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नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 18 / 21

यूहन्ना 18

1जब यीशु ये बातें कह चुका तो वह अपने चेलों के साथ किद्रोन नाले के पार गया जहां एक बाग था, जिसमें स्वयं उसने और उसके चेलों ने प्रवेश किया।

2यहूदा भी जो उसे पकड़वाने पर था, उस जगह को जानता था; क्योंकि यीशु अधिकतर अपने चेलों के साथ वहाँ जाया करता था।

3तब यहूदा, रोमी सेना के एक दल को, और मुख्य याजकों तथा फरीसियों की ओर से सिपाहियों को लेकर वहाँ लालटेनों, मशालों और हथियारों सहित आया।

4इसलिए यीशु उन सब बातों को जो उसपर आने वाली थीं जानकर आगे बढ़ा और उनसे कहा, “तुम किसे ढूँढ़ते हो?”

5उन्होने उत्तर दिया, “यीशु नासरी को।” उसने उनसे कहा, “वह मैं हूँ।” और यहूदा भी जो उसे पकड़वाने पर था उसके साथ खड़ा था।

6जब उसने उनसे कहा, “मैं हूँ तो वे पीछे हटे और भूमि पर गिर पड़े।

7तब उसने फिर पूछा, “तुम किसे ढूँढ़ते हो?” और उन्होंने कहा, “यीशु नासरी को।”

8यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुमसे कह चुका कि मैं वही हूँॅ, इसलिए यदि तुम मुझे ढूँढ़ते हो तो इन्हें जाने दो,”

9जिससे कि वह वचन पूरा हो जो उसने कहा था, “जिन्हें तूने मुझे दिया उनमें से मैंने एक को भी नहीं खोया।”

10इस पर शमौन पतरस ने, जो तलवार लिए हुए था, उसे खींचकर महायाजक के दास पर चलाई और उसका दाहिना कान काट डाला, और उस दास का नाम मलखुस था।

11तब यीशु ने पतरस से कहा, “तलवार मियान में रख! जो प्याला पिता ने मुझे दिया, क्या मैं उसे न पीऊँ?”

12तब रोमी सेना के दल और सेनानायक और यहूदियों के सिपाहियों ने यीशु को गिरफ्ऱतार कर बांध लिया,

13और पहले उसे हन्ना के पास ले गए, क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था।

14वह काइफा ही था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिए एक पुरुष का मरना उत्तम है।

15शमौन पतरस और एक अन्य चेला यीशु के पीछे चल पड़े। यह चेला महायाजक की जान-पहचान का था और उसने यीशु के साथ महायाजक के आंगन में प्रवेश किया,

16परन्तु पतरस बाहर द्वार पर खड़ा रहा। अतः वह दूसरा चेला जो महायाजक की जान-पहचान का था, बाहर निकला और द्वारपालिन से कह कर पतरस को भीतर ले आया।

17तब दासी ने जो द्वारपालिन थी, पतरस से कहा, “कहीं तू भी तो इस मनुष्य के चेलों में से नहीं है?” उसने कहा, “मैं नहीं हूँ।”

18वहां पर दास और सिपाही कोयले की आग जला कर खड़े हुए ताप रहे थे क्योंकि ठण्ड थी, और पतरस भी उनके साथ खड़ा हुआ ताप रहा था।

19तब महायाजक ने यीशु से उसके चेलों और उसकी शिक्षाओं के विषय में प्रशन किया।

20यीशु ने उसे उत्तर दिया, “मैंने संसार से खुलकर बातें की है। मैंने सदा आराधनालयों तथा मंदिर में जहां सब यहूदी इकट्ठा हुआ करते हैं शिक्षा दी है, और मैंने गुप्त में कुछ भी नहीं कहा।

21तू मुझसे क्यों पूछता है? सुनने वालों से पूछ कि मैंने उनसे क्या कहा। देख, ये जानते हैं कि मैंने क्या-क्या कहा है।”

22और जब उसने यह कहा, तो पास खड़े सिपाहियों में से एक ने यह कहते हुए उसे घूँसा मारा, “क्या तू महायाजक को इस प्रकार उत्तर देता है?”

23यीशु ने उसे उत्तर दिया, “यदि मैंने अनुचित कहा तो उसे प्रमाणित कर, परन्तु यदि उचित कहा है तो तू मुझे क्यों मारता है?”

24तब हन्ना ने उसे काइफा महायाजक के पास बंधा हुआ भेज दिया।

25शमौन पतरस खड़ा हुआ आग ताप रहा था। इसलिए उन्होंने उससे कहा, “कहीं तू भी तो उसके चेलों में से नहीं?” उसने अस्वीकार करके कहा, “मैं नहीं हूँ।”

26महायाजक के दासों में से एक ने, जो उस मनुष्य का कुटुम्बी था और जिसका कान पतरस ने काट डाला था, कहा, “क्या मैंने तुझे बाग में उसके साथ नहीं देखा था?”

27तब पतरस फिर मुकर गया, और तुरन्त मुर्ग ने बांग दी।

28अतः वे यीशु को काइफा के पास से राजभवन में ले गए, और भोर का समय था; और उन्होंने स्वयं राजभवन में प्रवेश नहीं किया कि कहीं अशुद्ध न हो जाएं, परन्तु फसह खा सके।

29इसलिए पिलातुस बाहर निकलकर उनके पास आया, और कहा, “तुम इस मनुष्य पर क्या दोष लगाते हो?”

30उन्होंने उसे उत्तर देते हुए कहा, “यदि यह मनुष्य कुकर्मी न होता, तो हम उसे तेरे हाथ में न सौंपते।”

31इसलिए पिलातुस ने उनसे कहा, “तुम ही इसे ले जाकर अपनी व्यवस्था के अनुसार इसका न्याय करो।” यहूदियों ने उससे कहा, “हम किसी को मृत्यु-दृण्ड नहीं दे सकते।”

32यह इसलिए हुआ कि यीशु का वह वचन पूरा हो जो उसने यह संकेत करते हुए कहा था कि उसकी मृत्यु कैसी होगी।

33इसलिए पिलातुस ने फिर से राजभवन में प्रवेश किया और यीशु को बुलवाया और उससे कहा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?”

34यीशु ने उत्तर दिया, “क्या तू यह बात अपनी ओर से कह रहा है, अथवा औरों ने मेरे विषय में तुझे बताया?”

35पिलातुस ने उत्तर दिया, “क्या मैं यहूदी हूँ? तेरी ही जाति और मुख्ययाजकों ने तुझे मेरे हाथों में सौंपा है। तूने क्या किया है?”

36यीशु ने उत्तर दिया, “मेरा राज्य इस संसार का नही। यदि मेरा राज्य इस संसार का होता तो मेरे सेवक युद्ध करते कि मैं यहूदियों के हाथ न सौंपा जाता। बात यह है कि मेरा राज्य इस संसार का नही।”

37इसलिए पिलातुस ने उससे कहा, “तो क्या तू राजा है?” यीशु ने उत्तर दिया, “तू ठीक कहता है कि मैं राजा हूँ। मैंने इसीलिए जन्म लिया और इसलिए इस संसार में आया हूँ कि सत्य की साक्षी दूँ। प्रत्येक वह जो सत्य का है मेरी वाणी सुनता है।”

38पिलातुस ने उससे कहा, “सत्य क्या है?” और जब यह कह चुका तो वह फिर यहूदियों के पास बाहर गया और उनसे कहा, “मैं उसमें कोई दोष नहीं पाता।

39परन्तु तुम्हारी एक रीति है, कि फसह के दिन मैं तुम्हारे लिए एक व्यक्ति को छोड़ दूँ; क्या तुम चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिए यहूदियों के राजा को छोड़ दूँ?”

40तब उन्होंने फिर चिल्लाकर कहा, “इस मनुष्य को नहीं, परन्तु बरअब्बा को छोड़ दे।” बरअब्बा तो एक डाकू था।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)