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पुराना नियम · यहोशू · अध्याय 21 / 24

यहोशू 21

1इसके बाद लेवियों के कुलों के मुखिए तो एलिआजार याजक, नून के पुत्र यहोशू और इस्राएलियों के गोत्रों के कुलों के मुखियों के पास

2कनान देश के शीलो नगर में आकर उनसे कहने लगे, “यहोवा ने मूसा के द्वारा आज्ञा दी थी कि हमें रहने के लिए नगर और हमारे पशुओं के लिए चरागाह दिए जांए।”

3तब इस्राएलियों ने यहोवा की आज्ञा के अनुसार अपने-अपने भाग में से लेवियों को चरागाह सहित ये नगर दिए।

4तब कहातियों के कुलों के नाम चिट्ठी निकली, और लेवियों में से हारून याजक की सन्तान को यहूदा, शिमोन और बिन्यामीन के गोत्रों के भागों में से चिट्ठी द्वारा तेरह नगर प्राप्त हुए।

5शेष कहातियों को एप्रैम, दान और मनश्शे के आधे गोत्रों के कुलों के भागों में से चिट्ठी द्वारा दस नगर प्राप्त हुए।

6फिर गेर्शोनियों को इस्साकार, आशेर और नप्ताली के गोत्रों तथा बाशान में मनश्शे के आधे गोत्र के कुलों के भागों में से चिट्ठी द्वारा तेरह नगर प्राप्त हुए।

7मरारियों को अपने कुलों के अनुसार रूबेन, गाद और जबूलून के गोत्रों के भागों में से बारह नगर प्राप्त हुए।

8यहोवा के द्वारा मूसा को दी गई आज्ञा के अनुसार इस्राएलियों ने लेवियों को चिट्ठी डालकर ये ही नगर और उनके साथ उनके चरागाह दिए।

9उन्होंने यहूदा-वंशियों और शिमोनियों के गोत्रों के भाग में से जो नगर दिए उनके नाम यहां लिखे है।

10ये नगर लेवीय कहातियों के कुलों में से, अर्थात् हारून-वंशियों के कुल के लिए थे, क्योंकि पहली चिट्ठी उन्हीं के नाम निकली थी।

11उनको उन्होंने यहूदा के पहाड़ी प्रदेश के किर्यत-अर्बा अर्थात् हेब्रोन को उसके चारों ओर के चरागाह समेत दे दिया। अर्बा तो अनाक का पिता था।

12परन्तु उस नगर के खेत और गांव उन्होंने यपुन्ने के पुत्र कालेब को उसके निज भाग होने के लिए दे दिए।

13तब उन्होंने हारून याजक की सन्तान को ये नगर दिएः चरागाह सहित हेब्रोन जो हत्यारे के लिए शरणस्थान था, लिब्ना और उसके चरागाह

14यत्तीर और उसके चरागाह, एश्तमो और उसके चरागाह।

15होलोन और उसके चरागाह, दबीर और उसके चरागाह,

16ऐन और उसके चरागाह, यूत्ता और उसके चरागाह, तथा बेत-शेमेश और उसके चरागाह, अर्थात् इन दोनों गोत्रों के भाग से नौ नगर।

17फिर बिन्यामीन के भाग से गिबोन और उसके चरागाह, गेबा और उसके चरागाह,

18अनातोत और उसके चरागाह, अल्मोन और उसके चरागाह अर्थात् कुल चार नगर।

19इस प्रकार हारून-वंशियों याजकों को चरागाहों सहित कुल तेरह नगर मिले।

20फिर लेवी गोत्र के कहातियों को अर्थात् शेष कहातियों के कुलों को एप्रैम गोत्र के भाग में से नगर चिट्ठी डालकर दिए गए।

21उनको उन्होंने एप्रैम के पहाड़ी क्षेत्र में शकेम जो हत्यारे के लिए शरण-नगर था और उसके चरागाह, गेजेर और उसके चरागाह सहित,

22किबसैम और उसके चरागाह तथा बेत-होरोन और उसके चरागाह अर्थात् चार नगर।

23तब दान के गोत्र की भूमि में से एलतके और उसके चरागाह, गिब्बतोन और उसके चरागाह,

24अय्यालोन और उसके चरागाह और गत-रिम्मोन और उसके चरागाह अर्थात् कुल चार नगर दिए।

25मनश्शे के आधे-गोत्र के भाग में से तानाक और उसके चरागाह तथा गत-रिम्मोन और उसके चरागाह दिए अर्थात् दो नगर दिए।

26इस प्रकार शेष कहातियों के कुलों के लिए चरागाहों सहित कुल दस नगर थे।

27लेवी के कुलों में से एक अर्थात् गेर्शेनियों को मनश्शे के आधे-गोत्र के भाग में से बाशान में चरागाह सहित गोलान जो हत्यारे के लिए शरण-नगर था और चरागाह सहित बेएश्तरा अर्थात् दो नगर,

28इस्साकार के गोत्र के भाग में से किश्योन और उसके चरागाह, दाबरत और उसकेे चरागाह,

29यर्मूत और उसके चरागाह, तथा एन-गन्नीम और उसके चरागाह अर्थात् चार नगर दिए।

30फिर आशेर के गोत्र के भाग में से मिशाल और उसके चरागाह, अब्दोन और उसके चरागाह,

31हेल्कात और उसके चरागाह, तथा रहोब और उसके चरागाह अर्थात् चार नगर दिए।

32और नप्ताली के गोत्र के भाग में से गलील में चरागाह सहित कादेश जो हत्यारे के लिए शरण-नगर था, हम्मोत-दोर और उसके चरागाह तथा कर्तान और उसके चरागाह अर्थात् तीन नगर दिए।

33गेर्शोनियों को उनके कुलों के अनुसार चरागाहों सहित कुल तेरह नगर मिले।

34लेवी के शेष गोत्र अर्थात् मरारी की सन्तान उनके कुलों के अनुसार जबूलून के गोत्र के भाग में से योकनाम और उसके चरागाह, कर्ता और उसके चरागाह,

35दिम्ना और उसके चरागाह तथा नहलाल और उसके चरागाह अर्थात् चार नगर दिए।

36फिर रूबेन के गोत्र के भाग में से बेसेर और उसके चरागाह, यहसा और उसके चरागाह,

37कदेमोत और उसके चरागाह तथा मेपात और उसके चरागाह अर्थात् चार नगर दिए।

38गाद के गोत्र के भाग में से चरागाह सहित गिलाद का रामोत जो हत्यारे के लिए शरण-नगर था, महनैम और उसके चरागाह,

39हेश्बोन और उसके चरागाह, तथा याजेर और उसके चरागाह अर्थात् कुल चार नगर दिए।

40ये सब नगर मरारियों के कुलों के अनुसार लेवियों के शेष कुलों को मिले। उनके भाग में कुल बारह नगर आए।

41इस्राएलियों के निज भाग के मध्य, चरागाहों सहित, लेवियों के कुल अड़तालीस नगर थे।

42इन नगरों में से प्रत्येक के चारों ओर चरागाह थे। ये सब नगर ऐसे ही थे।

43इस प्रकार यहोवा ने इस्राएलियों को वह सारा देश दे दिया जिसे देने की शपथ उसने उनके पूर्वजों से खाई थी और वे उसे अपने अधिकार में करके उसमें बस गए।

44और उसने उनके पूर्वजों से जिन बातों की शपथ खाई थी उन सबके अनुसार उसने उनको चारों ओर से विश्राम दिया। उनके शत्रुओं में से कोई भी उनके सामने टिक न सका। यहोवा ने उनके सब शत्रुओं को उनके वश में कर दिया।

45यहोवा ने इस्राएल के घराने से जो जो भली प्रतिज्ञाएं की थीं उनमें से एक भी न छूटी, सबकी सब पूरी हुईं।

पवित्रशास्त्र का पाठ: Hindi Standard Version (HSV)