पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 17 / 42
अय्यूब 17
1“मेरा प्राण निकलने पर है, मेरे दिन पूरे हो चुके हैं, मेरे लिए कब्र तैयार है।
2निश्चय ठट्ठा करने वाले मेरे आसपास हैं, और मेरी दृष्टि उनकी छेड़-छाड़ पर लगी रहती है।
3“अपने और मेरे बीच में तू ही जमानत दे, और कौन है जो मेरा जामिन होगा?
4क्योंकि तूने उनके हृदय को समझ से परे रखा है; इसलिए तू उनको उन्नत नहीं होने देगा।
5जो लूट के भाग के लिए अपने मित्र की चुगली करता है, उसके बच्चों की भी आंखें धुंधली पड़ जाएंगी।
6“उसने मुझे लोगों में कहावत बना दिया है, और मैं ऐसा हो गया हूं जिस पर लोग थूकते है।
7शोक के कारण मेरी आंखें भी धुंधली पड़ गई हैं, और मेरे सब अंग छाया के समान हो गए है।
8खरा व्यक्ति इस बात से चकित हो जाएगा, और निर्दोष व्यक्ति विधर्मी के विरुद्ध भड़क उठेगा।
9फिर भी धर्मी अपने मार्ग को पकड़े रहेगा, और जिसके हाथ शुद्ध हैं वह सामर्थी होता जाएगा।
10भले ही तुम सब के सब मेरे पास आओ, परन्तु तुममें से एक भी बुद्धिमान् नहीं दिखाई देता।
11मेरे दिन बीत चुके, मेरी योजनाएं नष्ट कर दी गई हैं, हां, मेरे हृदय की इच्छाएं भी।
12वे रात को दिन ठहराते, और कहते हैं कि अन्धकार की उपस्थिति में, ‘प्रकाश समीप है।’
13यदि मैं अधोलोक को अपना घर समझूं, तो मैं अपना बिछौना अन्धकार में बिछाता हू।
14यदि मैं कब्र से कहूं, ‘तू मेरा पिता है,’ और कीड़े से कि, ‘तूू मेरी मां और मेरी बहन है?’
15तो फिर मेरे लिए आशा कहां रही? और मेरी आशा को कौन समझेगा?
16क्या वह मेरे साथ अधोलोक तक उतर जाएगी? क्या हम एक साथ मिट्टी में मिल जाएंगे?”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)