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पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 14 / 42

अय्यूब 14

1“मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है, वह थोड़े दिनों का और दुःख से भरा होता है।

2वह फूल के समान खिलता, फिर मुरझा जाता है। वह छाया के समान ढल जाता, और बना नहीं रहता।

3क्या तू उस पर अपनी दृष्टि डालता, और न्याय के लिए उसे अपने सामने खड़ा करता है?

4कौन अशुद्ध में से शुद्ध निकाल सकता है? कोई नहीं!

5उसके दिन निर्धारित किए गए हैं, उसके महीनों की गिनती तेरे पास है, तूने उसकी सीमा बांधी है जिसे वह पार नहीं कर सकता।

6अपनी दृष्टि उस पर से हटा ले कि वह विश्राम ले सके, जब तक कि वह मजदूर के समान अपना दिन पूरा न कर ले।

7“वृक्ष के लिए तो आशा रहती है, कि जब वह काट डाला जाएं तो फिर पनपेगा, और उसकी काेंपलें निकलती रहेंगी।

8चाहे उसकी जड़ें भूमि में पुरानी पड़ जाएं, और उसका ठूंठ मिट्टी में सूख जाए,

9फिर भी वर्षा की गन्ध पाकर वह पनप उठेगा, और पौधे के समान कोंपलें निकालेगा।

10परन्तु मनुष्य मर जाता और पड़ा रहता है। प्राण निकल जाने पर वह कहां रहा?

11जैसे समुद्र से जल उड़ जाता है, और नदी धीरे-धीरे सूख जाती है,

12वैसे ही मनुष्य लेट जाता और फिर नहीं उठता। जब तक आकाश जाता न रहेगा न तो वह जागेगा न नींद से जगाया जाएगा।

13“भला होता कि तू मुझे अधोलोक में छिपा लेता, और मुझे तब तक छिपाए रखता, जब तक कि तेरा प्रकोप शान्त न हो जाता, और मेरे लिए कोई समय ठहरा कर मेरी सुधि लेता!

14यदि मनुष्य मर जाए तो क्या वह फिर जीवित होगा? अपनी कठिन सेवा के सब दिन, जब तक मेरा छुटकारा न हो जाए, मैं प्रतीक्षा करूंगा।

15तू मुझे पुकारेगा और मैं उत्तर दूंगा; तू अपने हाथों के काम की अभिलाषा करेगा।

16पर अब तो तू मेरे पग-पग को गिनता है, क्या तू मेरे पाप की ताक में लगा नहीं रहता?

17मेरा अपराध थैली में मुहरबन्द है, तूने अधर्म को सी रखा है।

18“परन्तु गिरता हुआ पर्वत चूर-चूर हो जाता है, और चट्टान अपने स्थान से हट जाती है;

19जल पत्थरों को घिस डालता है, और उसकी धाराएं मिट्टी को बहा ले जाती हैं; उसी प्रकार तू भी मनुष्य की आशा को नष्ट कर देता है।

20तू उस पर सर्वदा के लिए प्रबल होता और वह जाता रहता है; तू उसका रूप बदल डालता और उसको निकाल देता है।

21उसके पुत्रों को सम्मान मिलता है, पर वह इसे नहीं जान पाता; या वे उपेक्षित हो जाते हैं, पर वह इसे नहीं देख पाता।

22परन्तु उसकी देह उसे दुख देती है, और वह केवल अपने लिए ही शोक करता है।”

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)