नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 17 / 21
यूहन्ना 17
1यीशु ने ये बातें कहकर अपनी आँखें स्वर्ग की ओर उठाते हुए कहा, “हे पिता, घड़ी आ पहुंची है। अपने पुत्र की महिमा कर, जिससे पुत्र तेरी महिमा करे।
2तूने तो उसे समस्त मानव-जाति पर अधिकार दिया है कि वह उन सब को जिन्हें तूने उसे दिया है अनन्त जीवन दे।
3और अनन्त जीवन यह है कि वे तुझे जो एकमात्र सच्चा परमेश्वर है और यीशु मसीह को जानें जिसे तूने भेजा है।
4जो काम तूने मुझे करने को दिया था उसे पूरा करके मैंने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है।
5हे पिता, अब तू अपने साथ मेरी महिमा उस महिमा से कर जो जगत की उत्पत्ति से पहले, तेरे साथ मेरी थी।
6मैंने तेरा नाम उन मनुष्यों पर प्रकट किया है जिन्हें तूने जगत में से मुझे दिया है। वे तेरे थे, और तूने उन्हे मुझे दिया और उन्होंने तेरे वचन को मान लिया है।
7अब वे जान गए हैं कि जो कुछ तूने मुझे दिया, है वह सब तेरी ओर से है,
8क्योंकि वे वचन जो तूने मुझे दिए, मैंने उन तक पहुँचा दिए है। उन्होंने उन वचनों को ग्रहण किया और वास्तव में जान लिया है कि मैं तुझसे निकला हूँ, और उन्होंने विश्वास किया है कि तूने ही मुझे भेजा है।
9मैं उनके लिए विनती करता हूँ-संसार के लिए विनती नहीं करता परन्तु उनके लिए जिन्हें तूने मुझे दिया है, क्योंकि वे तेरे है,
10और सब कुछ जो मेरा है वह तेरा है, और जो तेरा है वह मेरा है, और मेरी महिमा उनमें प्रकट हुई है।
11अब मैं जगत में न रहूँगा। फिर भी वे जगत में रहेंगे और मैं तेरे पास आता हूँ। हे पवित्र पिता, अपने उस नाम से जो तूने मुझे दिया है इनकी रक्षा कर कि जैसे हम एक हैं, वे भी एक हो।
12जब मैं उनके साथ था, मैंने तेरे उस नाम से जो तूने मुझे दिया है उनकी रक्षा की, और विनाश के पुत्र को छोड़ उनमें से कोई नष्ट न हुआ, इसलिए कि पवित्रशास्त्र की बात पूरी हो।
13परन्तु अब मैं तेरे पास आता हूँ, और ये बातें संसार में कहता हूँ, कि वे अपने में मेरा आनन्द पूरा पाए।
14मैंने उन्हें तेरा वचन दिया है, और संसार ने उनसे घृणा की है, क्योंकि जैसे मैं संसार का नहीं, वैसे वे भी संसार के नही।
15मैं तुझसे यह विनती नहीं करता कि तू उन्हें संसार में से उठा ले, परन्तु यह कि तू उन्हें उस दुष्ट से बचाए रख।
16वे संसार के नहीं हैं, जैसे कि मैं भी संसार का नहीं हूँ।
17सत्य के द्वारा उन्हें पवित्र कर-तेरा वचन सत्य है।
18जैसे तूने मुझे संसार में भेजा, मैंने भी उन्हें संसार में भेजा है।
19और उनके लिए मैं अपने आप को पवित्र करता हूँ, कि वे भी सत्य के द्वारा पवित्र किए जाए।
20“मैं केवल इन्हीं के लिए विनती नहीं करता, परन्तु उनके लिए भी जो इनके वचन के द्वारा मुझपर विश्वास करेंगे,
21कि वे सब एक हो। जैसे, हे पिता, तू मुझमें है और मैं तुझमें हूँ, वैसे ही वे भी हममें हों, जिससे कि संसार विश्वास करे कि तूने ही मुझे भेजा है।
22और वह महिमा जो तूने मुुझे दी है मैंने उन्हें दी है, कि वे वैसे ही एक हों जैसे हम एक हैं:
23मैं उनमें और तू मुझमें, कि वे सिद्ध होकर एक हो जाएं, जिससे संसार जाने कि तूने मुझे भेजा और जैसे तूने मुझसे प्रेम किया वैसे ही उनसे भी प्रेम किया।
24हे पिता, मैं चाहता हूँ कि जिन्हें तूने मुझे दिया है, जहाँ मैं हूँ, वहां वे भी मेरे साथ रहें, कि वे मेरी उस महिमा को देख सकें जिसे तूने मुझे दी है, क्योंकि तूने जगत की उत्पत्ति से पहिले मुझसे प्रेम किया।
25हे धार्मिक पिता, यघपि संसार ने तुझे नहीं जाना, फिर भी मैंने तुझे जाना, और इन्होंने भी जाना है कि तूने ही मुझे भेजा है,
26और मैंने तेरा नाम इनको बताया और बताता रहूँगा, कि जिस प्रेम से तूने मुझसे प्रेम किया वह उनमें रहे, और मैं उनमे।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)