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नया नियम · यूहन्ना · अध्याय 10 / 21

यूहन्ना 10

1“मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, वह जो द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु किसी दूसरी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है।

2परन्तु जो द्वार से प्रवेश करता, वह भेड़ों का चरवाहा है।

3द्वारपाल उसके लिए द्वार खोलता है और भेड़ें उसकी आवाज़ पहचानती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले-लेकर पुकारता है और उन्हें बाहर ले जाता है।

4जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल लेता है तो उनके आगे-आगे चलता है, और भेड़े उसके पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसकी आवाज़ पहचानती है।

5और वे किसी दूसरे के पीछे कभी नहीं जाएंगी, परन्तु उससे भागेंगी, क्योंकि वे दूसरों की आवाज़ नहीं पहचानती।”

6यीशु ने उनसे यह दृष्टान्त कहा, परन्तु वे नहीं समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हमसे कह रहा था।

7इसलिए यीशु ने उनसे फिर कहा, “मैं तुमसे सच-सच कहता हूँ, भेड़ों का द्वार मैं हूँ।

8जितने मुझसे पहले आए वे सब चोर और डाकू हैं; परन्तु भेड़ों ने उनकी नहीं सुनी।

9द्वार मैं हूँ। यदि कोई मेरे द्वारा प्रवेश करता है तो वह उद्धार पाएगा, और भीतर-बाहर आया-जाया करेगा और चारा पाएगा।

10चोर केवल चोरी करने, मार डालने, और नष्ट करने आता है। मैं इसलिए आया हूँ कि वे जीवन पाएं, और परिपूर्णता से पाए।

11अच्छा चरवाहा मैं हूँ; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिए अपना प्राण देता है।

12वह जो मज़दूर है, चरवाहा नहीं, और न ही भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते देख भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है और भेड़िया झपटकर उन्हें तितर-बितर कर देता है।

13वह इसलिए भाग जाता है क्योंकि वह मज़दूर है, और उसे भेड़ों की चिन्ता नही।

14अच्छा चरवाहा मैं हूँ; मैं अपनी भेड़ों को जानता हूँ, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं-

15वैसे ही जैसे पिता मुझे जानता है और मैं पिता को जानता हूँ-और मैं भेड़ों के लिए अपना प्राण देता हूँ।

16मेरी और भी भेड़ें हैं जो इस भेड़शाला की नही। मुझे उनको भी लाना अवश्य है, और वे मेरी आवाज़ सुनेंगी; तब उनका एक ही झुंड और एक ही चरवाहा होगा।

17इसी कारण पिता मुझसे प्रेम रखता है क्योंकि मैं अपना प्राण देता हूँ कि उसे फिर ले लूँ।

18किसी ने उसे मुझसे नहीं छीना, परन्तु मैं उसे अपने आप देता हूँ। मुझे उसे देने का अधिकार है, और फिर ले लेने का भी अधिकार है। यह आज्ञा मैंने अपने पिता से पाई है।”

19इन बातों के कारण यहूदियों में फिर फूट पड़ी।

20और उनमें से बहुत लोग कहने लगे, “उसमें दुष्टात्मा है और वह पागल है। तुम उसकी क्यों सुनते हो?”

21अन्य लोग कह रहे थे, “ये बातें ऐसे मनुष्य की नहीं जिसमें दुष्टात्मा हो। क्या दुष्टात्मा अंधे की आँखें खोल सकती है?”

22उस समय यरूशलेम में समर्पण-पर्व मनाया जा रहा था।;

23यह जाड़े का समय था, और यीशु मन्दिर में सुलैमान के ओसारे में टहल रहा था।

24अतः यहूदियों ने उसके चारों ओर इकट्ठे होकर उससे कहा, “तू हमें कब तक दुविधा में रखेगा? यदि तू मसीह है तो हमसे साफ-साफ कह दे।”

25यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैंने तुमसे कह दिया परन्तु तुम विश्वास नहीं करते; जो कार्य मैं अपने पिता के नाम से करता हूँ, वे ही मेरे विजय में साक्षी देते है।

26परन्तु तुम विश्वास नहीं करते क्योंकि तुम मेरी भेड़ों में से नहीं हो।

27मेरी भेड़ें मेरी आवाज़ सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे-पीछे चलती है।

28मैं उन्हें अनन्त जीवन देता हूँ, और वे कभी नष्ट न होंगी; और कोई भी उन्हें मेरे हाथों से छीन नहीं सकता।

29मेरा पिता, जिसने उन्हें मुझे दिया है, सबसे महान् है, और कोई भी उन्हें पिता के हाथों से नहीं छीन सकता।

30मैं और पिता एक है।”

31यहूदियों ने उसपर पथराव करने को फिर पत्थर उठाए।

32यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “मैंने तुम्हें पिता की ओर से बहुत-से अच्छे कार्य दिखाए; उनमें से किसके लिए तुम मेरा पथराव कर रहे हो?”

33यहूदियों ने उसे उत्तर दिया, “हम अच्छे कार्य के लिए तेरा पथराव नहीं करते, परन्तु परमेश्वर की निन्दा करने के कारण; और इसलिए भी कि तू मनुष्य होकर अपने आपको परमेश्वर बतलाता है।”

34यीशु ने उन्हें उत्तर दिया, “क्या तुम्हारी व्यवस्था में नहीं लिखा है, ‘मैंने कहा, तुम ईशवर हो’?

35जबकि उसने उन्हें ईशवर कहा जिनके पास परमेश्वर का वचन पहुँचा (और पवित्रशास्त्र का खण्डन नहीं किया जा सकता),

36तो जिसे पिता ने पवित्र ठहराकर संसार में भेजा, क्या तुम उसके विजय में इसलिए कहते हो, ‘तू निन्दा करता है,’ क्योंकि मैंने कहा, ‘मैं परमेश्वर का पुत्र हूँ’?

37यदि मैं अपने पिता के कार्य नहीं करता, तो मेरा विश्वास न करो;

38परन्तु यदि मैं उन्हें करता हूँ यघपि तुम मेरा विश्वास नहीं करते, उन कार्यों के कारण तो विश्वास करो कि तुम जानो और समझो कि पिता मुझमें है और मैं पिता में हूँ।”

39अतः उन्होंने उसे पकड़ने का फिर प्रयत्न किया, परन्तु वह उनके हाथ से बच कर निकल गया।

40और वह फिर यरदन पार उस स्थान पर चला गया जहाँ यूहन्ना पहले बपतिस्मा दिया करता था; और वह वहीं रहने लगा।

41बहुत-से लोग उसके पास आकर यह कह रहे थे, “यूहन्ना ने तो कोई चिह्न नहीं दिखाया, फिर भी उसने जो कुछ इस मनुष्य के विजय में कहा था, वह सब सच था।”

42और वहां बहुत लोगों ने यीशु पर विश्वास किया।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)