पुराना नियम · अय्यूब · अध्याय 5 / 42
अय्यूब 5
1“पुकार कर देख; क्या कोई है जो तुझे उत्तर देगा? पवित्रों में से तू किसकी ओर फिरेगा?
2कुढ़न तो मूर्ख को मार डालती है, और जलन भोलों की हत्या कर देती है।
3मैंने मूर्ख को जड़ पकड़ते देखा है, परन्तु मैंने तुरन्त उसके निवासस्थान को शाप दिया।
4उसके बच्चे सुरक्षा से दूर हैं, वे फाटक पर ही कुचल डाले जाते हैं, उनका छुड़ाने वाला कोई नहीं है।
5भूखे उसकी फसल को चट कर जाते, वरन् उसे कँटीली बाड़ में से भी निकाल लेते हैं: और प्यासा उनके धन के लिए उत्सुक रहता है।
6विपत्ति तो मिट्टी में से उत्पन्न नहीं होती और न दुख भूमि में से उगता है।
7क्योंकि जैसे चिंगारियां ऊपर ही ऊपर उड़ जाती हैं वैसे मनुष्य दुख भोगने के लिए ही उत्पन्न हुआ है, परमेश्वर के अद्भुत कार्य
8“परन्तु मैं तो परमेश्वर को खोजूंगा, और अपनी स्थिति परमेश्वर के सामने रखूंगा;
9वह महान् और अद्भुत कार्य करता, और अनगिनत आश्चर्यकर्म करता है।
10वही पृथ्वी पर वर्षा भेजता, और खेतों पर जल बरसाता है,
11इस प्रकार वह नम्र लोगों को ऊंचे पर बिठाता है, और शोक करने वाले सुरक्षित स्थान पर उठाए जाते है।
12वह धूर्तों के षड्यत्रें को व्यर्थ कर देता है जिससे उनके हाथों को कोई सफलता नहीं मिलती।
13वह बुद्धिमानों को उनकी ही चालाकियों में फंसाता है, और धूर्तों की सलाह शीघ्र निष्फल कर दी जाती है।
14दिन को ही उन पर अन्धकार छा जाता है, और दोपहर को भी वे ऐसे टटोलते फिरते हैं जैसे रात में
15परन्तु दरिद्रों को वह धूर्तों के मुंह की तलवार से और बलवानों के हाथ से बचाता है।
16अतः असहाय को आशा मिलती है, और अधार्मिकता अपना मुंह बन्द कर लेती है।
17“देख, क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसको परमेश्वर ताड़ना देता है, इसलिए सर्वशक्तिमान की झिड़की को तुच्छ न जानना।
18क्योंकि वही घायल करता और वही पट्टी भी बांधता है, वही मारता, और वही अपने हाथों से चंगा भी करता है।
19छः विपत्तियों से वह तुझे छुड़ाएगा, वरन् सात से भी तेरी कुछ हानि न होने पाएगी।
20अकाल में वह तुझे मृत्यु से, और युद्ध में तलवार के सामर्थ्य से बचा लेगा।
21तू जीभ के कोड़े से बचा रहेगा, जब हिंसा तुझ पर आ पड़े तब भी तुझे भय न होगा।
22तू हिंसा और अकाल पर हँसेगा, और बनैले पशुओं से न डरेगा।
23क्योंकि मैदान के पत्थरों के साथ तेरी सन्धि रहेगी; और मैदान के पशु तेरे साथ मेल रखेंगे।
24और तुझे निश्चय होगा कि तेरा डेरा सुरक्षित है, क्योंकि तू अपने निवास को देखेगा और तुझे हानि का कोई डर नहीं होगा।
25तुझे यह भी निश्चय होगा कि मेरे वंशज बहुत होंगे, तथा मेरी सन्तान पृथ्वी पर घास के समान होगी।
26समय के आ जाने पर जैसे पूलियां जमा की जाती हैं वैसे तू भी पूरी आयु का होकर कब्र में पहुंचेगा।
27यह जान, हमने इस बात की खोज की, यह ऐसा ही है; इसे सुन, और अपना ले।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)