पुराना नियम · योएल · अध्याय 1 / 3
योएल 1
1यहोवा का वचन जो पतूएल के पुत्र योएल के पास पहुंचाः
2हे प्राचीनो, सुनो, और हे इस देश के सब रहने वालो, ध्यान दो। क्या तुम्हारे या तुम्हारे पूर्वजों के दिनों में ऐसा कभी हुआ है?
3तुम अपने पुत्रों से इसका वर्णन करो, तुम्हारे पुत्र अपने पुत्रों से, और उनके पुत्र आगामी पीढ़ी से इसका वर्णन करे।
4जो कुछ कुतरने वाली टिड्डी से बचा उसे दलवाली टिड्डी ने खा लिया, और जो कुछ दलवाली टिड्डी से बचा उसे रेंगने वाली टिड्डी ने निगल लिया, और रेंगने वाली ने जो कुछ छोड़ा उसे उजाड़ने वाली टिड्डी चट कर गई।
5हे मतवालो, जाग उठो और विलाप करो! हे दाखमधु पीने वालो, नए दाखमधु के लिए रोओ, क्योंकि वह तुमको अब नहीं मिलेगा।
6क्योंकि असंख्य सेना वाली एक सामर्थी जाति ने मेरे देश पर चढ़ाई की है, उसके दांत सिंह के दांतों के समान और उसकी दाढ़ें सिंहनी की दाढ़ों के समान है।
7उसने मेरी दाखलता उजाड़ दी है और मेरे अंजीर के वृक्ष को ठूंठ कर दिया है। उसने उन्हें छीलकर फेंक दिया है, उनकी डालियां सफेद हो गई है।
8जैसे कुंवारी अपनी जवानी के मंगेतर के लिए टाट ओढ़कर विलाप करती है, वैसे ही तुम भी विलाप करो।
9यहोवा के घर में अन्नबलि और अर्घ अब नहीं लाए जाते। याजक, जो यहोवा के दास हैं, विलाप करते है।
10खेत उजाड़ पड़े हैं, भूमि विलाप करती है, अनाज नष्ट हो गया, दाखरस सूख गया, और शुद्ध तेल उपलब्ध नहीं है।
11हे किसानों, लज्जित होओ। हे दाखलता के रखवालो, विलाप करो, गेहूं और जौं के लिए भी, क्योंकि खेत की फसल नष्ट हो गई है।
12दाखलता सूख गई, अंजीर का वृक्ष मुरझा गया। अनार, ताड़, सेब और मैदान के सब वृक्ष भी सूख गए, और मनुष्यों का हर्ष जाता रहा।
13हे याजको, टाट ओढ़कर विलाप करो! हे वेदी के टहलुओ, बिलख-बिलख कर रोओ। हे मेरे परमेश्वर के सेवको, आओ, टाट ओढ़ेे हुए रात बिताओ, क्योंकि तुम्हारे परमेश्वर के घर में अन्नबलि और अर्घ अब नहीं लाए जाते है।
14उपवास का दिन नियत करो, पवित्र सभा घोषित करो, प्राचीनों और देश के सब निवासियों को अपने परमेश्वर यहोवा के घर में एकत्रित करके उसकी दुहाई दो।
15उस दिन के कारण, हाय! यहोवा का दिन निकट है। वह सर्वशक्तिमान की ओर से सत्यानाश का दिन होगा।
16क्या हमारी आंखों के सामने भोजन वस्तुएं, और हमारे परमेश्वर के भवन से हर्ष और आनन्द छीन न लिए गए?
17ढेलों के नीचे बीज झुलस गए, भंडार खाली पड़े हैं, खत्ते गिरा दिए गए हैं, क्योंकि फसल सूख गई है।
18पशु कैसे कराहते हैं! गाय-बैलों के झुंड मारे-मारे फिर रहे हैं क्योंकि उनके लिए चराई नहीं है, भेड़-बकरियां भी तड़प रही है।
19हे यहोवा, मैं तेरी दुहाई देता हूं, क्योंकि आग ने जंगल की चरागाहों को जला डाला है, और मैदान के सब वृक्षों को लपटों ने भस्म कर दिया है।
20वन-पशु तेरे लिए लालायित हैं, क्योंकि जल के सोते सूख गए और आग ने जंगल के चरागाहों को जला डाला है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)