पुराना नियम · योना · अध्याय 1 / 4
योना 1
1अमितै के पुत्र योना के पास यहोवा का यह वचन पहुंचाः
2“उठ, महानगर नीनवे को जा और उसके विरफ़द्ध प्रचार कर, क्योंकि लोगों की दुष्टता बढ़कर मेरे सम्मुख पहुंच गई है।”
3परन्तु योना यहोवा की उपस्थिति से तर्शीश को भाग जाने के लिए उठा। वह याफा को गया, और वहां उसे तर्शीश जाने वाला एक जहाज मिला; वह किराया देकर उनके साथ उस पर चढ़ गया कि यहोवा की उपस्थिति से भागकर तर्शीश को जाए।
4तब यहोवा ने समुद्र पर प्रचंड आंधी चलाई और समुद्र में एक बडा़ तूफान उठा जिससे कि जहाज टूटने वाला था।
5तब मल्लाह डर कर अपने-अपने देवता को पुकारने लगे; और उन्होंने जहाज को हल्का करने के लिए उस पर लदे हुए माल को समुद्र में फेंक दिया। परन्तु योना जहाज के तलघर में चला गया था और लेटकर गहरी नींद में सोया हुआ था।
6तब कप्तान ने उसके पास जाकर कहा, “क्या बात है? तू क्यों सो रहा है? उठ, अपने ईश्वर को पुकार। हो सकता है कि तेरा ईश्वर हमारी सुधि ले कि हम नष्ट न हो।”
7उन्होंने आपस में कहा, “आओ, हम चिट्ठियां डालकर मालूम करें कि यह विपत्ति हम पर किसके कारण आ पड़ी है।” तब उन्होंने चिट्ठियां डालीं, और चिट्ठी योना के नाम पर निकली।
8तब उन्होंने उससे कहा, “अब हमें बता कि किस व्यक्ति के कारण यह विपत्ति हम पर आ पड़ी? तेरा व्यवसाय क्या है? तू कहां का है? तू किस देश और किस जाति का है?”
9तब उसने उनसे कहा, “मैं इब्रानी हूं और मैं उस परमेश्वर यहोवा का भय मानता हूं जिसने जल और थल दोनों को बनाया।”
10तब वे लोग अत्यन्त डर गए, और उससे कहने लगे, “यह तूने क्या किया?” क्योंकि उनको मालूम था कि वह यहोवा की उपस्थिति से भाग रहा था इसलिए कि उसने उनको स्वयं बता दिया था।
11अतः उन्होंने उससे कहा, “हम तेरे साथ क्या करें कि समुद्र हमारे लिए शान्त हो जाए?” क्योंकि समुद्र में तूपफ़ान बढ़ता ही जा रहा था।
12उसने उनसे कहा, “मुझे उठाकर समुद्र में फेंक दो। तब तुम्हारे लिए समुद्र शान्त हो जाएगा। क्योंकि मैं जानता हूं कि यह भारी तूफान मेरे ही कारण तुम पर आया है।”
13फिर भी वे बड़े परिश्रम से खेते रहे कि किनारे लग जाएं, परन्तु वे पहुँच न सके क्योंकि लहरें उनके विरफ़द्ध और भी प्रचंड होती जा रही थी।
14तब उन्होंने यहोवा को पुकार कर कहा, “हे यहोवा, हम हृदय से विनती करते हैं, इस मनुष्य के जीवन के कारण हम नष्ट न हों, और न तू हमें निर्दोष के लहू का दोषी ठहरा, क्योंकि हे यहोवा, तूने जो चाहा वही किया है।”
15अतः उन्होंने योना को उठाकर समुद्र मेंं फेंक दिया, और प्रचंड लहरेें शान्त हो गईं।
16तब उन्होंने यहोवा का अत्यधिक भय माना और उसके लिए बलिदान चढ़ाकर मन्नतें मानी।
17यहोवा ने योना को निगलने के लिए एक महामच्छ ठहराया, और योना तीन दिन और तीन रात उस मच्छ के पेट में रहा।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)