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पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 23 / 42

अय्यूब 23

1तब अय्यूब ने उत्तर दिया,

2“अभी भी मेरी कुड़कुड़ाहट बनी है; मेरे कराहने पर भी उसका हाथ भारी है।

3काश, मैं जानता कि वह कहां मिल सकता है, कि मैं उसके आसन तक पहुंच पाता।

4मैं अपना मुकदमा उसके सामने प्रस्तुत करता और अपना मुख तर्कों से भर लेता।

5मैं उन शब्दों को जान लेता जिनसे वह मुझे उत्तर देता, और जो कुछ वह मुझसे कहता उसे समझ लेता।

6क्या वह अपना महान् सामर्थ्य दिखाकर मुझसे लड़ता? नहीं, वह निश्चय मुझ पर ध्यान देता।

7खरा मनुष्य उसके साथ तर्क कर सकता; तो मैं अपने न्यायी से सदा के लिए छुटकारा पा लेता।

8देखो, मैं आगे बढ़ता हूं, पर वह वहां नहीं मिलता, मैं पीछे हटता हूं, पर उसे देख नहीं पाता;

9जब वह बाईं ओर कार्य करता है, तब वह मुझे दिखाई नहीं देता; वह दाईं ओर फिरता है, और मैं उसे देख नहीं पाता।

10परन्तु वह मेरा चाल-चलन जानता है; जब वह मुझे परख चुकेगा, मैं सोने के समान निकलूंगा।

11मेरे पैर उसके पथ पर स्थिर रहे हैं, मैं उसी के मार्ग पर बिना मुड़े चलता रहा हू।

12मैं उसके होंठों की आज्ञा से हटा नहीं हूं; मैंने उसके मुंह के वचनों को अपने दैनिक भोजन से भी अधिक बहुमूल्य जाना है।

13परन्तु वह तो अद्वितीय है, उसे कौन विमुख कर सकता है? और जो उसका जी चाहता है, वही वह करता है।

14मेरे लिए जो कुछ उसने ठाना है उसी को वह पूरा करता है;

15इस कारण मैं उसके सम्मुख घबरा जाता हूं; मैं सोचता हूं, और उसके भय से कांप उठता हू।

16परमेश्वर ने मेरे हृदय को व्याकुल किया है, और सर्वशक्तिमान् ही ने मुझे घबरा दिया है।

17परन्तु न तो अन्धकार ने मेरा मुंह बन्द किया है, और न गहरी निराशा ने, जो मुझ पर छाई हुई है।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)