पुराना नियम · योना · अध्याय 2 / 4
योना 2
1तब योना ने उस मच्छ के पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना की।
2उसने कहा, “संकट पड़ने पर मैंने यहोवा को पुकारा, और उसने मुझे उत्तर दिया; मैंने सहायता के लिए अधोलोक की गहराई से पुकारा, और तूने मेरी सुन ली
3तूने मुझे गहरे सागर में, समुद्र की तलहटी में डाल दिया; और धाराओं ने मुझे घेर लिया तेरी सब लहरें और तरंगें मुझ पर वेग से बह गईं।
4तब मैंने कहा, ‘मैं तेरी आंखों के सामने से निकाल दिया गया हूं, फिर भी मैं तेरे पवित्र मन्दिर की ओर निहारूंगा।’
5जल से मैं यहां तक घिरा हुआ था कि मेरा दम घुटने पर था, गहरे सागर ने मुझे घेर लिया था, सिवार मेरे सिर के चारों ओर लिपटा हुआ था।
6मैं पहाड़ों की तलहटी तक उतर चुका था, भूमि के बन्धनों ने मुझे सदा के लिए जकड़ लिया था, परन्तु, हे यहोवा मेरे परमेश्वर, तूने मेरे प्राण को अधोलोक में से निकाल लिया है।
7जब मैं मूर्च्छित होने लगा, मैैंने यहोवा को स्मरण किया; और मेरी प्रार्थना तेरे पास वरन् तेरे पवित्र मन्दिर तक पहुंची।
8जो व्यर्थ मूर्तियों पर मन लगाते हैं, वे अपने करफ़णानिधान को त्याग देते है।
9परन्तु मेैं धन्यवाद के गीत गा-गाकर तेरे लिए बलिदान चढ़ाऊंगा। जो मन्नत मैंने मानी है, उसे मैं पूरी करूंगा। उद्धार यहोवा ही से है।”
10तब यहोवा ने महामच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को सूखी भूमि पर उगल दिया।
पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)