नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 9 / 21
यूहन्ना 9
1फिर जाते हुए उसने एक मनुष्य को देखा जो जन्म से अंधा था।
2और उसके चेलों ने यह कहते हुए उससे पूछा, “रब्बी, किसने पाप किया, इस मनुष्य ने या इसके माता-पिता ने, कि यह अंधा उत्पन्न हो?”
3यीशु ने उत्तर दिया, “न तो इस मनुष्य ने पाप किया, न ही इसके माता-पिता ने; पर यह इसलिए हुआ कि परमेश्वर के कार्य उसमें प्रकट हो।
4अवश्य है कि जिसने मुझे भेजा है हम उसके कार्य दिन ही दिन में कर डालें; रात आने वाली है, जब कोई मनुष्य कार्य नहीं कर सकता।
5जब तक मैं जगत में हूँ, मैं जगत की ज्योति हूँ।”
6जब वह यह कह चुका, तो उसने भूमि पर थूका, और उस थूक से मिट्टी सानी, तब उस मिट्टी को अंधे की आँखों पर लगाया,
7और उससे कहा, “जा, शीलोम के कुण्ड में धो ले” (शीलोम का अर्थ है, भेजा हुआ)। अतः उसने जाकर धोया, और देखता हुआ लौट आया।
8तब पड़ोसी,और जिन्होंने पहले उसे भीख मांगते देखा था, कहने लगे, “क्या यह वही नहीं है जो बैठा भीख मांगा करता था?”
9दूसरे कहने लगे, “यह वही है।” अन्य लोगों ने कहा, “नहीं, परन्तु यह उसके समान है।” वह कहता रहा, “मैं वही हूँ।”
10इसलिए वे उससे पूछने लगे, “तब तेरी आँखें कैसे खुल गईं?”
11उसने उत्तर दिया, “यीशु नामक व्यक्ति ने मिट्टी सानी, और मेरी आँखों पर लगाई, और मुझसे कहा, ‘शीलोम में जा और धो ले;’ अतः मैंने जाकर धोया, और मैं देखने लगा।”
12और उन्होंने उससे कहा, “वह कहाँ है?” उसने कहा, “मैं नहीं जानता।”
13वे उसे जो पहले अंधा था फरीसियों के पास लाए।
14जिस दिन यीशु ने मिट्टी सानकर उसकी आँखें खोली थीं वह सब्त का दिन था।
15फिर फरीसियों ने भी उससे पूछा कि तू किस प्रकार देखने लगा। और उसने उनसे कहा, “उसने मेरी आँखों पर मिट्टी लगाई, और मैंने धोया और अब मैं देखता हूँ।”
16इसलिए फरीसियों में से कुछ कहने लगे, “यह मनुष्य परमेश्वर की ओर से नहीं है, क्योंकि वह सब्त का दिन नहीं मानता।” परन्तु दूसरे कहने लगे, “एक पापी मनुष्य ऐसे चिह्नों को कैसे दिखा सकता है?” और उनमें फूट पड़ गईं।
17अतः उन्होंने उस अंधे मनुष्य से फिर कहा, “इसलिए कि उसने तुम्हारी आँखें खोली हैं, तुम उसके विजय में क्या कहते हो?” उसने कहा, “वह नबी है।”
18इसलिए यहूदियों ने उसकी इस बात का विश्वास नहीं किया कि वह अंधा था और अब देखने लगा, जब तक कि उन्होंने उस दृष्टि पाने वाले मनुष्य के माता-पिता को बुलाकर
19उनसे यह न पूछ लिया, “क्या यह तुम्हारा पुत्र है, जिसे तुम कहते हो कि अंधा जन्मा था? तो अब वह कैसे देखता है?”
20उसके माता-पिता ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा, “हम जानते हैं कि यह हमारा पुत्र है और यह कि वह अंधा जन्मा था;
21परन्तु अब वह कैसे देखने लगा; हम नहीं जानते; या किसने उसकी आँखें खोलीं, हमें नहीं मालूम। उसी से पूछ लो-वह सयाना है, और वह अपने बारे में स्वयं बता देगा।”
22उसके माता पिता ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वे यहूदियों से डरते थे, क्योंकि यहूदी पहले ही एकमत हो चुके थे कि यदि कोई उसे मसीह मानेगा तो आराधनालय से निकाल दिया जाएगा।
23इस कारण उसके माता पिता ने कहा, “वह सयाना है, उसी से पूछो।”
24अतः उन्होंने उस मनुष्य को जो अंधा था दूसरी बार बुलाया और उससे कहा, “परमेश्वर की महिमा कर। हम जानते हैं कि यह मनुष्य पापी है।”
25तब उसने उत्तर दिया, “मैं नहीं जानता कि वह पापी है या नही। मैं तो एक बात जानता हूँ, कि मैं अंधा था और अब देखता हूँ।”
26इसलिए उन्होंने उससे पूछा, “उसने तेरे साथ क्या किया? तेरी आँखें उसने कैसे खोलीं?”
27उसने उन्हें उत्तर दिया, “मैं तो तुमसे पहले ही कह चुका, और तुमने नहीं सुना, फिर दूसरी बार क्यों सुनना चाहते हो? क्या तुम भी उसके चेले बनना चाहते हो?”
28और उन्होंने उसको बुरा-भला कहते हुए कहा, “तू ही उसका चेला है, परन्तु हम तो मूसा के चेले है।
29हम जानते हैं कि परमेश्वर ने मूसा से बातें कीं, परन्तु इस मनुष्य के सम्बन्ध में हम नहीं जानते कि कहां का है।”
30उस मनुष्य ने उत्तर देते हुए उनसे कहा, “अरे, यह तो बड़ी विचित्र बात है कि तुम नहीं जानते कि वह कहां का है, फिर भी उसने मेरी आंखें खोल दी।
31हम जानते हैं कि परमेश्वर पापियों की नहीं सुनता, परन्तु यदि कोई परमेश्वर का भय माननेवाला हो, और उसकी इच्छा पूरी करता हो तो वह उसकी सुनता है।
32आदिकाल से यह कभी सुनने में नहीं आया कि किसी ने जन्म के अंधे व्यक्ति की आँखें खोली हो।
33यदि यह मनुष्य परमेश्वर की ओर से नहीं होता तो वह कुछ कर ही नहीं सकता।”
34उन्होंने उत्तर देते हुए उससे कहा, “तू तो पूर्णतः पापों में जन्मा है, और क्या तू हमें सिखाने आया है?” और उन्होंने उसे निकाल कर बाहर कर दिया।
35यीशु ने सुना कि उन्होंने उसे निकाल कर बाहर कर दिया है, तो उससे मिलकर उसने कहा, “क्या तू मनुष्य के पुत्र पर विश्वास करता है?”
36उसने उत्तर देते हुए कहा, “वह कौन है प्रभु, कि मैं उस पर विश्वास करूं?”
37यीशु ने उससे कहा, “तूने उसे देखा भी है, और वही है जो अभी तेरे साथ बातें कर रहा है।”
38और उसने कहा, “प्रभु, मैं विश्वास करता हूँ।” और उसने उसे दण्डवत् किया।
39तब यीशु ने कहा, “मैं इस संसार में न्याय के लिए आया हूँ कि जो नहीं देखते वे देखें, और जो देखते हैं वे अंधे हो जाएँ।”
40फरीसियों में से कुछ उसके साथ थे। यह बातें सुनकर उन्होंने उससे कहा, “क्या हम भी अंधे हैं?”
41यीशु ने उनसे कहा, “यदि तुम अंधेे होते तो तुममें कोई पाप न होता। अब तुम कहते हो कि ‘हम देखते हैं;’ इसलिए तुम्हारा पाप बना रहता है।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)