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नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 20 / 21

यूहन्ना 20

1सप्ताह के पहले दिन मरियम मगदलीनी, बड़े सवेरे जब कि अभी अंधेरा ही था कब्र पर आई, और पत्थर को क़ब्र से हटा हुआ देखा।

2अतः वह दौड़कर शमौन पतरस और उस दूसरे चेले जिससे यीशु प्रेम रखता था, के पास आई और उनसे कहने लगी, “वे प्रभु को कब्र में से उठा ले गए हैं, और हमें नहीं मालूम कि उन्होंने उसे कहाँ रख दिया है।”

3तब पतरस और वह दूसरा चेला निकल कर कब्र की ओर चल पड़े।

4वे दोनों साथ-साथ दौड़ रहे थे, परन्तु वह दूसरा चेला पतरस से तेज़ दौड़कर कब्र पर पहले पहुंचा;

5और झुककर भीतर झाँकने पर कप़फ़न को अलग पड़ा देखा, परन्तु वह अन्दर नहीं गया।

6तब शमौन पतरस भी उसके पीछे-पीछे वहां आ पहुँचा और कब्र के भीतर जाकर उसने कपड़ों वहां को पड़े देखा,

7और उस कपड़े को, जिससे यीशु का सिर लपेटा गया था अन्य कपड़ों के साथ नहीं, वरन् अलग एक जगह लिपटा हुआ पड़ा देखा।

8तब वह दूसरा चेला भी, जो कब्र पर पहले पहुँचा था, भीतर गया; और उसने देखा, और विश्वास किया।

9अभी तक वे पवित्रशास्त्र की वह बात न समझे थे कि मृतकों में से उसका जी उठना अवश्य है।

10अतः ये चेले पुनः अपने-अपने घर लौट गए।

11परन्तु मरियम रोती हुई कब्र के बाहर खड़ी रही और रोते हुए उसने झुककर कब्र में झांका;

12और जहां यीशु का शव रखा हुआ था वहां उसने दो स्वर्गदूतों को उजले वस्त्र पहने हुए, एक को सिरहाने और दूसरे को पैताने बैठे देखा।

13और उन्होंने उससे कहा, “हे नारी, तू क्यों रो रही है?” उसने उनसे कहा, “इसलिए कि वे मेरे प्रभु को उठा ले गए हैं, और मैं नहीं जानती कि उन्होंने उसे कहां रखा है।”

14यह कहकर जब वह मुड़ी तो यीशु को वहां खड़े देखा और नहीं पहचाना कि यह यीशु था।

15यीशु ने उससे कहा, “हे नारी, तू क्यों रो रही है? तू किसे ढूँढ़ रही है?” उसे माली समझकर उसने उससे कहा, “महोदय, यदि आप उसे कहीं उठा ले गये हैं तो मुझे बताएं कि आपने उसे कहां रखा है, और मैं उसे ले जाऊंगी।”

16यीशु ने उससे कहा, “मरियम!” उसने मुड़कर उससे इब्रानी में कहा, “रब्बूनी!” (जिसका अर्थ है गुरु)।

17यीशु ने उससे कहा, “मुझे मत छू; क्योंकि मैं अब तक पिता के पास ऊपर नहीं गया हूँ; परन्तु मेरे भाइयों के पास जा, और उनसे कह, ‘मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता, और अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूँ,’”

18मरियम मगदलीनी आकर चेलों को बताने लगी कि, “मैंने प्रभु को देखा है,” और कि उसने उससे ये बातें कही थी।

19उसी दिन, जो सप्ताह का पहला दिन था, संध्या के समय जब वहां के द्वार जहां चेले थे, यहूदियों के डर के मारे बन्द थे, यीशु आकर उनके मध्य खड़ा हो गया और उनसे कहा, “तुम्हें शान्ति मिले।”

20जब वह यह कह चुका तो उसने उन्हें अपने हाथ और पंजर दोनों दिखाए। तब चेले प्रभु को देखकर उल्लसित हो उठे।

21अतः यीशु ने फिर उनसे कहा, “तुम्हें शान्ति मिले; जैसे पिता ने मुझे भेजा है, वैसे ही मैं भी तुम्हें भेजता हूँ।”

22और जब वह यह कह चुका तो उसने उनपर फूँका और उनसे कहा, “पवित्र आत्मा लो।

23यदि तुम किसी के पाप क्षमा करो, तो वे उनके लिए क्षमाकर दिए गए हैं; यदि तुम किसी के पाप बनाए रखो, तो वे बनाए रखे गए है।”

24परन्तु जब यीशु आया तो बारहों में से एक, अर्थात थोमा जो दिदुमुस कहलाता है, उनके साथ नहीं था।

25तब अन्य चेले उससे कहने लगे, “हमने प्रभु को देखा है!” परन्तु उसने उनसे कहा, “जब तक मैं उसके हाथों में कीलों के चिह्न न देख लूँ और कीलों के छेद में अपनी उंगली न डालूँ और उसके पंजर में अपने हाथ न डालूँ, तब तक मैं विश्वास नहीं करूँगा।”

26आठ दिन के पश्चात् फिर उसके चेले घर के भीतर थे, और थोमा उनके साथ था। जबकि द्वार बन्द थे, यीशु आया, और उनके मध्य खड़े होकर कहा, “तुम्हें शान्ति मिले।”

27तब उसने थोमा से कहा, “अपनी उंगली यहां ला और मेरे हाथों को देख; और अपना हाथ बढ़ाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं, परन्तु विश्वासी हो।”

28थोमा ने उत्तर देते हुए उससे कहा, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!”

29यीशु ने उससे कहा, “क्या तुमने इसलिए विश्वास किया है कि मुझे देखा है? धन्य हैं वे जिन्होंने मुझे नहीं देखा, फिर भी विश्वास किया।”

30यीशु ने बहुत-से अन्य चिह्न भी चेलों के सामने दिखाए जो इस पुस्तक में नहीं लिखे गए हैं,

31परन्तु ये जो लिखे गए हैं इसलिए लिखे गए कि तुम विश्वास करो कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है, और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)