मुझे स्वादिष्ट भोजन जानकर अपना पेट भर लिया है; फिर मुझको उगल दिया है।

35“जो हिंसा मुझ पर और मेरे शरीर पर हुई है वह बेबीलोन पर पलट जाए,” सिय्योन के निवासी कहेंगे। “मेरे लहू का पलटा कसदी के निवासियों के ऊपर हो।” यरूशलेम यह कहेगी,

36इसलिए यहोवा यों कहता है, “देख, मैं तेरा मुकद्दमा लड़ने और तेरा पूरा बदला लेने वाला हू। मैं उसके समुद्र और उसके सोते को सुखा दूंगा।

37और बेबीलोन खंडहरों का ढेर, गीदड़ों का वासस्थान, डर का कारण और उपहास का विषय बनकर निर्जन हो जाएगा।

38उसके लोग जवान सिंहों के समान एक साथ गरजेंगे, वे सिंहों के बच्चों के सामन गुर्राएंगे।

39जब वे उत्तेजित हों, मैं उनके लिए एक जेवनार तैयार करके उनको ऐसा मतवाला करूंगा कि वे उन्मत होकर सदा की नींद सोयें और कभी न जागें,” यहोवा की यही वाणी है।

40“मेमनों, मेढ़ों और बकरों के समान मैं उनको वध करने के लिए ले जाऊंगा।

41शेशक कैसे घेर लिया गया है, और सारी पृथ्वी की प्रशंसा कैसे ले ली गई है! बेबीलोन जाति-जाति में एक आतंक का कारण कैसे बन गया है।

42बेबीलोन के ऊपर समुद्र चढ़ आया है; वह उसकी उछलती लहरों में डूब गया है।

43उसके शहर आतंक का कारण बन गए हैं, उसका देश निर्जन और मरुस्थल बन गया है, उस देश में कोई नहीं रहता, और उससे होकर कोई मनुष्य नहीं चलता।

44और मैं बेल को बेबीलोन में दण्ड दूंगा, और जो उसने निगल लिया है मैं उसके मुंह से उगलवाऊंगा; और जातियां उसकी ओर खिंची हुई फिर नहीं आएंगी। बेबीलोन की शहरपनाह भी गिर गई है।

45हे मेरी प्रजा उसके बीच से निकल आओ, और तुम अपने-अपने प्राण को यहोवा के प्रकोप से बचाओ।

46जब देश में अफवाह सुनी जाए अर्थात् एक वर्ष में एक अफवाह और दूसरे वर्ष में दूसरी अफवाह और देश में हिंसा हो और एक अधिकारी दूसरे अधिकारी के विरोध में हो तो तुम्हारा मन न डरे और न घबराए।

47इसलिए देखो, वे दिन आ रहे हैं जब मैं बेबीलोन की मूर्तियों को दण्ड दूंगा; और उसका सारा देश लज्जित किया जाएगा और उसके सब मारे हुए उसके बीच में पड़े रहेंगे।

48तब स्वर्ग और पृथ्वी और जितने उसमें हैं सब बेबीलोन पर आनन्द से जय जयकार करेंगे, क्योंकि उत्तर दिशा से सर्वनाश करने वाले उस पर चढ़ाई के लिए आएंगे,” यहोवा की यही वाणी है।

49जिस प्रकार बेबीलोन के लिए पृथ्वी के सब लोगों का संहार हुआ है उसी प्रकार इस्राएल के वध किए हुओं के लिए बेबीलोन का संहार अवश्य किया जाएगा।

50तुम जो तलवार से बच गए हो, भागो! खड़े मत रहो। यहोवा को दूर ही से याद करो, और तुम्हारे मन में यरूशलेम का स्मरण रहे।

51हम लज्जित हुए हैं क्याेंकि हमने निन्दा सुनी है, लज्जा से हमारे मुंह काले हो गए हैं, क्योंकि यहोवा के घर के पवित्र स्थानों में विधर्मी घुस गए है।

52“इसलिए देखो,” यहोवा की यह वाणी है, “वे दिन आ रहे हैं, जब मैं उसकी मूर्तियों को दण्ड दूंगा, और उसके सारे देश में लोग घायल होकर कराहते रहेंगे।

53चाहे बेबीलोन स्वर्ग तक चढ़ जाए, और चाहे वह अपने ऊंचे गढ़ दृढ़ कर ले, फिर भी मैं सर्वनाश करने वालों को उसके पास भेजूंगा,” यहोवा की यही वाणी है।

54बेबीलोन से चिल्लाहट वरन् कसदियों के देश से विनाश का बड़ा कोलाहल सुनाई पड़ता है।

55क्योंकि यहोवा बेबीलोन का विनाश करने वाला है, और वह उसके बड़े कोलाहल को समाप्त कर देगा। उनकी लहरें महासागर के समान गर्जन करती हैं, उनके शब्दों का कोलाहल गूंज रहा है।

56क्योंकि विनाश करने वाला उसके विरफ़द्ध अर्थात् बेबीलोन के विरफ़द्ध आ रहा है, उसके शूरवीर बन्दी बना लिए जाएंगे, उनके धनुष तोड़ दिए जाएंगे; क्योंकि यहोवा बदला लेने वाला परमेश्वर है, वह पूर्णरूप से बदला लेगा,

57और मैं उसके उच्चाधिकारियों और उसके विद्वानों, उसके राज्यपालों, उसके अधिपतियों, और उसके शूरवीरों को मतवाला करूंगा, जिससे वे सदा की नींद सोयें और फिर न जागें,” राजाधिराज, जिसका नाम सेनाओं का यहोवा है, उसकी यही वाणी है।

58सेनाओं का यहोवा यों कहता हैः “बेबीलोन की चौड़ी शहरपनाह नींव से ढा दी जाएगी, और उसके ऊंचे-फाटकों पर आग लगा दी जाएगी; राज्य-राज्य के लोगों का परिश्रम व्यर्थ ठहरेगा, जाति-जाति का परिश्रम आग से भस्म हो जाएगा और वे थक जाएंगे।”

59यह वह संदेश है जिसे यिर्मयाह नबी ने महसेयाह के पोते नेरिय्याह के पुत्र सरायाह को उस समय दिया था जब वह यहूदा के राजा सिदकिय्या के राज्य के चौथे वर्ष में उसके साथ बेबीलोन गया। सरायाह तो राजभवन का प्रधान प्रबन्धक था।

60अतः यिर्मयाह ने वे सब विपत्तियां जो बेबीलोन पर पड़ने वाली हैं, अर्थात् वे सब बातें जो बेबीलोन के विषय में लिखी हुई हैं, एक पुस्तक में लिख दी।

61यिर्मयाह ने सरायाह से कहा, “जैसे ही तू बेबीलोन में पहुंचे, तो इन सब वचनों को जोर से पढ़ना,

62और कहना, “हे यहोवा, तूने इस स्थान को मिटा देने के विषय में प्रतिज्ञा की थी कि इसमें क्या मनुष्य क्या पशु कुछ भी रहने न पाएगा, वरन् यह सदा उजाड़ पड़ा रहेगा।

63और जब तू इस पुस्तक को पढ़ चुके, तब इसे एक पत्थर के संग बांध देना और इसको फ़रात महानद के बीच में फेंंक देना,

64और कहना, ऐसे ही बेबीलोन डूब जाएगा और फिर नहीं उठेगा, क्योंकि मैं उसके ऊपर विपत्ति लाने वाला हूं; और उसका पतन हो जाएगा’।” यहां तक यिर्मयाह के वचन है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)