नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 16 / 21
यूहन्ना 16
1“ये बातें मैंने तुमसे इसलिए कही हैं, कि तुम ठोकर खाने से बचे रहो।
2वे तुम्हें आराधनालय से बहिष्कृत कर देंगे, परन्तु वह समय आ रहा है कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा, समझेगा कि परमेश्वर की सेवा कर रहा है।
3और वे ऐसा इसलिए करेंगे क्योंकि उन्होंने न तो पिता को जाना और न मुझे।
4और ये बातें मैंने इसलिए कहीं कि जब समय आए तो तुम स्मरण करो कि मैंने तुम्हें इनके विजय में बता दिया था, और ये बातें मैंने तुमसे आरम्भ में इसलिए नहीं कहीं क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था।
5“परन्तु अब मैं अपने भेजने वाले के पास जा रहा हूँ; और तुममें से कोई मुझसे नहीं पूछता, ‘तू कहाँ जा रहा है?’
6परन्तु इसलिए कि मैंने ये बातें तुमसे कही हैं, तुम्हारा हृदय शोक से भर गया है।
7परन्तु मैं तुमसे सच-सच कहता हूूँ कि मेरा जाना तुम्हारे लिए लाभदायक है, क्योंकि यदि मैं न जाऊँ तो वह सहायक तुम्हारे पास नहीं आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊँ तो उसे तुम्हारे पास भेज दूँगा।
8और जब वह आएगा तो संसार को पाप और धार्मिकता और न्याय के विजय में निरुत्तर करेगा।
9पाप के विजय में, इसलिए कि वे मुझपर विश्वास नहीं करते,
10और धार्मिकता के विजय, में इसलिए कि मैं पिता के पास जाता हूँ, और तुम मुझे फिर नहीं देखोगे,
11और न्याय के विजय में, इसलिए कि संसार का अधिकारी दोषी ठहराया गया है।
12मुझे तुमसे और भी बहुत-सी बातें कहनी हैं, परन्तु तुम अभी उन्हें सहन नहीं कर सकते।
13परन्तु जब वह, अर्थात् सत्य का आत्मा आएगा, तो वह तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा; क्योंकि वह अपनी ओर से कुछ नहीं कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा और आने वाली बातों को तुम पर प्रकट करेगा।
14वह मेरी महिमा करेगा, क्योंकि वह मेरी बातों को लेकर तुम पर प्रकट करेगा।
15जो कुछ पिता का है वह सब मेरा है; इसलिए मैंने कहा, वह मेरी बातों को लेकर तुम पर प्रकट करेगा।
16थोड़ी देर में तुम मुझे नहीं देखोगे, और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे।”
17तब उसके चेलों में से कुछ ने परस्पर कहा, “यह क्या बात है जो वह हमसे कह रहा है, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूँ?”
18और वे इस प्रकार कहने लगे, “यह क्या है जो वह कहता है, ‘थोड़ी देर में’? हम नहीं जानते कि वह क्या कह रहा है।”
19यीशु ने यह जानकर कि वे मुझसे प्रशन करना चाहते हैं, उनसे कहा, “क्या तुम इस बात के विजय में आपस में सोच-विचार कर रहे हो, जो मैंने कहा, ‘थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में तुम मुझे देखोगे?’
20मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा। तुम शोकित होगे, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द में बदल जाएगा।
21जब किसी स्त्री को प्रसव-पीड़ा होती है तो उसे शोक होता है, क्योंकि उसका समय आ पहुँचा है, परन्तु जब वह बच्चे को जन्म दे चुकती है, तो उस पीड़ा को इस आनन्द से कि संसार में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ है, भूल जाती है।
22इसलिए तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुमसे फिर मिलूंगा और तुम्हारे हृदय आनन्दित होंगे, और तुम्हारे आनन्द को कोई तुमसे छीन न लेगा।
23उस दिन तुम मुुझसे कोई प्रशन न पूछोगे। मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, यदि तुम पिता से कुछ भी मांगोगे, तो वह उसे मेरे नाम से तुम्हें देगा।
24अब तक तुमने मेरे नाम से कुछ नहीं मांगाः मांगो, और तुम्हें मिलेगा जिससे तुम्हारा आनन्द पूरा हो जाए।
25“ये बातें मैंने तुमसे दृष्टान्त में कही हैं, परन्तु वह घड़ी आ रही है जब मैं फिर तुमसे दृष्टान्त में न कहूँगा, परन्तु तुम्हें पिता के विषय में स्पष्ट बताऊँगा।
26उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुमसे यह नहीं कहता कि तुम्हारे लिए पिता से विनती करूंगा,
27क्योंकि पिता स्वयं तुमसे प्रेम करता है, इसलिए कि तुमने मुझसे प्रेम किया है और यह विश्वास किया है कि मैं पिता में से निकल कर आया हूँ।
28मैं पिता से निकल कर जगत में आया हूँ, मैं फिर जगत को छोड़ कर पिता के पास जा रहा हूँ।”
29उसके चेलों ने कहा, “अब तू स्पष्ट कह रहा है, और दृष्टान्त में नहीं कह रहा है।
30अब हम जानते हैं कि तू सब कुछ जानता है, और इसकी आवश्यकता नहीं कि कोई तुझसे प्रशन पूछे। इससे हम विश्वास करते हैं कि तू परमेश्वर से निकला है।”
31यीशु ने उत्तर दिया, “क्या तुम अब विश्वास करते हो?
32देखो, वह घड़ी आ रही है, बल्कि आ पहुँची है कि तुम तितर-बितर होकर अपने-अपने घरों को चले जाओगे और मुझे अकेला छोड़ दोगे; फिर भी मैं अकेला नहीं हूँ, क्योंकि पिता मेरे साथ है।
33ये बातें मैंने तुमसे कही हैं कि तुम मुझमें शान्ति पाओ। संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु साहस रखो-मैंने संसार पर विजय पायी है।”
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)